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जन्मदिवस पर वर्षितप आराधकों को करवाये पारणें
16, May 2026 5 months ago

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तप अनुमोदना कर मनाया निखिल ने अपना जन्मदिन 

माही की गूंज, थांदला। 

         जिन शासन में तप को महान निर्जरा का कारण माना गया है वही तप अनुमोदना को भी महान निर्जरा का हेतु माना गया है। जिन शासन में आराधक ज्ञान-दर्शन-चारित्र-तप से आत्म लक्ष्य मोक्ष के शाश्वत सुखों को प्राप्त कर लेते है वही आगम में आराधकों के साथ साधर्मिक की सेवा का महान फल बताया गया है तभी व्यक्ति अपने व परिवार में आने वालें यादगार क्षणों को तप-जप से मनाने व उनकी अनुमोदना में अग्रसर होता रहता है। थांदला के भंसाली परिवार के कुल दीपक निखिल भंसाली ने अपना जन्मदिन सादगी के साथ मनाते हुए नगर में चल रहे ऐतिहासिक 92 वर्षितप आराधकों के पारणें का लाभ लेते हुए मनाया। इस दौरान उनके पूरे परिवार ने मिलकर स्थानीय महावीर भवन पर सभी तपस्वियों को आपने हाथों से पारणा करवाते हुए प्रभावना भी वितरित की। उल्लेखनीय है कि भंसाली परिवार में जहाँ एक वर्ष पूर्व ललितमुनिजी ने संयम मार्ग पर कदम बढ़ाते हुए नवकार महामंत्र के पंचम पद पर प्रतिष्ठित हुए वही भरत भंसाली लगातार 25 वर्षों से वर्षितप कर रहे है वही उनके साथ में चंदा अनिल भंसाली, संध्या ललित भंसाली, प्रांजल भंसाली, ऊषा भरत भंसाली, अंकित भंसाली आदि भी वर्षितप कर रहे है वही वीर माता तारादेवी भंसाली भी लगातार एकासन तप की आराधना कर रही है। 

चतुर्विध संघ में जिनवाणी का लाभ ले रहे श्रोता

          स्थानीय पौषध भवन पर जैनाचार्य 1008 पूज्य श्री रामलालजी म.सा. के शिष्य व उनके आज्ञानुवर्ती जिनशासन दीपक जयप्रभजी म.सा. ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए एक रूपक के माध्यम से कहा कि जिनवाणी सुनने के लिए निर्मल मन की तरह योग्य पात्र व परम धैर्य की आवश्यकता होती है। पूज्य श्री ने उत्तराध्ययन में वर्णित बहुश्रुत के अयोग्य पात्र का जिक्र करते हुए कहा कि अहंकार, क्रोध, प्रमाद, रोग व आलस्य जिनवाणी सुनने के अयोग्य पात्र है उन्हें दी गई शिक्षा निष्फल जाती है जबकि योग्य पात्र संत क्रिया से भी शिक्षा ग्रहण कर लेता है। आपने कहा यदि आप स्व प्रसंशा सूनने को लालायित रहते हो तो समझना अहंकार भीतर तक प्रवेश कर गया है यही अहंकार विशिष्ट व कठोर साधना करने वालें बाहुबलीजी को केवलज्ञान में बाधक बना था जबकि उनका अहंकार तो अपने छोटे भाई जो पहले दीक्षित हो गए है उन्हें वंदन करने मात्र का था। आपने कहा जैसे छोटी सी चाबी से बड़ा ताला खुल जाता है व बड़े ताले के खुलने से स्थानक भवन भी खुल जाता है वैसे ही मन के द्वार खुलने पर छोटे-छोटे नियम प्रत्याख्यान ग्रहण करने से महान फल की प्राप्ति हो जाती है। धर्मसभा में पूज्य राजरतनजी म.सा. ने सम्बोधित करते हुए कहा किआज मुश्किल से मिलें मानव भव को व्यक्ति अनार्य क्षेत्र में जाकर धन कमाने में नष्ट कर रहा  है जबकि उसे समझना चाहिए धन सुविधा दे सकता है परंतु सुरक्षा नही दे सकता वही पुण्य सुविधा व सुरक्षा तो दे सकता है परंतु सद्गति नही दे सकता जबकि धर्म एक ऐसी साधना है जो सुविधा सुरक्षा के साथ सद्गति भी देती है, इसलिए मानव जीवन को धर्म आराधना में लगाना चाहिए यहाँ की गई छोटी सी आराधना भी व्यक्ति को तारने वाली बन जाती है। धर्मसभा में पूज्या श्री रौनकश्रीजी म.सा. ने एक कहानी के माध्यम से कहा कि जैसे एक बुद्धिशाली व्यक्ति थोड़े समय के सुख के पीछे छुपे महान दुःखों को देख कर उसे दूर करने को तैयार रहता है वैसे ही महान साधक वही है जो आपने जीवन को धर्ममय बनाते हुए इस भव के साथ परभव को भी सुरक्षित कर लेता है।थांदला में उग्र विहार करते हुए संत त्रय का पदार्पण होते ही चतुर्विध संघ में धर्म की गंगा प्रवाहित हो रही है आपके सानिध्य में पक्खी पर्व की आराधना करते हुए आराधक पौषध, संवर, उपवास की आराधना करेंगें वही पाक्षिक महामंत्र नवकार के जाप भी होंगें। थांदला में संतों ने पदार्पण के साथ ही कहा कि आज उन्हें जिन शासन के दो क्रियावान महान आचार्य  पूज्य श्री जवाहरलालजी म.सा. व पूज्य श्री उमेशमुनिजी म.सा. की जन्मभूमि पर उनके साधकों के बीच धर्म प्रभावना करने पर गौरव की अनुभूति हो रही है। आपने यहाँ विराजित सरलमना पूज्या श्री निखिलशीलाजी, पूज्याश्री माताजी म.सा. दिव्यशीलाजी, प्रियशीलाजी एवं दीप्तीजी म.सा. की कुशलता पूछते हुए उन्हें भी धर्मलाभ दिया यह संघ के दो सम्प्रदायों के प्रति समन्वय के भाव प्रदर्शित करता है। संघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने बताया कि श्रावकों के प्रतिक्रमण, धर्मचर्चा आदि की व्यवस्था संतगण के सानिध्य में स्थानीय त्यागी भवन पर जबकि श्राविकाओं के प्रतिक्रमण आदि आराधना की व्यवस्था स्थानीय पौषध भवन व दौलत भवन पर रखी गई है। सभा का संचालन सचिव हितेश शाहजी ने किया वही आभार प्रवक्ता पवन नाहर ने माना।


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