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विडंबनाः झाबुआ जिले की भूमि पर बन रहा डेम, झाबुआ जिले की भूमि से ही काली मिट्टी ले जाकर किया जा रहा कार्य
Report By: सुनील सोलंकी 14, May 2026 5 months ago

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 लेकिन जल संसाधन विभाग झाबुआ जिले को नहीं देगा पानी, धार और रतलाम जिले के 808 गांव को मिलेगा पानी 

कुकड़ीपाड़ा के आस-पास के तालाबों से मिट्टी निकालने के बाद सेमलिया तालाब से मिट्टी निकालने पहुंचे पोकलेन मशीन व डंपर 

माही की गूंज, खवासा।

    जब भी कोई जिले या क्षेत्र में विकास कार्य होता है तो हर किसी को खुशी होती है और इस खुशी का मुख्य कारण यह रहता है कि, कोई भी विकास कार्य को किया जाता है तो उस विकास कार्य का लाभ क्षेत्र व जिले की जनता को ही मिलता है। ऐसे में किसी भी क्षेत्र में कोई विकास कार्य होता है तो हर व्यक्ति वह कार्य को अच्छे से हो यह सोचता है और उससे मिलने वाले लाभ के सपने संजोयते हैं। लेकिन झाबुआ जिले के खवासा क्षेत्र की सीमा से अनवरत बह रही माही नदी में जल संसाधन विभाग द्वारा तलावड़ा बांध निर्माण के नाम से ग्राम कुकड़ीपाड़ा में  3 सौ करोड़ के करीब का बांध तो बनाया जा रहा है। लेकिन उक्त बांध में एकत्रित 67.02  एमसीएम पानी जो एकत्रित होगा वह रतलाम व धार जिले की 8 सौ  से अधिक ग्रामों में पानी सप्लाई होगा।  उक्त पानी सप्लाई हेतु रावटी के समीप 2 हजार करोड़ से अधिक की राशि से फिल्टर एवं सप्लाई प्लांट भी बनाया जा रहा है। लेकिन उक्त माही डेम का करोड़ों लीटर पानी में से झाबुआ जिला तो ठीक खवासा क्षेत्र को भी पेयजल हेतु पानी देने की कोई योजना जल संसाधन विभाग व सरकार ने नहीं बनाई। यानी इस क्षेत्र को इस डेम का पानी नही मिलेगा।   

      नतीजन  यह  कि, जहां क्षेत्र में करोड़ों की लागत से जल संसाधन विभाग द्वारा विकास कार्य के रूप में एक वृहत बांध बनाया जा रहा है। लेकिन जिसकी खुशी के बजाय लोगों में अफसोस ही देखा जा रहा है। वही डेम निर्माण खवासा क्षेत्र में होने के साथ ही  डेम निर्माण हेतु काली मिट्टी-मोरम का खनन भी झाबुआ जिले के खवासा क्षेत्र के तालाबों से ही पोकलेन  (स्केवेटर) मशीनों से डंपरों के माध्यम से हजारों डंपर का खनन मिट्टी व मोरम का अवैध रूप से किया गया व अब भी खनन किया जा रहा है। 

     कुकड़ीपाडा-तलावड़ा के आस-पास सिंचाई (विभाग) के तालाबों से कई दिनों तक काली मिट्टी व मोरम बिना रॉयल्टी भरे व बिना परमिशन के हजारों डंपर खनन कर डेम में ले जाया गया। वहीं जब कुकड़ीपाड़ा  व  तलावड़ा के आस-पास के सिंचाई विभागों के तालाब में खनन कर मिट्टी व मोरम खत्म हो गया तो सेमलिया तालाब से मिट्टी-मोरम के खनन हेतु रविवार को पोकलेन (स्केवेटर) मशीन दो डंपरों के साथ पहुंची।

