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2 को होलिका दहन, 4 को धुलेंडी | वाह रे टीआई अशोक कनेश साहब, आप के अनुसार गांव के आम व्यापारी समझदार नहीं, पर आपकी गजब की समझदारी की भगोरिया हाट में रंग-गुलाल की दुकाने अपनी धोस के साथ बंद करवाएंगे पर अवैध शराब खुलेआम बिकवाएंगे...? | छः वर्षीय इजहान पठान ने रखा रोजा | हज यात्रियों के प्रशिक्षण, टीका-करण व स्वाथ्य परीक्षण हैतु शिविर का आयोजन | लगातार बारिश से किसानों की बढ़ी चिंता, गेहूं की फसल पर संकट | सात वर्षीय मोहम्मद जीशान ने रखा रोजा | अतिक्रमण मुहिम: ठेले, गाड़िया और छोटी घुमटियों हटाकर प्रशासन ने की लीपापोती | शांति समिति की बैठक सम्पन्न | शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे केंद्रीय मंत्री और विधायक | सुने घर मे चोरी करने वाले आरोपी को गिरफ्तार करने मे पलिस को मिली सफलता | शोक का कहरः शादी में 2 बजे बहन की विदाई, 5 बजे भाई का हुआ अंतिम संस्कार | पंचायत ओर पुलिस ने किया अपना काम, राजस्व विभाग निभाए अपनी जिम्मेदारी | देवर की शादी में नाचने व रील बनाने से रोका तो नवविवाहिता ने पति का गला घोट की हत्या | 23 टैंकर वितरण के साथ विधायक ने किया कार्यकर्ताओं से संवाद | दिलीप परमार का हुआ शासकीय सेवा काल समाप्त, हुई भावभीनी विदाई | आसमान से आफ़त की बारिश किसानों की फसले चौपट | बड़ा ही हर्षोल्लास से मनाया गणतंत्र दिवस | जिले में गौ-हत्या को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन, उधर भारत बीफ एक्सपोर्ट में लगातार बढ़ा रहा अपनी रेंक | पुलिस चौकी पर मनाया 77वां गणतंत्र दिवस | हर्षोल्लास के साथ मनाया 77 वा गणतंत्र दिवस |

वाह रे टीआई अशोक कनेश साहब, आप के अनुसार गांव के आम व्यापारी समझदार नहीं, पर आपकी गजब की समझदारी की भगोरिया हाट में रंग-गुलाल की दुकाने अपनी धोस के साथ बंद करवाएंगे पर अवैध शराब खुलेआम बिकवाएंगे...?
01, Mar 2026 7 hours ago

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माही की गूंज, खवासा।

         एक समय में मवेशी मेले के नाम से खवासा प्रसिद्ध था लेकिन  उड़दंगियो व असामाजिक तत्वों की वजह से खवासा में मवेशी मेला बंद करना पड़ा। यह नाकामी महज ही प्रशासनिक की ही कहीं जा सकती है जो की उड़दंगियो व असामाजिक तत्वों पर अपना नियंत्रण करने में नाकाम रही। जिसके बाद 17 जुलाई 2004 में तत्कालीन भाजपा विधायक कलसिंह भाभर एवं खवासा सरपंच नागजी भाई सिंगाड व उपसरपंच शैतान लोहार के प्रयासों के साथ खवासा को शनिवार को मवेशी हाट की सौगात मिली।

     वहीं जिले में प्रत्येक भगोरिया हाट अपनी परंपरा व संस्कृति की पहचान है। लेकिन खवासा के इस मवेशी हाट को प्रशासनिक भगोरिया हाट की सूची में अब तक रिकॉर्ड में नहीं लिया गया। परंतु प्रशासनिक सारी व्यवस्थाएं होली के दौरान खवासा में आने वाले शनिवार भगोरिया हाट में रहती है।

