माही की गूंज, काकनवानी।
हमारे पूर्वज कई वर्षों से उज्जैयिनी परंपरागत करते आ रहे हैं। जिस वर्ष इंद्रदेव खुश नहीं होते हैं और अच्छी बारिश नहीं होती है तब-तब हमारे पूर्वज अपने-अपने खेत पर एवं वृक्ष के नीचे एकजुट होकर सह परिवार मिलकर उज्जैयिनी मनाते थे इसी दौर में यह परंपरा अभी भी निभाई जा रही है।
आपको बता दें कि, इस क्षेत्र में काफी समय निकलने के बाद अभी तक वर्षा नहीं होना किसानों के लिए बड़ी ही चिंता की बात है। जब तक अच्छी बारिश नहीं होगी तब तक अच्छी फसल भी नहीं होगी और जब फसल ही नहीं होगी तो हमारा जीवन यापन कैसे होगा, अन्न कहां से प्राप्त होगा। बिना बारिश के इंसानों को ही नहीं अपितु मवेशी, जानवरों को भी खाने की व्यवस्था नहीं हो पाएगी।
इसी दौर में आज की युवा पीढ़ी भी मानती है कि उज्जैयिनी करने से इंद्रदेव प्रसन्न होंगे और अवश्य ही अच्छी बारिश होगी। जिसको देखते हुए 17 जुलाई शुक्रवार को सकल व्यापारी संघ एवं ग्राम वासियों ने मिलकर 18 जुलाई शनिवार को अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर उज्जैनी मनाने का निश्चित किया। इसके बाद समस्त ग्राम वासियों ने अपनी स्वेच्छा से दूसरे दिन शनिवार को काकनवानी ग्राम बंद किया और स्थानीय शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग को पूरा जलमग्न किया गया। इसके पश्चात भक्तों द्वारा भोले शंभू भोलेनाथ जल बरसाओ दीनानाथ की धुन की गई एवं हनुमान चालीसा कर सभी भक्तों ने भोलेनाथ से भरपूर वर्ष की प्रार्थना की। पूजन पाठ के पश्चात गांव के महिलाएं अपने-अपने सभी संगठित परिवार के साथ अपने खेतों में खाना बनाया एवं वहीं पर सह परिवार ने इंद्रदेव को भोग अर्पित कर सह परिवार एक साथ बैठकर खुले आसमान में भोजन किया।

