Thursday, 15 ,October 2026
RNI No. MPHIN/2018/76422
: mahikigunj@gmail.com
Contact Info

HeadLines

असुविधाओं और वसूली के लिए बदनाम हो चुका हॉस्पिटल, निजी हॉस्पिटलो की पो बारह | जिले में गौ-हत्या का कारण क्षेत्रवासियों का खुला और मौन समर्थन या स्वीकृति तो नहीं...? | चार साल पहले उप स्वास्थ्य केंद्र का मरम्मत कार्य अपनी बदहाली के आसु बहा रहा भवन | 12 लाख से अधिक की लागत से बना शासकीय उचित मूल्य दुकान का गोदाम अब भी अधूरा | क्या झाबुआ जिले की जनता तीसरे विकल्प की तलाश में है...? | 482 छात्राओं की नेत्र जांच, 16 बेटियों की शिक्षा का जिम्मा | मेंटेनेंस के नाम पर लंबी बिजली कटौती से ग्रामीण परेशान | सेवा सकल्प अभियान के तहत आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम सम्पन्न | जर्जर भवन में संचालित हो रही ग्राम पंचायत | गांधी जयंती पर विशेष ग्राम सभा सम्पन्न | गांधी जयंती पर चला वृहद स्वच्छता अभियान | विधायक, ग्रामीणों के साथ कलेक्टर से मिलीं | खुला पड़ा गड्ढा दुर्घटना को दे रहा आमंत्रण | जर्जर भवनों को गिराने की प्रक्रिया शुरू | अनंत चतुर्दशी पर गूंजा ‘गणपति बप्पा मोरया’, जुलूस के साथ हुआ गणेश प्रतिमा का विसर्जन...!! | मूलभूत सुविधाओं से वंचित शासकीय स्कूले | नवरात्रि पर्व को लेकर रोग्या देवी मंदिर पर समिति का गठन, अध्यक्ष व कोषाध्यक्ष का किया चयन | अनाथ बच्चों की मदद को आगे आए जनप्रतिनिधि | धूमधाम से मनाया गया ईद-ए-मिलाद-उन-नबी | प्रशासनिक फेरबदल एसडीएम तनुश्री मीणा को बालाघाट सीईओ की कमान |

मूलभूत सुविधाओं से वंचित शासकीय स्कूले
Report By: सुनिल सोलंकी 24, Sep 2026 2 weeks ago

image

माही की गूंज, खवासा। 

          ग्रामीण क्षेत्र के शासकीय प्राथमिक व मिडिल विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है। विद्यालय में न तो बच्चों के लिए समुचित शौचालय की व्यवस्था है और न ही पीने के लिए स्वच्छ पानी उपलब्ध है। इसी के चलते विद्यार्थियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन फिर भी जिम्मेदार अधिकारी व शिक्षक इस और कोई ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। जिसके कारण बच्चों को काफी परेशानियों से झूझना पड़ रहा है। 

         कुछ ऐसा ही मामला जानकारी के अनुसार सामने आया जिसमें परवाड़ा के कुछ युवाओं ने हमें वहां के वीडियो वह फोटो उपलब्ध कराए। वास्तविकता जानी तो हमें काफी अनियमिता व समस्या वहां दिखाई दी। जानकारी के अनुसार प्राथमिक विद्यालय की सुखीमाली फलिया में 1 से 5 तक 107 बच्चों की उपस्थिति है और यहां बच्चो को पढ़ाने के लिए दो शिक्षक और एक शिक्षिका पदस्थ है। वही गांव में ही मिडिल स्कूल के भी यही हाल है वहां भी बाथरुम व शौचालय है ही नहीं । वहां के बच्चे भी बाहर शौच के लिए जाने को मजबूर है। हमने जब मिडिल स्कूल का निरीक्षण किया गया तो वहां 4 बजे के पहले ही स्कूल में ताले मिले जबकि 4ः30 बजे तक स्कूल के स्टाफ को उपस्थित रहना है। अन्य स्कूल के भी यही हाल है। लेकिन वहां पर जब प्रभारी प्राचार्य ही उपस्थित नहीं है तो अन्य शिक्षक किस तरह से उपस्थिति दर्ज कराते होंगे...? 