   ये भी सही है कि, इन भगोरिया हाटो में भी शराब का नशा कर कुछेक हुड़दंगी व असामाजिक तत्व अपनी करतूत बताने में चूक नहीं करते हैं। प्रशासन अपनी सजगता दिखाने का प्रयास करती है परंतु हुड़दंग मचाने का मूल जड़ शराब के अवैध अड्डे है, जिसे बंद करने में पूरी तरह से नाकाम पुलिस एवं प्रशासन रहती है। वही अब पुलिस प्रशासन की कार्रवाई ऐसी देखने मिल रही है कि, जैसे ही राजनीतिक गैर खत्म होती है उसी के बाद पुलिस भीड़ को खदेड़ना शुरू कर देती है। जिसमें चाहे बच्चे हो, बूढ़े हो, महिलाएं हो सभी को हुडदंगियों की नजरों से देख पुलिस के लठ एवं धोस के साथ खदेड़ती है।

     इतना ही नहीं अब तो पुलिस अपनी सजगता का परिचय भीड़ को खदेड़ने के साथ दिन में ही भगोरिया-गुलालिया हाट में लगने वाली रंग-गुलाल की दुकाने बंद करवाने लगे हैं। अगर कोई पुलिस को कह दे कि, साहब हम गुलालिया हाट पर गुलाल नहीं बेचेंगे तो कब  बेचेंगे..? हम दुकान नहीं बंद करेंगे। तो पुलिस को यह जवाब पूरी तरह से नागवार लगता है और पुलिस अपने डंडों से चाहे पुरुष हो या महिलाए को धोस बताती है तथा डंडों से रंग- गुलाल की दुकान को तीतर-बितर कर सामान सड़क पर फेंकने लगी है। पुलिस की इस घिनौनी हरकतों को देख अब लोग कहने लगे है कि, पुलिस की यह कैसी सजगता...है...? जिसमें आम लोगों व व्यापारियों को भी परेशान किया जाता है व अपनी धौंस का परिचय पुलिस दे रही है। वहीं शराब माफिया व अवैध विक्रेता खुलेआम इन हाट बाजारों में बड़ी मात्रा में शराब की बिक्री करते हैं उन पर कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। तय है पुलिस की इस तरह की बर्बरता आने वाले समय में जैसे जिले में लगने वाले मेले अपनी पहचान खो रहे है और खो बैठे हैं। वैसे ही होली पर लगने वाले यह भगोरिया हाट भी अपनी पहचान व संस्कृति खो बैठेंगे।

  पुलिस की सजगता के नाम पर बर्बरता देखने को मिली

    शनिवार भगोरिया हाट में खवासा में सुबह से ही पुलिस अपने वाहन के सायरन बजा- बजाकर घूमती रही। वहीं थांदला टीआई अशोक कनेश, एसडीओपी, नायाब तहसीलदार एवं थांदला एसडीएम भी खवासा पहुंचे और ग्राम के मुख्य मार्ग पर पैदल मार्च भी किया। पुलिस एवं प्रशासन की उक्त माकूल व्यवस्था से हर कोई संतुष्ट भी था। ग्राम पंचायत ने भी भगोरिया पर्व पर अपनी पुरी व्यवस्थाए की। करीब 1 बजे तक सामान्य दिन की तरह ही बाजार का माहौल रहा। 1 बजे के बाद लोगों का आना शुरू हुआ और 3 बजे तक पूरा बाजार भर गया और दुकानो पर ग्राहकी भी चलने लगी।

   जयस व मुख्य राजनीतिक पार्टी भाजपा एवं कांग्रेस की गैर ढोल-मादल के साथ परम्परागत निकली। जिसमें अपनी-अपनी गैरों में खवासा-थांदला के क्षेत्रीय नेता उपस्थित रहे। उक्त गैर का सिलसिला क्रमश जयस, कांग्रेस, भाजपा की गैर आधे-आधे घंटे के दरमियान तीन से साढ़े चार बजे तक निकल गई। इस बार तीनों गैर सामानतर भीड़ के साथ निकली। लेकिन पिछले वर्षों में जयस की गैर में भीड़ अधिक रही थी। जैसे ही साढ़े चार बजे आखिरी गैर निकल कर बस स्टैंड पर पहुंची वैसे ही पुलिस प्रशासन ने भगोरिया उर्फ गुलालिया हाट बाजार की समाप्ति की घोषणा करते हुए हाट में आई हुई भीड़ को खदेड़ने का सिलसिला चालू कर दिया। हाट बाजार में आए गुब्बारे एवं अन्य व्यापारियों को हाट बाजार से जाने का अलॉउसमेंट अपने पुलिसीया वाहन से करते रहे। वही बस स्टैंड से टीआई अशोक कनेश अपनी पुलिसिया टीम के साथ बाजना मार्ग रोग्यादेवी मंदिर की ओर निकले। जिसमें साढ़े चार बजे से ही जिस समय रंग-गुलाल की दुकानों पर रंग-गुलाल बिक रहा था उसी दौरान उन दुकानों को बंद करने का आदेश हाथ में लट्ठ लेकर टीआई के साथ उनके सिपलाहार भी देते नजर आए।

