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राजनीति में हिम्मत... और हिम्मत की राजनीति...
Report By: संजय भटेवरा 30, May 2026 5 months ago

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माही की गूंज, झाबुआ डेस्क।

             मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आम जनता से जोरदार अभिनंदन करने में ही व्यस्त है और उन्ही के राज्य में पूर्व मंत्री तक कि नहीं सुनी जा रही है। उन्हें भी अपनी वाजिब मांगों को लेकर धरने पर बैठना पड़ रहा है। ऐसे में आम आदमी की इस सरकार में किस प्रकार की सुनवाई हो रही होगी इसकी सहज ही कल्पना की जा सकती है। ऐसे में कई राजनीतिक पंडितों का कहना है कि, प्रदेश में ऐसे कई हिम्मत कोठारी जैसे नेता है जो अपनी ही सरकार की कार्य शैली से खुश नहीं है लेकिन वे ऐसी हिम्मत नहीं दिखा पा रहे हैं जैसी हिम्मत रतलाम जिले के वरिष्ठ भाजपा नेता व पुर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी ने दिखलाई है।

        दरअसल रतलाम जिले में एक वरिष्ठ नेता के कब्जे में अवैध प्लाट था और उस प्लाट पर वास्तविक भू-स्वामी को कब्जा दिलाने के लिए एक समय भाजपा सरकार में नंबर दो की स्थिति में रहे पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी ने कई बार प्रयास किया लेकिन उनकी भी सुनवाई नहीं हुई। अपनी ही सरकार में अधिकारियों की इस कार्य प्रणाली से नाराज होकर वरिष्ठ भाजपा नेता धरने पर बैठ गए जिसके बाद पूरा प्रशासन हिल गया और धरने की गूंज भोपाल तक पहुंच गई। ताबड़तोड़ रतलाम जिला पुलिस अधीक्षक पूर्व गृहमंत्री से मिलने पहुंचे और उन्हें आश्वासन देकर अपने ऑफिस में ले गए और पूरे प्रकरण की वस्तु स्थिति जानकर तुरंत उचित कार्रवाई के निर्देश अपने अधीनस्थों को दिए। जिसके बाद पूरा महकमा हरकत में आ गया और तत्काल कार्यवाही की गई।

        ऐसे में आम जनता के मन में एक ही प्रश्न है कि, प्रशासन इस पूरे प्रकरण में पूर्व गृहमंत्री के धरने के पूर्व ही ये सब कार्रवाई कर सकता था। लेकिन प्रशासन ने पूरे मामले को जानबूझकर उलझाए रखा। ऐसे कई मामले है जो प्रशासन ने उलझा रखे हैं और उन मामलों को सामने लाने के लिए कई हिम्मत कोठारी चाहिए जो अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ इतनी मूखरता से अपनी बात रख सके। लेकिन उसके लिए नेताओं में हिम्मत होना चाहिए जो शायद वर्तमान दौर के नेताओं में नहीं है। पूरे प्रदेश में अंदर ही अंदर कई नेताओं में छटपटाहट तो है लेकिन वह खुलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं। क्योंकि अपनी ही सरकार के खिलाफ बोलने के लिए हिम्मत कोठारी जैसी हिम्मत... की राजनीति चाहिए।

         कई राजनीति पंडितों का मानना है कि, भाजपा सरकार में कई वरिष्ठ नेता अपनी अनदेखी से नाराज बताए जा रहे लेकिन सत्ता और संगठन के प्रभाव के आगे वे अपनी बातों को सार्वजनिक रूप से बता नहीं पा रहे हैं। हाल ही में आलीराजपुर जिले की प्रभारी मंत्री ने सार्वजनिक रूप से स्थानीय विधायक और प्रदेश सरकार के मंत्री पर भी शराब माफियाओ के संरक्षण का आरोप लगाया था। लेकिन सत्ता और संगठन के प्रभुत्व के आगे यह भी मामला शांत कर दिया गया।

         कुछ ऐसा ही मामला मुख्यमंत्री के गृह जिले उज्जैन में सामने आया है जहां महाकाल मंदिर के पार्किंग की भूमि को भाजपा विधायक को बेचने का आरोप है। जिसके बाद संबंधित विधायक ने सार्वजनिक रूप से प्रेसवार्ता में अपनी सफाई पेश की और अप्रत्यक्ष रूप से सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया। जिसके बाद संगठन ने तत्काल हरकत में आकर डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया और मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है। ऐसे ही कई मामले अन्य जिलों में भी है लेकिन सत्ता और संगठन के प्रभाव के चलते वे सामने नहीं आ पा रहे हैं शायद इन जिलों में भी किसी हिम्मतवीर की आवश्यकता है।


 हिम्मत कोठारी की हिम्मत की गूंज पहुची भोपाल तक। 


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