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माही की गूंजः खबर का असर
22, May 2026 2 months ago

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शासन तत्काल स्वीकृति दे...

माही की गूंज, खवासा। 

         जिले के वरिष्ठ आदिवासी नेता स्व. दिलीप सिंह जी भूरिया अपने भाषणों में अक्सर मुहावरे का प्रयोग करते थे कि, ‘‘नाचे कूदे वान्दरी और खीर खाए फकीर‘‘ भावार्थ यह था कि काम कौन करें और श्रेय और फायदा और कोई ले। ठीक उसी तर्ज पर झाबुआ जिले के अंतिम छोर पर खवासा क्षेत्र के कुकड़ीपाड़ा के माही तट पर बन रहे तलावड़ा बैराज की स्थिति थी। यानी यह बन तो रहा है झाबुआ जिले की सीमा में लेकिन इसका लाभ रतलाम और धार जिले के 808 गांव में मिलना था। झाबुआ जिले के सैकड़ो गांव जल संकट से झुझ रहे हैं उनके लिए इस योजना में कोई प्रावधान नहीं था यानी दिया तले अंधेरा। रतलाम और धार जिले के 808 गांवो को पेयजल देने वाला झाबुआ जिला खुद प्यासा ही इस योजना में रह रहा है। जिसको लेकर जिले के प्रमुख समाचार-पत्र माही की गूंज ने लगातार समाचार प्रकाशित किए। जिसके बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिक विभाग के अधिकारियों की नींद खुली और इस योजना को झाबुआ जिले के 90 गांवो के लिए भी पेयजल आपूर्ति का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है। अब गेंद शासन के पाले में है ऐसे में शासन द्वारा स्वीकृति मिलने के पश्चात झाबुआ जिले के 90 गांव को भी पेयजल उपलब्ध हो सकता है। ऐसे में थांदला विधानसभा के खवासा व क्षेत्र को भी पानी मिल सकता है। जहां अमूमन बारहमासी जल संकट रहता है और जल संकट को लेकर नागरिकों ने दलगत राजनीतिक से ऊपर उठकर एक बड़ा आंदोलन भी किया था। जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं खाली बर्तन लेकर सड़कों पर उतरी थी और धरना प्रदर्शन किया था जो कि मात्र आश्वासन पर ही खत्म हो गया था। लेकिन अभी भी समस्या जस की तस बनी हुई है इस योजना के विस्तार की खबर के बाद खवासावासियों के साथ खवासा व बामनिया क्षेत्र को भी उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी है। 


क्या है तलावड़ा बैराज 


264 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे तलावड़ा बैराज करीब 600 मीटर लंबा और 32 मीटर ऊंचा रहेगा। इसकी कुल भराव क्षमता 67.02 एमसीएम (लगभग 67 अरब लीटर) होगी।

 मौजूदा कार्य योजना के तहत इस पानी से रतलाम और धार जिले के 808 गांवो को पेयजल सप्लाई किया जाना है। इन गांव में पर्याप्त पेय जल सप्लाई के बाद भी बैराज में बहुत अधिक पानी शेष बचेगा जिसको लेकर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने झाबुआ जिले के 90 गांवो के लिए बैराज से लगभग 12 एससीएम (12 अरब लीटर ) पानी रिजर्व रखने की मांग की है। और शासन स्तर से मंजुरी मिलने के बाद यह पानी जल निगम को सौंप दिया जाएगा। और अगर मंजूरी मिलती है तो जिले के 90 गांवो को भी इस योजना का लाभ मिलने लगेगा और खवासा जैसे गांवो की वर्षो पुरानी समस्या भी हल हो सकती है।

 जिला व क्षेत्र में भी उक्त बांध से पानी मिले जिसकी कार्य योजना प्रशासन व सरकार को बनाने हेतु माही की गूंज ने प्रमुखता से उठाया था मुद्दा। 



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