Wednesday, 11 ,February 2026
RNI No. MPHIN/2018/76422
: mahikigunj@gmail.com
Contact Info

HeadLines

शोक का कहरः शादी में 2 बजे बहन की विदाई, 5 बजे भाई का हुआ अंतिम संस्कार | पंचायत ओर पुलिस ने किया अपना काम, राजस्व विभाग निभाए अपनी जिम्मेदारी | देवर की शादी में नाचने व रील बनाने से रोका तो नवविवाहिता ने पति का गला घोट की हत्या | 23 टैंकर वितरण के साथ विधायक ने किया कार्यकर्ताओं से संवाद | दिलीप परमार का हुआ शासकीय सेवा काल समाप्त, हुई भावभीनी विदाई | आसमान से आफ़त की बारिश किसानों की फसले चौपट | बड़ा ही हर्षोल्लास से मनाया गणतंत्र दिवस | जिले में गौ-हत्या को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन, उधर भारत बीफ एक्सपोर्ट में लगातार बढ़ा रहा अपनी रेंक | पुलिस चौकी पर मनाया 77वां गणतंत्र दिवस | हर्षोल्लास के साथ मनाया 77 वा गणतंत्र दिवस | 4 स्थाई वारंटीयों गिरफ्तार | बसंत पंचमी के पावन पर्व शिवशक्ति महायज्ञ की पूर्णाहुति | हिन्दू सम्मेलन का हुआ आयोजन, हिन्दू एकता का दिया संदेश | घर का चिराग ऋषभ का अंत आखिर क्यों...? | घोड़ावत जी को दी 12वी श्रद्धांजलि, हुआ पत्रकार महासम्मेलन | हिन्दू सम्मेलन की तैयारियां शुरू | महिला की इलाज के दोरान हुई मौत के बाद आरोपीयों की गिरफ्तारी नहीं, आदिवासी समाज में आक्रोश | स्नेह सम्मेलन: पारिवारिक एकता का संदेश | मक्का की फसल के बीच अवैध रूप से उगाया गांजा, आरोपी गिरफ्तार | हर्षौल्लास के साथ मनाई गई ब्रह्मलीन महंत 1008 श्री काशीगिरीजी महाराज की पुण्यतिथि |

गैस सिलेंडर के भाव बढ़ने से परेशान समूह लकड़ी पर बना रहे भोजन
19, Dec 2022 3 years ago

image

माही की गूंज, आम्बुआ।
        महंगाई का असर सभी और बड़ता नजर आ रहा है। इसका एक असर घर तथा अन्य स्थानों पर बने रसोईघर में अधिक दिखाई दे रहा है। उज्जवला योजना में नि:शुल्क  मिला सिलेंडर अब नहीं भरा पाने के कारण पुनः चूल्हा भट्टी में लकड़ी का उपयोग होने लगा है।
         गूंज संवाददाता को मिली जानकारी के अनुसार शिक्षण संस्थाओं में मध्यान्ह भोजन बनाए जाने का कार्य स्वसहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है। कस्बा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत समूहों को भी गैस सिलेंडर प्रदाय किए गए हैं। जिस संस्था में 200-300 बच्चों के लिए भोजन बनता है वहां एक सिलेंडर एक हफ्ते चलता है। इस तरह पूरे महीने में लगभग 5 सिलेंडर लगते हैं। एक सिलेंडर भरवाने में क्षेत्र में एक हजार 150 रुपए कीमत लग रही है। यहां भोजन बनाने वाले समूह इतना महंगा सिलेंडर नहीं खरीद पा रहे हैं। मजबूरन उन्हें लकड़ी जलाना पड़ रही है। जिस कारण इतना धुआं होता है कि, कमरे तो काले हो ही रहे हैं आंखों से आंसू भी बहते हैं फेफड़ों में जाने वाला धुआं भोजन बनाने वाली चार-पांच महिलाओं के स्वास्थ पर विपरीत असर डाल रहा होगा।
         समूह की महिलाओं ने बताया कि, सिलेंडर के भाव बढ़ने के कारण समूह इतनी राशि खर्च नहीं कर सकता। मजबूरन चूल्हे में लकड़ी जलाना पड़ती है। गैस से लकड़ी सस्ती पड़ती है फिर यह लकड़ी का धुआं भले ही उन्हें बीमारी की ओर धकेल दे। शासन की ओर से सब्सिडी भी लगभग बंद कर दी है। यदि मिल भी रही है तो बहुत कम मिलती है। कई बार सब्सिडी खातों में नहीं आती है। शासन-प्रशासन को इस ओर अविलंब ध्यान देकर मध्य भोजन बनाने वाले समूह को सिलेंडर के भाव में कमी करना जरूरी माना जा रहा है।


माही की गूंज समाचार पत्र एवं न्यूज़ पोर्टल की एजेंसी, समाचार व विज्ञापन के लिए संपर्क करे... मो. 9589882798 |