घायल युवक दर्द से तड़पता रहा, ग्रामीणों ने फोन कर मांगी मदद
माही की गूंज, भामल/खवासा।
क्षेत्र में सड़क हादसे के बाद आपातकालीन सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम भामल में हुए एक सड़क हादसे में घायल युवक मौके पर दर्द से तड़पता रहा, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार सूचना देने के बावजूद करीब डेढ़ घंटे तक न तो 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची और न ही पुलिस चौकी से कोई बल आया। इस स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखी गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बाजना मार्ग भामल में सड़क हादसा होने के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने घायल युवक की मदद के लिए 108 एंबुलेंस और पुलिस को फोन पर सूचना दी। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि सूचना मिलते ही आपातकालीन सेवाएं मौके पर पहुंचेंगी और घायल युवक को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया जाएगा। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है, कि काफी समय बीतने के बाद भी न तो एंबुलेंस पहुंची और न ही पुलिस की ओर से कोई सहायता मिली।
डेढ़ घंटे तक मदद का इंतजार करते रहे ग्रामीण
ग्रामीण सूरज चटपोटा, दिनेश सिंगाड़ उपसरपंच राजू डांगी केशव सोलंकी भीमसिंह नकुम आदि के अनुसार, 7:25 मिनिट पर हादसा हुआ हादसे के बाद घायल युवक को तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत थी। युवक दर्द से तड़प रहा था और मौके पर मौजूद लोग उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए परेशान होते रहे। ग्रामीणों ने कई बार फोन के माध्यम से संबंधित सेवाओं को सूचना देकर मदद की गुहार लगाई, लेकिन उनके अनुसार करीब डेढ़ घंटे तक कोई सहायता मौके पर नहीं पहुंची। ऐसे में सवाल उठता है, कि यदि सड़क हादसे जैसी आपात स्थिति में भी समय पर मदद नहीं मिले, तो आम नागरिकों को राहत कैसे मिलेगी?
आपातकालीन सेवाओं की तत्परता पर सवाल
सड़क हादसों में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में एंबुलेंस और पुलिस की समय पर मौजूदगी घायल व्यक्ति को प्राथमिक सहायता दिलाने में अहम भूमिका निभाती है। भामल की इस घटना ने आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता और सूचना मिलने के बाद कार्रवाई की गति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। समाचार लिखें जाने तक युवक की पहचान नहीं हो पाई थी।
ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की जांच कर यह पता लगाया जाए कि सूचना मिलने के बावजूद एंबुलेंस और पुलिस मौके पर समय पर क्यों नहीं पहुंचीं। साथ ही, संबंधित अधिकारियों को आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि भविष्य में किसी घायल को समय पर सहायता मिलने में देरी न हो।


