माही की गूंज, खवासा।
कोई आम व्यक्ति अपने सपनों का आशियाना बनाए तो अपने मकान में भराव करने के लिए मोरम-मिट्टी लाने पर प्रशासन त्वरित जाग जाता है और छोटी सी शिकायत पर त्वरित कार्रवाई कर अपनी वाह वाही लूटता है। जबकि यहां होना यह चाहिए कि, पंचायत स्तर पर शासन व प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करना चाहिए की जो भी आम व्यक्ति अपना मकान बनाए और भराव में मोरम-मिट्टी हेतु पंचायत में आवेदन कर रायल्टी के साथ उसे मोरम-मिट्टी खनन कर ला सके। लेकिन यह व्यवस्था न होने के चलते मजबूरी में अपने सपनों के आशियाने की नींव भरने हेतु बिना रॉयल्टी के मोरम-मिट्टी लाया जाता है और प्रशासन यहां अपनी कार्रवाई कर वाह वाही लूटता है।
वहीं दूसरी ओर सड़क निर्माण हो या कोई निजी कंस्ट्रक्शन का कार्य हो तो बड़ी मात्रा में बिना परमिशन व बिना रॉयल्टी के लाखों-करोड़ों घनमीटर मोरम-मिट्टी लाने पर भी प्रशासन विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जाती। शिकायत होने पर भी गांधी जी के बंदर की तरह अंधे,बहरे व गूंगे बन जाते हैं।
इसका एक उदाहरण नरसिंगपाडा में बन रही कपास की जिनिंग फैक्ट्री निर्माण के दौरान भी देखा जा सकता है। यहां बड़े रकबे में कपास की जिनिंग फैक्ट्री का कार्य चल रहा है। उक्त निर्माण के कार्य की परमिशन किस तरह ली गई है यह किसी को जानकारी नहीं है। लेकिन पिछले करीब एक माह से अधिक समय से एक पोकलेन व करीब चार जेसीबीयों से खनन कर ढोलखरा तालाब में से बिना रॉयल्टी व बिना परमिशन के, एक आकलन अनुसार 4000 से अधिक ट्रैक्टर-ट्राली व डंपर मोरम-मिट्टी भरकर जिनिंग फैक्ट्री परिसर में दिन-रात लाया गया। जिसकी स्थानीय राजस्व अधिकारियों को भी शिकायत करने की बात भी सामने आ रही है। लेकिन अधिकारियों द्वारा जवाब में कहा गया, गहरीकरण हो रहा है होने दो, इसमें कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
वही जानकारी रखने वाले यह भी बता रहे हैं कि, कपास जिनिंग प्लांट का जो कार्य करवा रहे हैं उन्हें यह पता लगा की कौन-कौन अधिकारियों को शिकायत कर रहा है तो उनसे मिलकर शिकायत नहीं करने के नाम पर अर्थ लाभ देकर चुप करने का प्रयास किया गया और स्थानीय अधिकारियों को भी मैनेज किया गया। करीब एक माह से हजारों ट्रैक्टर-ट्राली व डंपर से मोरम-मिट्टी खनन कर भरकर दिन-रात खाली हुए। लेकिन उसे देखकर भी प्रशासनिक नुमाइनदे गांधी जी के बंदर की तरह अंधे, गूंगे व बहरे बने दिखाई दिए।
बताया जा रहा है कि, इस संबंध में भामल उपसरपंच ने भी शिकायत करने का प्रयास किया ,लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ था। लेकिन आखिरकार कोई बड़े दबाव के चलते 22 अप्रैल को खनिज विभाग के कुछ अधिकारी ढोलखरा तालाब पहुंचे। जिस समय भी एक से अधिक जेसीबी (बैकोलोडर) व अनगिनत ट्रैक्टर चल रहे थे। लेकिन जैसे ही खनिज विभाग के अधिकारी पहुंचे सभी अन्य जेसीबी व ट्रैक्टर भाग खड़े हुए और एक जेसीबी (बेकोलोडर) अधिकारियों के हत्थे चढ़ा, जिसे खवासा पुलिस के सुपुर्द किया गया।
इस संबंध में क्या कार्रवाई की गई जानकारी हेतु माही की गूंज प्रतिनिधि ने खनिज विभाग झाबुआ की इंस्पेक्टर अलीशा रावत से चर्चा की तो फोन पर जानकारी देने के बजाय कहा कि, आप ऑफिस आ जाइए यहीं से जानकारी मिल पाएगी कहकर फोन काट दिया।
असल में यह खनन करवाने वाला मुख्य आरोपी किराए की जेसीबी (बेकोलोडर), पोकलेन के माध्यम से कपास जिनिंग फैक्ट्री का निर्माण करने वाला मालिक है। लेकिन कार्रवाई के नाम पर किराए से चल रही जेसीबी को जप्त कर कार्य की इतिश्री की गई। जबकि खनिज विभाग को चाहिए था कि, वह नरसिंगपाडा में बन रही कपास की जिनिंग फैक्ट्री में जाते और वहां देखते की ढोलखरा तालाब में से कितना लाखों घनमीटर का खनन बिना रॉयल्टी और बिना परमिशन के कर के खनिज लाया गया।
बताया जा रहा है कि, कपास जिनिंग निर्माणाधीन फैक्ट्री में पिछले करीब एक माह से 4 से 5 हजार ट्रैक्टर-ट्राली व डंपर भरकर बिना रॉयल्टी के खनिज यहां खाली हुआ है। साथ ही जो खनिज अब तक लाया गया है उससे दो गुना से अधिक की और आवश्यकता यहां पर भराव समतलीकरण करने में मोरम-मिट्टी लगेगी।
अब आगे देखना होगा कि, कपास जिनिंग फैक्ट्री के निर्माणाधीन परिसर में आगे मोरम-मिट्टी किस परमिशन के आधार पर लाई जाएगी तथा जो मोरम-मिट्टी लाखों घनमीटर अब तक लाई गई है उसका मापदंड कर खनिज विभाग कार्रवाई करता है या एक जेसीबी जो किराए से लगी थी जिसमें उसका कोई कसूर नहीं था को जप्त की गई। उक्त कार्रवाई को ही अपनी मुख्य कार्रवाई बताकर कार्य की इतिश्री कर लाखों घनमीटर लाया गया खनिज, मालिक को संरक्षण देकर अपना अर्थ लाभ लेकर कार्य की इतिश्री कर दी जाएगी या गांधी जी के यह प्रशासनिक बंदर अपनी आंख, कान व मुंह खोल वास्तविक कार्रवाई कपास जिनिंग फैक्ट्री में जाकर करेंगे...?

चार हजार से अधिक टेक्टर-ट्राली व डंपर तालाब से भर मोरम-मिट्टी कपास जिनिंग फैक्ट्री परिसर में हुआ खाली।

