माही की गूंज, काकनवानी।
जिले भर में पिछले 2 वर्ष से ट्रिपल डी चल रहा है यानी की दहेज, दारू और डीजे को लेकर आदिवासी समाज में समाज सुधार को लेकर समाजसेवी हजारों मीटिंग कर चुके हैं। इसी दौर में प्रशासन भी पूरी तरह से लगा हुआ है। इसके बावजूद भी जिले में दारू, दहेज और डीजे जोर शोर से चल रहे हैं।
लोगों का कहना है कि, कई समाजसेवी मीटिंग में तो बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन जब उन्हीं के घर या रिश्तेदारों में शादी आती है तो ना ही दारू बंद होता है ना ही डीजे बंद होता है और दहेज बढ़कर ही लिया जाता है और दिया जाता है। क्या समाजसेवी इस प्रकार से समाज सेवा कर पाएंगे...! हम अपने घर में ही नियम का उल्लंघन कर रहे हैं और बाहर वालों को रोक रहे हैं। ऐसे में स्वाभाविक है कि लड़ाई-झगड़ा और मारपीट बढ़ना ही है। समाज सेवकों को चाहिए कि वह पूर्णतः नियम का पालन कर समाज में एकता एवं भाईचारा बना रखे तभी हमारा समाज ऊपर उठ पाएगा और समाज में सुधार आएगा।
इसी को लेकर आज काकनवानी थाने पर एक बैठक रखी गई, जिसमें समाजसेवी एवं डीजे संचालकों को बुलाया गया। जिसमें डीजे पूर्णतः बंद रखने का कहा गया। लेकिन डीजे संचालकों का कहना है कि, हमने तो पिछले दो वर्ष से डीजे बंद कर रखे हैं उसके बावजूद भी यह बार-बार डीजे की बात क्यों आ रही है। कई जगह डीजे चल रहे हैं लेकिन काकनवानी क्षेत्र में डीजे पूर्णतया बंद है फिर भी प्रशासन एवं समाजसेवी दारू, दहेज की बात ना करके सिर्फ डीजे की ही बात कर रहे हैं। डीजे संचालक का कहना है कि डीजे के साथ ही दारू एवं दहेज भी पूर्णता बंद कर दिया जाए तभी समाज मे एकता बनी रहेगी। लेकिन समाज सेवक ना तो दारू बंद करवा पाए और ना ही दहेज पर प्रतिबंध लगा पाए।
वही डीजे के विपक्ष में रहे लोगो का कहना है कि, समाज में डीजे की वजह से ही लड़ाई झगड़ा एवं समाज में बालक बालिकाएं डीजे से ही बिगड़ते हैं डीजे बंद होने से लड़ाई झगड़ा बंद हो गए एवं इस वर्ष बच्चों के स्कूल का रिजल्ट भी बहुत अच्छा आया है।
