दो पांच रुपए ज्यादा वसूलने वाले व्यापारियों पर कार्यवाही करने वाला खाद्य विभाग नदारत
माही की गूंज, पेटलावद।
नए सिरे से हुए प्रदेश के शराब ठेकों में कई जिलों में शराब ठेके सरकार की मंशा के विपरीत कम कीमत पर चले गए। अलग-अलग दुकानों की नीलामी की गई। जिसमें कंपोजिट दुकानों का सरकार का नियम सरकार को भारी पड़ा ओर शराब ठेकेदारो ने अंग्रेजी दुकान के मुकाबले कम कीमत में मिल रही देशी कंपोजिट दुकानों की बोली लगा कर ले ली, और करोड़ो की लागत की अंग्रेजी दुकानों को कोई खरीदार नहीं मिला। नतीजा सरकार को अंग्रेजी शराब की दुकानों की कीमत तीस से चालीस प्रतिशत कीमत पर देना पड़ी। नए सत्र के शुरू होते ही शराब ठेकेदार अपनी मनमानी पर उतर आया है और सरकारी नियमों के विपरीत काम करना शुरू कर दिए।
प्रिंट रेट से अधिक राशि वसूली जा रही है
कुछ दिनों पूर्व झाबुआ जिले की लाइसेंसी शराब दुकानों पर प्रिंट रेट से अधिक राशि वसूली का मामला सामने आया था। लेकिन जिम्मेदार आबकारी विभाग ओर खाद्य विभाग ने इसकी सूद नहीं ली। जिससे शराब ठेकेदार द्वारा अलग-अलग स्थानों पर प्रिंट रेट से ज्यादा पर शराब धड़ल्ले से बेची जा रही है।
ताजा मामला ग्राम करवड़ की देशी कंपोजिट दुकान का है जहां टीन बियर लेने पहुंचे एक युवक से सेल्समैन ने 150 रुपए की मांग की। लेकिन शराब की टीन पर अधिकतम बिक्री मुख्य 115 लिखा हुआ था, जिसे देखने के बाद युवक ने अधिक पैसे वसूलने का विरोध दर्ज करवाया। लेकिन ठेकेदार के कर्मचारी ने ग्राहक की एक नहीं सुनी और 115 प्रिंट वाली शराब के 150 रुपए ही वसूले। इतना ही नहीं बेखौफ वसूली करने वाले ठेकेदार के कर्मचारी ने ऑनलाइन भुगतान तक करवा लिया।
सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत
अधिक राशि वसूले जाने के बाद युवक ने मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज करवाई। जहां से युवक की शिकायत दर्ज कर उसे शिकायत क्रमांक 37975263 दिया गया, शिकायत दर्ज होने के बाद मामला आबकारी के पास पहुंचा। जिसे इस अवैध वसूली पर कार्रवाई करना था लेकिन कार्रवाई की बजाए मामला ठेकेदार के लोगों के पास पहुंचता है। जो शिकायतकर्ता को फोन कर शराब की दुकान पर बुला कर मामला निपटाने की बात कहता है। हालांकि शिकायतकर्ता ने शिकायत वापस लेने के साफ मना कर दिया।
क्या खाद्य विभाग की जद में नहीं हैं शराब दुकान...?
वैसे तो खुले बाजार में किसी भी प्रकार का खराब सामान, एक्सपायर सामान या मूल्य से अधिक सामान की बिक्री पर लगातार खाद्य विभाग कार्रवाई करता देखा जाता रहा है। कोल्ड्रिंग को ठंडा कर देने के नाम पर दो-पांच रुपए अधिक वसूलने पर भी दुकानदार का प्रकरण बना दिया जाता है। यहां चैंकाने वाली बात यह सामने आई की शराब दुकान पर अगर एक्सपायर शराब ,मिलावट या अधिक मूल्य वसूली का मामला आता है तो उसे खाद्य विभाग ओर नापतोल विभाग इसकी जांच नहीं करेगी और जांच का जिम्मा आबकारी विभाग को ही दिया जाता है जो पहले से शराब ठेकेदार का अघोषित पार्टनर के रूप में कार्य करता है।
विकासखंड की सभी दुकानों का यही हाल
जिले के साथ-साथ विकास खंड की अधिकाश शराब दुकानों पर प्रिंट रेट से अधिक राशि वसूली जा रही है। एक्सपायर शराब के साथ मिलावटी शराब के मामले पूर्व में उजागर हो चुके है, लेकिन किसी भी मामले में जिम्मेदार आबकारी विभाग की ओर से कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई। शराब दुकान पर भाव-ताव को लेकर सवाल-जवाब करने वालो को डरा-धमका कर रवाना कर दिया जाता है। ठेकदार का पुलिस ओर आबकारी में इतना रसूक होता है कि, कोई शिकायत हो भी जाए तो कार्रवाई नहीं होती। जैसे करवड़ में हुई शिकायत पर कार्रवाई की बजाए ठेकेदार के लोग शिकायतकर्ता से शिकायत बंद करने की बात कर रहे है।
नए कलेक्टर साहब से उम्मीद
जिले को नए कलेक्टर मिले हैं और अवैध शराब व्यवसाय पर रोक लगाने को लेकर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन जिस तरह से राजस्थान ओर गुजरात की सीमाओं से सटे होने के कारण जिले में अवैध ओर नकली शराब का व्यापार बढ़े स्तर पर हो रहा है। पुलिस ओर आबकारी की भूमिका अवैध शराब के व्यापार को लेकर शुरू से संदिग्ध रही हैं। ऐसे में नए जिला कलेक्टर से उम्मीद है कि, वो अपने स्तर पर इस अवैध व्यापार पर नकेल कस कर जिले की छवि सुधारने का कार्य करेंगे।

प्रिंट रेट से अधिक वसूली प्रमाण सहित, अधिक राशि का ऑन लाइन भुगतान।

सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत।

115 रूपए प्रिंट होने के बाद वसूले जा रहे 150 रुपए।
