खुद को जिंदा साबित करने में छुटा पसीना...
माही की गूंज, झाबुआ डेस्क।
कहने को मध्यप्रदेश में भाजपा की सुशासन वाली तथा डबल इंजन की सरकार है और यहां के मुख्यमंत्री हर बात के लिए आम जनता से दोनों हाथ उठवाकर जोरदार अभिनंदन कराते हैं...। लेकिन उन्ही के राज में जिंदा व्यक्ति को अपने जिंदा होने का सबूत पेश करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है वह भी एक जनप्रतिनिधि को। सरकारी अस्पतालों में बच्चों को चूहे कुतर रहे हैं, डॉक्टर खुद जहरीला कफ सिरफ मरीजों को पिला रहे हैं। घर-घर नल से पानी पहुंचाने की योजना को वर्तमान में पानी के लिए मशक्कत करते लोगो की तस्वीरे चिढ़ा रही है। लाखों बच्चों के भविष्य का निर्धारण करने वाली परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं। नेता जमीन की हेरा-फेरी करने में व्यस्त है। अधिकारी शौचालयों के निर्माण तक में रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार हो रहे हैं। कुल मिलाकर देश में अजीबो गरीब वाकिये ही चल रहे हैं। ऐसे में आम जनता के मन में एक ही सवाल है क्या यही भाजपा का सुशासन है...?

पंच रइसा बाई जिवित होने के बाद भी जिवित होने के प्रमाण के लिए ही भटक रही हैै।
क्या है मामला
हाल ही में रतलाम जिले की ग्राम पंचायत धतुरिया का है जहां एक महिला पंच रइसा बाई का आरोप है कि, उसने ग्राम पंचायत में सरपंच और सचिव के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला उठाया। तो उसे पंचायत रिकॉर्ड में मृत घोषित कर उसका मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी कर दिया गया। जिसके बाद वे पिछले चार महीनो से खुद को जीवित साबित करने का प्रयास कर रही है लेकिन उसे अभी तक सफलता नहीं मिली है। ऐसे में सरकारी कार्यालयों में होने वाले कार्यों का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है जब जिंदा व्यक्ति को मृत बताया जा सकता है तो अन्य कार्यों की स्थिति क्या होगी। बतादे ऐसा मध्यप्रदेश में पहला मामला नही है इसके पहले भी थांदला पुलिस का एक मामला सामने आया था जिसमे भानपुरा (मंदसौर) थाना क्षेत्र की जिवित महिला की हत्या होना बता कर बैगुनाहो को जेल की हवा खिला चुके है।

नीट पेपर लीक छात्रों के भविष्य से खिलवाड़
पिछले कुछ वर्षों से भर्ती परीक्षाओं में धांधली के आरोप सरकार पर लगते रहे हैं। मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाले के बाद कई मामले सामने आ चुके हैं बावजूद इसके ये कम होने के बढ़ती ही जा रही है। हाल ही में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में पेपर लीक होने के बाद इसे निरस्त कर दिया गया और पुनः परीक्षा की तारीख घोषित की गई। जिससे लाखों छात्रों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए है। परीक्षा भले ही दुबारा हो जाएगी लेकिन लाखों छात्रों ने इस दौरान जो तनाव झेला उसका क्या...? लाखों छात्र अपने भविष्य की चिंता को लेकर महगे कोचिंग संस्थानों में प्रवेश लेते हैं तो केवल छात्र ही नहीं बल्कि उसके पालकों की उम्मीद और सपने भी जुड़े होते हैं। ऐसे में पेपर लीक होने के बाद एक बार पुनः सरकार की नाकामियों की कीमत उन्हें दोबारा परीक्षा देकर चुकानी पड़ेगी। जिसको लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के मीम्स चल रहे हैं कुछ लोग लिख रहे हैं कि 10 रुपए का बच्चों का डायपर लीक नहीं होता है। ऐसे में इतनी बड़ी परीक्षा का पेपर लीक कैसे हो गया...? वहीं कुछ लोगों का कहना है कि, सरकार देश के युवाओं को स्वस्थ्य प्रतियोगिता उपलब्ध नहीं करवा पा रही है। हर जगह माफियाओं का राज हो गया है, भू-माफिया के बाद शिक्षा माफिया सक्रिय हो गए हैं। जो कहने को कोचिंग सेंटर चलाते हैं लेकिन असल में वे शिक्षा का व्यापार कर रहे हैं जो लाखों रुपए लेकर बच्चों को पहले ही पेपर दिलवा देते हैं। ऐसे में साल भर ईमानदारी से मेहनत करने वाले छात्रों को निराशा हाथ लगती है। कई लोगों का कहना है कि, नकली खाद बीज तो किसान का एक वर्ष बर्बाद करता है लेकिन इस तरह के पेपर का लिक होना लाखो छात्रों का भविष्य ही बर्बाद कर देता हैं। ऐसे में इस प्रकार की घटनाओं पर सरकार का कड़ा नियंत्रण होना चाहिए। वही दोशियों को कठोरतम दंड देना चाहिए ताकि इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो पाए।
