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डॉ. शिव दयाल सिंह की जगह जिले के नए पुलिस कप्तान होंगे देवेंद्र पाटीदार
Report By: मुजम्मिल मंसुरी 07, May 2026 2 months ago

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क्या जिले की कानूनी और अपराधिक परिस्थितियां बनेगी पाटीदार के लिए चुनौती...?

माही की गूंज, झाबुआ।

         झाबुआ जिले को 53 वें पुलिस अधीक्षक के रूप में एक नया चेहरा देवेन्द्र पाटीदार का मिला है। पुलिस विभाग में शनिवार देर रात हुए प्रशासनिक फेरबदल के बाद झाबुआ एसपी डॉ. शिवदयाल सिंह को पुलिस मुख्यालय भोपाल भेजा गया है। नए पुलिस अधीक्षक के रूप में 2016 बैच के आइपीएस अधिकारी देवेंद्र पाटीदार ने नए पुलिस अधीक्षक के रूप में जिले की कमान संभाली है। इससे पहले पाटीदार बुरहानपुर में पदस्थ थे। पाटीदार का फोकस ज्यादातर सामाजिक पुलिसिंग पर रहा है। वे धार जिले में पहले एसएसपी के पद पर लंबे समय तक रहे है। इसी को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे है कि, नवागत एसपी पाटीदार आदिवासी जिले में कार्य अनुभव के साथ जिले में आए है तो पुलिस महकमे और जिले की कानून व्यवस्था के लिए कुछ अच्छा ही हेागा। बावजूद इसके जिले की भौगोलिक स्थिति, आदिवासी समाज की परिस्थतियां, जिले में आपराधिक गतिविधियां और कानून व्यवस्था पाटीदार के लिए चुनौती भरी हो सकती है?
पूर्व पुलिस अधीक्षक डॉ. शिव दयाल सिंह जिले में लगभग 7 माह तक अपनी सेवाएं देते रहे। इनके कार्यकाल में विभागीय अनुशासन पर ज्यादा जोर दिया गया। इनके नेतृत्व में पुलिस विभाग ने कई संवेदनशील मामलों का खुलासा किया। 7 माह के इस कार्यकाल में सोशल पुलिसिंग पर इतना जोर देखने को नहीं मिला। इनके पहले जिले में एसपी रहे पद्मविलोचन शुक्ल को जरूर सामाजिक पुलिसिंग करते देखा गया। मगर उनके कार्यकाल में कुछ खास विभागीय उपलब्धियां देखने को नहीं मिली। कारण यह था कि, उन्होने पुलिस विभाग को सामाजिक विभाग ही बना डाला था। सोशल पुलिसिंग के नाम पर वे हमेशा कैमरों से घिरे रहते थे और यही कोशिश रहती थी कि, वे अखबारों में किसी न किसी तरह छाए रहे। पूर्व पुलिस अधीक्षक शुक्ल का हर कदम कुछ नया करके मीडिया में छाए रहने के लिए ही उठता दिखाई देता था।
            जिले में अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है। कुछ अखबारों में छप कर चले जाते है तो कुछ जिलेवासियों के मन मस्तिष्क पर छाप छोड़ जाते है, जिन्हे लोग वर्षों याद रखते है। अब जिले को नए पुलिस कप्तान के रूप में देवेंद्र पाटीदार मिले है। उन्होने अखबारों को दिए अपने पहले वक्तव्य में यह साफ कर दिया है कि, जनता का विश्वास जीतकर ही अपराध पर प्रभावी चोट की जा सकती है। यानि सीधे तौर पर उनका फोकस भी सोशल, सामाजिक पुलिसिंग पर रहेगा। हम उम्मीद करते है कि, वे सोशल पुलिसिंग करेंगे मगर पूर्व पुलिस अधीक्षक पद्मविलोचन शुक्ल जैसी नहीं। जिले में पुलिस अधीक्षक का काम जिले की कानून व्यवस्था को बनाए रखना, अपराधों और अपराधियों पर शिकंजा कसना होता है, ना कि सुर्खियां बटोरना, अखबारों में छपना और हमेशा कैमरे के सामने रहना। इन सब चीजों से रिवार्ड, अवार्ड, तमगे और वाहवाही पाई जा सकती है, लेकिन लोगों के दिलों में जगह नहीं बनाई जा सकती। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सामाजिक पुलिसिंग के साथ सख्ती भी जरूरी है, अपराधियों में पुलिस का खौफ होना भी जरूरी है और आमजन में पुलिस पर विश्वास बने। इसके बाद ही सोशल पुलिसिंग का नंबर आता है। हम उम्मीद करते है कि, जिले में पधारे नए पुलिस अधीक्षक परिस्थतियों को देखते हुए ही काम करेंगे।



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