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जनमत से बने नीति, योजना और कानून
19, Jun 2022 1 week ago

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         जनतंत्र में जनमत का बड़ा महत्व हैं। सरकारी नीति, योजनाओं ओर कानूनों के निर्माण के पूर्व जनता के पक्ष को जान लिया जाना चाहिए। तकनीकी के इस दौर में जनमत को जानना अधिक मुश्किल कार्य भी नहीं हैं। केंद्र सरकार द्वारा सेना में भर्ती की अग्निपथ योजना को लागू करते ही उसके व्यापक विरोध से देश जल उठा। इससे पूर्व तीन कृषि कानूनों के बाद इस कानून से नाराज किसानों ने आंदोलन किया। बेहद लम्बे चले आंदोलन के बाद केंद्र सरकार द्वारा कानून को वापिस लिए जाने की घोषणा की गई। 14 जून को केंद्र सरकार द्वारा सेना की तीनों शाखाओं थल, जल और वायु सेनाओं में युवाओं की भर्ती के लिए अग्निपथ भर्ती योजना का ऐलान किया। इस योजना के तहत जवानो को सिर्फ 4 साल के लिए सेना में सेवा देना होगी। इस योजना में भर्ती हुए युवाओं अग्निवीर कहा जाएगा। इस घोषणा के बाद देश भर में व्यापक पैमाने पर हिंसा फैल गयी। आखिर ऐसी क्या व्यवस्था की जाए जिससे योजनाओं, नीतियों, और कानूनों के निर्माण के बाद उसे जनता द्वारा सहर्ष रूप से स्वीकार लिया जाए। एक अच्छी और बेहतर नीति तैयार हों सके जो राष्ट्रीय इच्छा का प्रतिनिधित्व कर सकें। इसका एक तरीका नीति, योजना या कानून के निर्माण के पूर्व जनमत संग्रह किया जाना हो सकता है। जनता की राय से निर्मित कानून, नीति या योजनाएं जनता को सहर्ष स्वीकार होगीं ओर राष्ट्र हिंसा से भी बच सकेगा। जब तकनीकी साधन सीमित होतें थै, तब राज्यों में विधानसभा सदस्य और केंद्र में संसद सदस्य जनमत का प्रतिनिधित्व करतें थै। नीतिगत रूप से यह अभी भी सच है कि नीति निर्माण इनके द्वारा ही किया जाता हैं, जिसे जनमत कहा जाता है। किंतु अब जबकि तकनीकी साधन विकसित हो गए है। किसी भी विषय पर जनता की राय को आसानी से ओर निश्चित समय अवधि में जाना जा सकता है, इन परिस्थितियों में सरकार को जनता की राय अनिवार्य रूप से जान लेना चाहिए। राष्ट्र ने तीन कृषि कानून और अब अग्निपथ योजना को लेकर राष्ट्रव्यापी विरोध आगजनी, पथराव ओर व्यापक हिंसा को देखा हैं। सेना में भर्ती की अग्निपथ योजना की घोषणा होतें ही बिहार से शुरू हुआ छात्रों का विरोध देश भर में फैल गया। बिहार में भारी हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ ओर पत्थरबाजी की घटना घटित हुई। करीब 12 से अधिक ट्रेनों में आग लगा दी गयी। बिहार से शुरू हुआ अग्निपथ योजना का विरोध यूपी, राजस्थान सहित अन्य राज्यों में फैल गया। व्यापक पैमाने पर जारी हिंसा में राष्ट्रीय सम्पत्ति का बड़ा नुकसान हो रहा हैं। आक्रोशित युवाओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि हिंसा और आगजनी से किसी भी विषय का निराकरण सम्भव नहीं है। किसी विषय पर विरोध, नाराजी