माही की गूंज, झाबुआ डेस्क।
2014 के बाद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हर अपील को देशवासियों ने तन मन के साथ पूरा किया। चाहे वह सक्षम लोगों से की गई गैस सब्सिडी छोड़ने की हो, नोटबंदी पर 50 दिनों के संयम की हो, जनता कफ्र्यू में ताली और थाली बजाने की हो या कोरोना लॉकडाउन के दौरान दीपक जलाने की हो। हर अपील पर देशवासियों ने बिना कोई प्रश्न चिन्ह लगाए प्रधानमंत्री के कहे अनुसार कार्य किया। लेकिन पिछले दिनों प्रधानमंत्री द्वारा इराक, इजराइल और अमेरिका युद्ध के मद्देनजर की गई आम जनता से सात प्रकार की संयम की अपील को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रिया विभिन्न सोशल प्लेटफॉर्म पर आम जनता के सामने आ रही है। कोई इसे पर उपदेश कुशल बहुतेरे बतला रहा है। तो कोई इसे सरकार की नाकामियों को आम जनता पर डालना बतला रहा है। यह सही है कि, युद्ध का असर पूरे विश्व पर पड़ना तय है ऐसे में कई लोग प्रधानमंत्री की इस अपील को देश के हित में बतला रहे हैं। लेकिन कई लोग सरकार पर सीधा सवाल उठा रहे हैं, उनका कहना है कि बचत की शुरुआत ऊपर से नीचे होना चाहिए ना कि नीचे से ऊपर। तात्पर्य यह है कि, केंद्र सरकार और राज्य सरकारें पहले आदर्श प्रस्तुत करें, उसके बाद आम जनता से अपील करें। वहीं कई लोगों का कहना है कि, युद्ध 70 से ज्यादा दिनों से चल रहा है ऐसे में यह अपील बहुत पहले ही की जानी चाहिए थी। लेकिन प्रधानमंत्री को पांच राज्यों के चुनाव की चिंता थी और चुनाव निपटने के बाद यह अपील प्रधानमंत्री द्वारा की गई है। इससे यह साबित होता है कि, प्रधानमंत्री जी को देश हित से ज्यादा चुनाव की चिंता थी।

क्या है प्रधानमंत्री की अपिल
वैश्विक संकट के बिच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की आम जनता से 7 महत्वपूर्ण अपील की है जिसमें कहा गया है कि,
1.जहां तक संभव हो वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता दें।
2.एक वर्ष के लिए विदेश यात्रा से बचे।
3.विदेशी उत्पादों का आयात व उपयोग कम करें, स्वदेशी अपनाएं।
4.रासायनिक उर्वरको पर निर्भरता कम करें और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़े।
5.खाने के तेल के उपयोग में कटौती करें।
6.पेट्रोल और डीजल की खपत कम करें मेट्रो, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करंे।
7.एक वर्ष के लिए सोना खरीदने से बचें।
इन सात अपील के बाद देश भर में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है कई लोगों का कहना है कि, प्रधानमंत्री की अपील के बावजूद भाजपा शासित राज्यों में ही निगम मंडल के अध्यक्ष पदभार ग्रहण समारोह में ही सैकड़ो गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंच रहे हैं। यही नहीं प्रधानमंत्री स्वयं रोड शो कर रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री की अपील को पर उपदेश कुशल बहुतेरे कहावत को चरितार्थ कर रहा है। वहीं कई लोगों का कहना है वास्तव में आर्थिक संकट इतना गहराता जा रहा है तो इसकी शुरुआत सत्ता में बैठे शीर्ष राजनीतिज्ञयो द्वारा की जानी चाहिए। ताकि शीर्ष में बैठे लोग समाज में आदर्श प्रस्तुत करें और आम जनता उनका अनुसरण करें। वही सराफा से जुड़े लोगों का कहना है कि, प्रधानमंत्री की यह अपील उनका व्यापार चैपट कर सकती है, अगर ज्वेलर्स सोना नहीं बेचेंगे तो क्या झालमुडी बेचेंगे...?
बहरहाल प्रधानमंत्री की अपील वास्तव में एक बड़े संकट की ओर इशारा कर रही है और इस संकट का समाधान शिवाय संयम के और कोई दूसरा नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री का देश हित में की गई इस अपील का ,कई बुद्धिजीवी वर्ग समर्थन कर रहे हैं और देश के हित में इन नियमों का पालन करने की अपील आम जनता से कर रहे हैं। वही सत्ता शीर्ष पर बैठे व्यक्तियों से भी उम्मीद कर रहे हैं कि, प्रधानमंत्री जी की सलाह पर विशेष ध्यान देकर एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करें।
