Tuesday, 03 ,March 2026
RNI No. MPHIN/2018/76422
: mahikigunj@gmail.com
Contact Info

HeadLines

वालपुर के भगोरिया मेले में हुए क़त्ल के आरोपी गिरफ्तार | 2 को होलिका दहन, 4 को धुलेंडी | वाह रे टीआई अशोक कनेश साहब, आप के अनुसार गांव के आम व्यापारी समझदार नहीं, पर आपकी गजब की समझदारी की भगोरिया हाट में रंग-गुलाल की दुकाने अपनी धोस के साथ बंद करवाएंगे पर अवैध शराब खुलेआम बिकवाएंगे...? | छः वर्षीय इजहान पठान ने रखा रोजा | हज यात्रियों के प्रशिक्षण, टीका-करण व स्वाथ्य परीक्षण हैतु शिविर का आयोजन | लगातार बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता, गेहूं की फसल पर संकट | सात वर्षीय मोहम्मद जीशान ने रखा रोजा | अतिक्रमण मुहिम: ठेले, गाड़िया और छोटी घुमटियों हटाकर प्रशासन ने की लीपापोती | शांति समिति की बैठक सम्पन्न | शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे केंद्रीय मंत्री और विधायक | सुने घर मे चोरी करने वाले आरोपी को गिरफ्तार करने मे पलिस को मिली सफलता | शोक का कहरः शादी में 2 बजे बहन की विदाई, 5 बजे भाई का हुआ अंतिम संस्कार | पंचायत ओर पुलिस ने किया अपना काम, राजस्व विभाग निभाए अपनी जिम्मेदारी | देवर की शादी में नाचने व रील बनाने से रोका तो नवविवाहिता ने पति का गला घोट की हत्या | 23 टैंकर वितरण के साथ विधायक ने किया कार्यकर्ताओं से संवाद | दिलीप परमार का हुआ शासकीय सेवा काल समाप्त, हुई भावभीनी विदाई | आसमान से आफ़त की बारिश किसानों की फसले चौपट | बड़ा ही हर्षोल्लास से मनाया गणतंत्र दिवस | जिले में गौ-हत्या को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन, उधर भारत बीफ एक्सपोर्ट में लगातार बढ़ा रहा अपनी रेंक | पुलिस चौकी पर मनाया 77वां गणतंत्र दिवस |

महारांणा प्रताप की पुण्यतिथि मनाई
20, Jan 2022 4 years ago

image

पूजा उन्ही की होती है जो बलिदानी होते हैं- नारायणसिंह चिकलाना

माही की गूंज, रतलाम/कालूखेड़ा।

         सेंकडो वर्षो की गुलामी से इस देश को स्वतंत्र कराने में सैकड़ों वीरो ने अपना बलिदान दिया है इसी कड़ी में एक नाम आता है महाराणा प्रताप का, जो ऐसे कालखंड में हुए थे जहां अखंड भारत में अकबर अपनी कूटनीति से चारों तरफ अपना साम्राज्य स्थापित करना चाहता था। कई राजाओं ने कूटनीति की चाल में आकर अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली। एक मात्र महाराणा प्रताप ही थे जिन्होंने अपनी सेना में भील, गाडोलिया सहीत हर तबके से सैनिकों को तैयार कर कठिन से कठिन वीपदाओ को सहन कर घोर जंगलों में भटके व संघर्ष किया लेकिन अकबर के साथ कभी भी समझौता नहीं किया। ऐसे कई वीलुप्त वीरों ने इस देश को स्वतंत्र कराने में अपना बलिदान दिया हें। जिनका इतिहास हमें नहीं पढ़ाया गया उन्हें आज खंगालने की आवश्यकता है। महापुरुष कीसी जाति के नहीं राष्ट्र के प्रहरी होते हैं। आज बड़ी विडंबना है कि, कुछ स्वार्थी ताकते देश को जाति, धर्म, वर्ग के नाम पर बाटने के नाकाम प्रयास कर रही है। ऐसे में हम सभी को जातीवाद भेदभाव छुत अछुत से परे रहकर राष्ट्रप्रेम के लिए खड़े होने की आवश्यकता है। प्रताप ने हल्दीघाटी युद्ध मे अपने दुश्मनों की पत्नियों को भी नारी का सम्मान कर अपने क्षत्रिय धर्म का पालन कर एक उदारवादीता का उदाहरण दीया। उनका एक ही संकल्प था कि, मेरी सनातन संस्कृति सुरक्षित रहें यही मेरा राष्ट्रधर्म होगा। उसी कारण आज महाराणा प्रताप का इतिहास प्रासंगिक बना और बना रहेगा। प्रताप का नाम लेने से स्वाभीमान चित्र देखने से चरित्र व इतिहास पडने से साहस जागृत हो जाता है। प्रताप और अकबर के बीच स्वधर्म संस्कृति ओर स्वाभिमान की लड़ाई थी इसीलिए तो उनका साहस शौर्य और पराक्रम  भारतीय इतिहास मे प्रासंगिक बना। इसीलिए तो कहा जाता है कि, इतिहास उन्हीं का होता है जो वीर होते हैं  पूजा उन्ही की होती है जो बलिदानी होते हैं।

          उक्त बात तालीदाना गुरुकृपा पर में महारांणा प्रताप की पुण्यतिथि के अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता नारायणसिंह चिकलाना ने उपस्थित बंधुओं को संबोधित करते हुए कहीं। इस अवसर पर तालीदाना गौशाला समिति अध्यक्ष गजराजसिंह राठोर, कोषाध्यक्ष मन्नालाल शर्मा,  देवेंद्रसिंह राठोर (दादू बना), रवींद्रसिंह राठोर, लाखनसिंह, श्यामलाल धाकड़, जयेश शर्मा आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन व आभार गज्जु बना तालीदाना ने व्यक्त किया।


माही की गूंज समाचार पत्र एवं न्यूज़ पोर्टल की एजेंसी, समाचार व विज्ञापन के लिए संपर्क करे... मो. 9589882798 |