 यहां से जब रविवार को मोरम-मिट्टी का खनन किया जा रहा था तो स्थानीय लोगों ने आपत्ति लेते हुए माही की गूंज के हमारे स्थानिय प्रतिनिधि को इसकी सूचना दी। जिस पर माही की गूंज का हमारा प्रतिनिधि मौके पर पहुंचा तो पोकलेन मशीन से तालाब में से मोरम-मिट्टी खनन कर डंपरों में भरा जा रहा था। जिसके फोटो लेने के बाद वहां पदस्थ एक कर्मचारी से जानकारी ली तो बताया, खनन करने की परमिशन हमारे पास नहीं है। हमें जल संसाधन विभाग के बांध निर्माण कार्य कोटा की एजेंसी गुडविल कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर एचपी यादव ने हमें यहां से मिट्टी व मोरम खनन करने का कहा, जिस पर यहां से हम खनन कर रहे हैं।

      कर्मचारी से चर्चा होने के बाद गुडविल कम्पनी के प्रोजेक्ट मैनेजर एचपी यादव से चर्चा की तो गुमराह करते हुए बताया कि, हमने सिंचाई विभाग के कार्यपालन यंत्री विपिन पाटीदार से परमिशन लेकर मिट्टी-मोरम का खनन किया जा रहा है।  प्रोजेक्ट (मैनेजर) ने यहां तक गुमराह किया कि, जो कुकड़ीपाड़ा में बांध  बन रहा है वह सिंचाई विभाग का है? और जो मोरम-मिट्टी खवासा क्षेत्र के तालाब से खनन किया जा रहा है वह भी सिंचाई विभाग का है...? कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर जी जल संसाधन विभाग के तालाब को सिंचाई विभाग का तालाब बताने में नहीं चुके।

     वहीं जब इस मामले में सिंचाई विभाग के कार्य पालन यंत्री विपिन पाटीदार से प्रतिनिधि ने बात करनी चाही तो शायद साहब के पास प्रोजेक्ट मैनेजर से हुई चर्चा, प्रतिनिधि के फोन करने के पहले पहुंच गई। नतीजन शायद ट्रु कॉलर पर प्रतिनिधि का नाम या माही की गूंज देखकर बात करने से बचने के लिए फोन अटेन नहीं किया।  लेकिन माही की गूंज का असर यह हुआ कि, गुडविल कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर ने दूसरे दिन सोमवार को ही सेमलिया तालाब से खनन करना बंद कर अपनी मशीन व डंपर वापस बुला लिये।

     क्षेत्र वासियों का कहना है कि, जल संसाधन विभाग झाबुआ जिले की भूमि पर बांध बना रहा है। वहीं उक्त बांध निर्माण हेतु झाबुआ जिले के खवासा  क्षेत्र के तालाबो से अनगिनत  मैट्रिक टन अब तक मिट्टी व मोरम का खनन बिना रॉयल्टी व बिना परमिशन के कर चुके है। जिसे कोई देखने वाला नहीं है। वहीं लोगों का कहना है कि, सब कुछ झाबुआ जिले का परंतु सरकार व जल संसाधन विभाग द्वारा झाबुआ जिले व खवासा क्षेत्र के लोगों के साथ धोखाकर इस डेम का पानी पीने हेतु खवासा क्षेत्र तक को नहीं दिया जाएगा। जिसका आक्रोश क्षेत्रवासी जता रहे हैं। एवं अपील कर रहे हैं कि, सरकार झाबुआ जिले को नहीं तो कम से कम खवासा-थांदला एवं पेटलावद क्षेत्र को इस डेम से पेयजल हेतु पानी देने की योजना बनाएं और एक फिल्टर एवं सप्लाई प्लांट खवासा क्षेत्र में बनाया जाए।


सेमलिया सिचाई तालाब से मिट्टी-मोरम निकालने की परमिशन की जानकारी माही की गूंज द्वारा जानने का प्रयास किया जिसके बाद ही खनन हुआ बंद।


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