माही की गूंज, कुंदनपुर।
मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चैहान द्वारा आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के मामले में अपनी ही सरकार के अधिकारियों पर सवाल उठाने की चर्चा है। वहीं, झाबुआ जिले के कुंदनपुर क्षेत्र में भामची नदी पर बहुप्रतीक्षित खेड़ा-गलती बैराज का भूमिपूजन होने से क्षेत्रवासियों में विकास की नई उम्मीद् जगी है।
एक तरफ आदिवासी परिवारों को न्याय दिलाने और प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल है, तो दूसरी तरफ आदिवासी बहुल क्षेत्र में सिंचाई और जल उपलब्धता से जुड़ी अपेक्षाएं हैं। इन दोनों मुद्दों के बीच सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है घोषणाओं को जमीन पर उतारना और जनता का भरोसा कायम रखना।
भामची नदी पर बैराज का भूमिपूजन, क्षेत्रवासियों की निगाहें अब निर्माण पर
कुंदनपुर क्षेत्र की भामची नदी पर खेड़ा-गलती बैराज के भूमिपूजन कार्यक्रम में क्षेत्र के नागरिकों और युवाओं ने उपस्थित होकर इस अवसर के साक्षी बने। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश शासन की कैबिनेट मंत्री एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया तथा भाजपा जिलाध्यक्ष भानु भूरिया जिला पंचायत सदस्य विजय भाबोर राणापुर जनपद पंचायत अध्यक्ष निर्मला भानुभूरिया मौजूद रहे।
लंबे समय से इस परियोजना को लेकर क्षेत्र में उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। ऐसे में भूमिपूजन को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लेकिन अब क्षेत्रवासियों के मन में स्वाभाविक सवाल हैं कि, निर्माण कार्य कब गति पकड़ेगा...? परियोजना निर्धारित समय में पूरी होगी या नहीं...? और इसका वास्तविक लाभ किसानों तथा ग्रामीण परिवारों तक कब पहुंचेगा...?
जनता के लिए भूमिपूजन एक शुरुआत है, मंजिल नहीं। मंजिल तब होगी, जब परियोजना पूरी होकर लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाएगी।
शिवराज के सवालों ने बढ़ाई प्रशासनिक जवाबदेही पर चर्चा
सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के मामले में शिवराज सिंह चैहान ने नाराजगी जताई और प्रभावित परिवारों के पक्ष में आवाज उठाई। इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्रवाई, गरीब परिवारों के अधिकारों और सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही पर चर्चा को तेज किया।
हालांकि, इस घटनाक्रम को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और शिवराज सिंह चैहान के बीच व्यक्तिगत राजनीतिक टकराव का प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। लेकिन एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर सामने आता हैकृयदि किसी सरकारी कार्रवाई से गरीब और आदिवासी परिवार प्रभावित होते हैं, तो उनकी समस्याओं का समाधान कितनी तत्परता से किया जाता है?
यही सवाल विकास परियोजनाओं पर भी लागू होता है। योजनाओं की घोषणा और भूमिपूजन के साथ-साथ उनकी समयबद्ध पूर्णता तथा पारदर्शी निगरानी भी जरूरी है।
खेड़ा-गलती बैराज का भूमिपूजन निश्चित रूप से उम्मीद जगाता है, लेकिन अब निगाहें निर्माण की शुरुआत, काम की गति, गुणवत्ता और समयसीमा पर रहेंगी।
सवाल सरकार की घोषणा का नहीं, उसके परिणाम का है। सवाल भूमिपूजन का नहीं, निर्माण पूरा होने का है। और सवाल केवल विकास का वादा करने का नहीं, उस वादे को निभाने का है।
कुंदनपुर में खेड़ा-गलती बैराज का भूमिपूजन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। क्षेत्रवासियों और युवाओं की भागीदारी ने इस परियोजना से जुड़ी उम्मीदों को सामने रखा है। अब जिम्मेदारी संबंधित विभागों और प्रशासन की है कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप आगे बढ़े और परियोजना का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचे।
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