   वही बजरंगबली मंदिर के पास एक मालवीय की दुकान पर उनकी मां व पत्नी अपने ही निजी मकान के ओटले पर रंग-गुलाल की दुकान लगाकर बैठे थे उन्हें दुकान बंद करने का फरमान पुलिस ने दिया। जब सास-बहू दोनों महिलाओं ने कहा हम तो गरीब है रंग-गुलाल की दुकान अभी बंद कर देंगे तो फिर इसे बेचेंगे कब...? यह बात टीआई साहब व उनके सिपलाहारो को बर्दाश्त नहीं हुई और कहने लगे कि, पुलिस से बदतमीजी से बात क्यों कर रही हो, कह कर अपने हाथ में जो लट्ठ थे उसे सामने करके धौंस बतलाते रहे और जमे हुए रंग-गुलाल को अस्त-व्यस्त कर सामान सड़क तक फेंक दिया गया।

    इसी तरह पुलिस अपने लट्ठ-डंडों के साथ रोग्यादेवी मंदिर की ओर जाते रहे और भीड़ को तीतर-बीतर कर दुकानों को बंद करने का कहते रहे। इसी कड़ी में टीआई व उनके सिपलाहार गणेश मंदिर तिहारे पर पहुंचे और निजी एवं स्थाई दुकान पर लगी रंग-गुलाल की दुकान को बंद करने का फरमान दिया। लेकिन यहां पर टीआई साहब व उनके सिपलाहार को मुंह की खानी पड़ी। यहां के व्यापारी ने कहा दुकान बंद नहीं होगी, तो टीआई अशोक कनेश साहब कहने लगे लड़कियों पर लोग गुलाल फेंक रहे हैं इसलिए रंग-गुलाल की दुकान बंद कर दो। तो व्यापारी ने कहा, कुछ उड़दंगी, हुड़दंग जरूर मचा रहे होंगे और यह हुड़दंग का कारण मुख्य रूप से शराब का नशा है, तो टीआई साहब आप खवासा में चल रहे शराब दुकान के अवैध अड्डे बंद करवाये, जहां से बड़ी संख्या में लोग शराब पीकर आ रहे हैं और बाजार का माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। 

        शराब दुकानों को बंद करवाने की बात पर समझदार अशोक कनेश साहब कहने लगे, हमें किसी अन्य से कोई लेना-देना नहीं है, आप दिखने में तो समझदार लग रहे हैं। साहब ने व्यापारी का नाम पूछा और भीगी-बिल्ली की तरह साहब को बबड़ते हुए अपने सिपालाहार के साथ जाते हुए देखे गए। लेकिन रंग-गुलाल की दुकाने बंद करवाने वाले टीआई कनेस साहब को विवाद की मूल जड़ अवैध शराब के अड्डे पर शराब खुलेआम बिकवाते रहे और कहते हैं हमें शराब अड्डों से कोई लेना-देना नहीं। वाह, टीआई साहब गुलालिया हाट में रंग-गुलाल की दुकाने आपके द्वारा बंद करवाना और कोई व्यापारी बंद ना करे तो वह बेवकूफ। पर साहब आप तो पढ़े-लिखे समझदार है तो आपकी यह कैसी समझदारी जो गुलालिया हाट में रंग-गुलाल की दुकाने बंद करवा रहे हैं पर शराब-अड्डों पर बिठवाकर शराब पिलवा व बिकवा रहे है...?

  जयस की गैर 

कांग्रेस की गैर

भाजपा की गैर



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