गेट पर टूटी टाइल्स, दीवारों में छेद और उखड़ता रंगय, मरम्मत के नाम पर हुई खानापूर्ति
माही की गूंज, भामल/खवासा।
ग्राम पंचायत परवाड़ा मे स्थित उपस्वास्थ्य केंद्र भवन की बदहाल स्थिती अब ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। विभागीय जानकारी के अनुसार करीब चार वर्ष पहले भवन का मरम्मत कार्य कराया गया था। लेकिन कुछ ही समय बाद भवन की हालत फिर खराब होने लगी। वर्तमान में भवन की दीवारों में दरारें दिखाई दे रही हैं, अंदर कई जगह छेद नजर आ रहे हैं, तथा रंग-रोगन भी उखड़ने लगा है। मुख्य गेट के पास लगी टाइल्स तक टूट चुकी हैं।
भवन की वर्तमान स्थिति देखकर ग्रामीणों का कहना है कि, यदि चार वर्ष पहले ही भवन की मरम्मत कराई गई थी तो इतने कम समय में भवन दोबारा जर्जर स्थिति में कैसे पहुंच गया...? लोगो ने मरम्मत कार्य की गुणवत्ता और उसमें उपयोग की गई सामग्री को लेकर भी सवाल उठाए हैं। वही यहाँ वर्तमान मे सीएचओ, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, सहित 6 कर्मचारी स्वास्थ्य केंद्र पर पदस्थ थे जिसमें अगर देखा जाए तो यहां सीएचओ एवं एएनएम ही पूरा काम संभाल रहे हैैै।
मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति का आरोप
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि, भवन की मरम्मत के दौरान मात्र खानापूर्ति की गई जिसके चलते मरम्मत के कुछ वर्षों बाद ही भवन की हालत फिर खराब हो गई। दीवारों में दिखाई दे रहे छेद, दरारें, उखड़ता प्लास्टर और खराब होती टाइल्स देखकर ग्रामीण, निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
बदा डामर, हुकली भाभर, शंभु डामर आदि ग्रामीणों का कहना है कि, यदि सरकारी भवनों की मरम्मत में गुणवत्तापूर्ण सामग्री और निर्धारित मापदंडों का पालन किया जाए तो चार साल के अंदर ही ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए थी। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर पूरे भवन का निरीक्षण करना चाहिए और पूर्व में हुए मरम्मत कार्य की गुणवत्ता की भी जांच करनी चाहिए।
स्वास्थ्य सुविधा देने वाले भवन की हालत ही बदहाल, इलाज केसा होगा?
उप स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ऐसे में जिस भवन में ग्रामीण, स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने पहुंचते हैं, उसी भवन की हालत खराब होना अपने आप में गंभीर विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि, जब सरकारी उप स्वास्थ्य केंद्र का भवन ही सुरक्षित और व्यवस्थित नहीं है तो ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा किस तरह मिल पाएगी...? यह बड़ा सवाल है।
ग्रामीणों ने बताया कि, भवन की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में समस्या और गंभीर हो सकती है।
नए भवन का हो निर्माण
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि, उप स्वास्थ्य केंद्र भवन की तकनीकी जांच कराकर वर्तमान स्थिति का आकलन किया जाए। साथ ही ग्रामीणों का कहना है कि, यदि भवन मरम्मत योग्य नहीं है तो पुराने भवन की बार-बार मरम्मत कराने के बजाय नए सिरे से उप स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण कराया जाए ताकि ग्रामीणों को सुरक्षित और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
अब देखना यह है कि, चार वर्ष पहले कराए गए मरम्मत कार्य के बावजूद दोबारा खराब हुई भवन की स्थिति पर जिम्मेदार अधिकारी कब संज्ञान लेते हैं और ग्रामीणों की इस मांग पर क्या कार्रवाई की जाती है।
वही मामले को लेकर नेशनल हेल्थ मिशन झाबुआ स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियर रवि भंवर से माही की गूंज ने कई बार संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने फोन ही नहीं उठाया।
वही मामले को लेकर माही की गूंज ने उप स्वास्थ्य केंद्र के कार्यभार देख रहे थांदला सिविल अस्पताल के अधीन ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर जॉन खराड़ी से चर्चा की तो उनका कहना था कि, मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है, यह भवन पुराना है, अभी इसकी मेंटेनेंस की राशि भी नहीं आ रही है, बाकी तो जो है वैसा चल रहा है। उनका कहना था कि, उप स्वास्थ्य केंद्र पर अभी कई प्रकार की दवाइयां ग्रामीणों को मिल रही है अगर वहां कोई समस्या है,तो मैं मामले को देखता हूं।
उप स्वास्थ्य केंद्र पर पदस्थ सीएचओ हेमलता संगीतरा से चर्चा की तो उनका कहना था कि, मुझे यहां आए साल भर हुआ है, इससे पहले से ही यहां के भवन की हालत खराब है फिर भी हम कार्य कर रहे हैं। अभी आशा कार्यकर्ता सहित हम 6 कर्मचारी कार्य देख रहे है, यहां जो बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं, उनको खवासा अटैच कर रखा है।

मरम्मत के नाम पर भ्रष्टाचार की भेट चढ़ उप स्वास्थ्य केंद्र भवन की बदहाली फोटो की मुह जुबानी।