ओर मतभिन्नता सम्भव है। किंतु राष्ट्रीय संपत्ति को क्षति पहुचाना जघन्य ओर अक्षम्य अपराध हैं। विरोध, मतभिन्नता को प्रदर्शित करने के प्रजातांत्रिक तरीके है। जिनका इस्तेमाल कर सरकार के फैसलों का विरोध किया जा सकता हैं। युवाओं द्वारा अचानक आक्रोशित होकर राष्ट्रीय सम्पत्ति को नुकसान पहुचाने की कार्यवाहीं को अंजाम देना बेहद शर्मनाक ओर निंदनीय कृत्य हैं। छात्रों, युवाओं को अपने गुस्से पर काबू कर राष्ट्रीय सम्पत्ति को नुकसान पहुचाने से बचना चाहिए। अब सवाल यह उठता हैं कि सरकार योजनाओं, नीतियों और कानूनों के निर्माण के पूर्व जनमत का संग्रह क्यों नहीं करती है ? अग्निवीर योजना के बाद सोश्यल मीडिया पर एक लिंक योजना के समर्थन में चलाई जा रहीं है। जिसमे यह बताया जा रहा हैं कि मैं अग्निपथ योजना का समर्थक हूँ। यह लिंक योजना के समर्थकों द्वारा जनता का मानस तैयार करने हेतु चलाई जा रहीं है। सरकार समर्थक इसे वायरल कर रहें हैं। सरकार यदि अग्निपथ योजना के निर्माण के पूर्व इस प्रकार की लिंक के माध्यम से देश के युवाओं का मत जान लेती तो सम्भव था कि सरकार को इतना व्यापक विरोध का सामना नहीं करना पड़ता ओर राष्ट्रीय सम्पदा की क्षति को रोका जा सकता था। इस तकनीकी और संचार क्रांति के युग मे जनमत का संग्रह करना अधिक मुश्किल नहीं हैं। राष्ट्र के नवनिर्माण के लिए सरकार द्वारा बनाई जाने वाली नीति, योजनाएं ओर कानूनों पर व्यापक बहस ओर जनता की राय को जानने के बाद निर्मित कानून, नीति या योजना अधिक निखरी हुई और जन स्वीकार्य होगी। जनता की राय से इन नीतियों, कानूनों ओर योजनाओं में जमीनी वास्तविकताओं का समावेश भी हो सकेगा। यह सच है कि केंद्र सरकार द्वारा निर्मित नीति, योजना, या कानून राष्ट्र की जनता की उन्नति, विकास और उत्थान के लिए ही निर्मित कर क्रियान्वित किये जाते हैं। विषय के जानकारों द्वारा इन्हें बनाया जाता है। किंतु जिस जनता पर इसे लागू किया जाता हैं उसकी राय जानने की आवश्यकता महसूस नहीं कि जाती है। बात सिर्फ अग्निपथ की नहीं है, राष्ट्र उत्थान और प्रगति की समस्त योजनाओं को जनता की राय के बाद ही मूर्त रूप दिया जाना चाहिए। ऐसा करने से इन योजनाओं में जनता के अनुभव और अपेक्षाओं का समुचित समावेश हो सकेगा। जनमत सरकार की विभिन्न एजेंसियों ओर विभागों के माध्यम से भी किया जा सकता हैं। भारत की सरकार द्वारा बनाए गयी नीति, कानून और योजनाएं राष्ट्र की जनता के हित ओर उत्थान के लिए है। इनको जनमत संग्रह के द्वारा राष्ट्रीय इच्छा में परिवर्तित किया जा सकता हैं। ऐसा करना इसलिए जरूरी हैं कि प्रजातन्त्र जनता का, जनता के लिए जनता द्वारा की जाने वाली शासन व्यवस्था हैं। जनता की राय से निर्मित नीतियां, कानून ओर योजनाएं अधिक जनतांत्रिक ओर जन स्वीकार्य होगीं।


लेखक :- नरेंद्र तिवारी

सेंधवा, जिला बड़वानी


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