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यूनिफॉर्म सिविल कोड एवं सिंधी पेशाब कांड के विरोध में आदिवासी समाज ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
09, Jul 2023 10 months ago

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माही की गूंज, अलीराजपुर/जोबट।

         अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यलय जोबट में आदिवासी समाज के लोगो ने एकत्रित होकर यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) के विरोध में राष्ट्रपति और विधि आयोग के नाम ज्ञापन सौंपा। साथ ही जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रिंकुबाला लालसिंह डावर ने अपने लेटर पेड के माध्यम से यूनिफार्म सिविल कोड एवं सीधी जिले में एक आदिवासी युवक पर प्रवेश शुक्ला के नाम के व्यक्ति द्वारा पेशाब करने के विरोध में भी ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें बडी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, किसान, मजदूर, छात्र तथा युवा शामिल हुए। ज्ञापन के माध्यम से विधि आयोग से अनुरोध किया गया है कि, आदिवासी के हितों को ध्यान में रखते हुए उनकी सुरक्षा, संरक्षण, पहचान और अधिकार बचाए रखने के लिए समान नागरिक संहिता आदिवासी समुदाय पर लागु नहीं किया जाए। आदिवासी की अपनी अलग ही रीति-रिवाज, परम्परा, संस्कृति और अधिकार हैं। कॉस्टमरी लॉ अनुच्छेद-13(3), पांचवी अनुसूचित-244 (1)(2), अनुच्छेद-19 (5)(6) तथा विवाह, तलाक, संपत्ति उत्तराधिकारी, दत्तक औऱ लोकप्रतिनिधि, आरक्षण, न्यायिक फैसले समता जजमेंट 1997, वेदांत जजमेंट 2013 आदि पर समान नागरिक संहिता लागु होना संवैधानिक अवहेलना हैं।

          जिला पंचायत सदस्य ठाकुर अजनार ने विरोध दर्ज करते हुए कहा, ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में मिले आदिवासी संवैधानिक अधिकार के लिये समान नागरिक संहिता लागु करना न्याय संगत नहीं होगा।

          जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रिंकुबाला लालसिंह डावर ने कहा कि, भारत देश में विविधता में एकता वाला देश हैं। गारो, खासी जैसे जनजाति मातृसत्तात्मक व मातृवंशीय हैं।कॉस्टमरी लॉ, दापा-देजा वधूमूल्य ने आदिवासी समाज की महिलाओं की प्रतिष्ठा बढाई, परिणामस्वरूप आदिवासी समाज मे महिला लिंगानुपात सर्वाधिक हैं।

सीधी मामले में पीड़ित को राहत राशि स्वीकृत की मांग

        श्रीमती रिंकुबाला ने कहा, वर्तमान में मध्यप्रदेश सरकार में आदिवासियों पर अत्याचार इतने बढ़ गए। जहाँ बहन बेटियों के साथ मासूम बच्चियां तक सुरक्षित नही है। आरजकता का माहौल है। किसान, मजदूर कर्मचारी सब डरे सहमे है। सरकार प्रवेश सुकला पर कठोर दण्डात्मक कार्यवाही करें। ताकि भविष्य में ऐसी घटना की दोबारा किसी भी जाति वर्ग के व्यक्ति के साथ पूर्णवर्ती न हो ऒर आदिवासी पीड़ित युवक दसमत रावत को अनुसूचित जाती/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत एवं आखाद्यय, घृणात्मक पदार्थ पिलाने, अनादर सूचक कार्य अधिनियम की धारा 3(1), क्षति पहुंचाने अपमानित करने की अधिनियम की धारा 3 एवं अधिनियम की अनुसूचि 12(4)अनुसार उचित राहत राशि को तत्काल स्वीकृत कर भुगतान करने की कार्यवाही करें। 

         बात दे कि, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सीधी पेशाब कांड के पीड़ित दशमत रावत के पैर धोने, सार्वजनिक रूप से उनसे माफी मांगने और उन्हें वित्तीय सहायता देने से लेकर आरोपी प्रवेश शुक्ला के घर को तोड़ने और उस पर एनएसए के तहत कार्रवाई भी करवा चुके है। वही मध्यप्रदेश सरकार ने सीधी पेशाब कांड के पीड़ित आदिवासी व्यक्ति को 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है और उसके घर के निर्माण के लिए 1.50 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि प्रदान की है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी थी। सीधी जिला कलेक्टर ने कहा कि, मुख्यमंत्री के निर्देश पर रावत के लिए पांच लाख रुपये की वित्तीय सहायता और घर के निर्माण के लिए डेढ़ लाख रुपये कुल मिलाकर 6 लाख 50 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता मंजूर की गई है।

         ज्ञापन देते समय प्रदीप डुडवे, मोतेसिंह भूरिया, सुनील मोरे, विक्रम चौहान मुकेश, बबलु, बिसन चौहान चौहान, छात्र कांति बघेल, रवि अजनार, सुनील मनलाई, जिग्नेश चौहान, संदीप चौहान, जगना सोलंकी, गमसम भिंडे के साथ जयस, आकास, आदिवासी संगठन छात्र, आदिवासी एकता परिषद आदि संगठन के प्रतिनिधि उपस्थित थे। ज्ञापन का वाचन शंकरसिंह गुथरिया ने किया।


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