     ग्रामीणों का कहना है कि, मिडिल स्कूल में प्राचार्य व आने वाला स्टाफ आए दिन इसी तरह से स्कूल से निर्धारित समय से पहले ही चले जाते हैं। जिसके कारण यहां बच्चों को जो भी मूलभूत सुविधाएं व शिक्षा मिलनी चाहिए वह नहीं मिल पा रही है। कहने को तो स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जन शिक्षक की नियुक्ति भी की जाती है। जिसमें स्कूलों की देखरेख और प्रतिदिन इनकी रिपोर्ट बनाकर वरिष्ठ अधिकारियों को प्रेषित करना रहती है। लेकिन स्थानीय जन शिक्षक भी इन शिक्षकों की ऊपर कोई भी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। जिसके कारण आए दिन निर्धारित समय से पहले स्कूल बंद करके शिक्षक निकल जाते हैं। बताने वाले बताते हैं सुखी माली मे प्राथमिक विधायल मे पांचवी तक सभी बच्चों को एक ही कक्ष मे पढ़ाया जाता है। तथा जो दो अतिरिक्त कक्ष बने हुए हैं वह जर्जर अवस्था में है। जिसके कारण बच्चों को वहां नहीं पढ़ाया जाता है। बताते हैं कि पूर्व में किराए का एक मकान भी लिया था जिसमें उसका किराया नहीं देने के कारण बच्चों को फिर एक से पांच तक एक ही कक्षा में बिठाया जा रहा है। और एक ही कक्षा में तीनों शिक्षक पांचवी तक के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। अब एक ही कक्ष मे किस तरह से बच्चो को पढ़ाया जा रहा होगा यह सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है। ग्रामीणो का कहना है कि, एक ही कक्षा में तीनों शिक्षक समय पर नहीं पड़ा पाते है जिससे यहाँ नए भवन की स्वीकृति शासन द्वारा दी जानी चाहिए। 

ग्रामीणों का आरोप है। कि विद्यालय में निर्धारित समय पर पढ़ाई भी नियमित रूप से नहीं हो पा रही है शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं पहुंचने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 

         अभिभावकों का कहना है कि, सरकारी विद्यालयों में बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है।

      सबसे बड़ी चिंता यह है कि, शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव का सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने संबंधित शिक्षा विभाग के अधिकारियों से विद्यालय की व्यवस्थाओं की जांच कराकर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग की है।

       कुकड़ीपाड़ा संकुल के जन शिक्षक प्रेमचंद पाटीदार से जब जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि, ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज होती है। हमें स्कूल में निरीक्षण करने का भोपाल से आदेश मिलता है कि, आपको  इस स्कूल में आज जाना है निरीक्षण के लिए तो हम जाते है। हम तीन जनशिक्षक है इसलिए मैं यहा की जानकारी कैसे बता पाऊंगा

       कांतिलाल पाटीदार प्राचार्य मिडिल स्कूल परवाड़ा ने बताया कि, मिडिल स्कूल मे 350 बच्चे पड़ते है, शौचालय की स्थिति जर्जर है, हम सभी पौने चार बजे तक उपस्थित थे बाकि समस्या है वो सब सही बात है। 

      अमजद खान प्रभारी संकुल प्राचार्य कुकड़ीपाड़ा ने बताया, भवन तो वहां जिर्ण शीर्ण अवस्था में है इसलिए वह डिस्मेंटल की श्रेणी में है और एक ही कक्ष में वहां सभी कक्षाएं लगाई जा रही है। अब नया भवन अगर बनेगा तो उसमें व्यवस्थित रूप से कक्षाएं संचालित की जाएगी। मिडिल स्कूल की जो समस्या है, उसका निराकरण करने का प्रयास किया जाएगा।

 मिडिल स्कूल मे अनुउपयोगी पड़ी पानी की टंकी।

 किचन शेड भी जर्जर अवस्था मे।

 मिडिल स्कूल में शौचालय की स्थिति भी दयनीय अंदर घास उग गईं।

 शौचालय पर लगा तला।

 पिने के पानी का स्टेण्ड बना लेकिन नल नहीं लगे।



माही की गूंज समाचार पत्र एवं न्यूज़ पोर्टल की एजेंसी, समाचार व विज्ञापन के लिए संपर्क करे... मो. 9589882798 |