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महारांणा प्रताप की पुण्यतिथि मनाई
20, Jan 2022 4 years ago

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पूजा उन्ही की होती है जो बलिदानी होते हैं- नारायणसिंह चिकलाना

माही की गूंज, रतलाम/कालूखेड़ा।

         सेंकडो वर्षो की गुलामी से इस देश को स्वतंत्र कराने में सैकड़ों वीरो ने अपना बलिदान दिया है इसी कड़ी में एक नाम आता है महाराणा प्रताप का, जो ऐसे कालखंड में हुए थे जहां अखंड भारत में अकबर अपनी कूटनीति से चारों तरफ अपना साम्राज्य स्थापित करना चाहता था। कई राजाओं ने कूटनीति की चाल में आकर अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली। एक मात्र महाराणा प्रताप ही थे जिन्होंने अपनी सेना में भील, गाडोलिया सहीत हर तबके से सैनिकों को तैयार कर कठिन से कठिन वीपदाओ को सहन कर घोर जंगलों में भटके व संघर्ष किया लेकिन अकबर के साथ कभी भी समझौता नहीं किया। ऐसे कई वीलुप्त वीरों ने इस देश को स्वतंत्र कराने में अपना बलिदान दिया हें। जिनका इतिहास हमें नहीं पढ़ाया गया उन्हें आज खंगालने की आवश्यकता है। महापुरुष कीसी जाति के नहीं राष्ट्र के प्रहरी होते हैं। आज बड़ी विडंबना है कि, कुछ स्वार्थी ताकते देश को जाति, धर्म, वर्ग के नाम पर बाटने के नाकाम प्रयास कर रही है। ऐसे में हम सभी को जातीवाद भेदभाव छुत अछुत से परे रहकर राष्ट्रप्रेम के लिए खड़े होने की आवश्यकता है। प्रताप ने हल्दीघाटी युद्ध मे अपने दुश्मनों की पत्नियों को भी नारी का सम्मान कर अपने क्षत्रिय धर्म का पालन कर एक उदारवादीता का उदाहरण दीया। उनका एक ही संकल्प था कि, मेरी सनातन संस्कृति सुरक्षित रहें यही मेरा राष्ट्रधर्म होगा। उसी कारण आज महाराणा प्रताप का इतिहास प्रासंगिक बना और बना रहेगा। प्रताप का नाम लेने से स्वाभीमान चित्र देखने से चरित्र व इतिहास पडने से साहस जागृत हो जाता है। प्रताप और अकबर के बीच स्वधर्म संस्कृति ओर स्वाभिमान की लड़ाई थी इसीलिए तो उनका साहस शौर्य और पराक्रम  भारतीय इतिहास मे प्रासंगिक बना। इसीलिए तो कहा जाता है कि, इतिहास उन्हीं का होता है जो वीर होते हैं  पूजा उन्ही की होती है जो बलिदानी होते हैं।

          उक्त बात तालीदाना गुरुकृपा पर में महारांणा प्रताप की पुण्यतिथि के अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता नारायणसिंह चिकलाना ने उपस्थित बंधुओं को संबोधित करते हुए कहीं। इस अवसर पर तालीदाना गौशाला समिति अध्यक्ष गजराजसिंह राठोर, कोषाध्यक्ष मन्नालाल शर्मा,  देवेंद्रसिंह राठोर (दादू बना), रवींद्रसिंह राठोर, लाखनसिंह, श्यामलाल धाकड़, जयेश शर्मा आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन व आभार गज्जु बना तालीदाना ने व्यक्त किया।


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