माही की गूंज, कुंदनपुर।
22 जनवरी को हिन्दू सम्मेलन का आयोजन अत्यंत उत्साह, श्रद्धा और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। यह सम्मेलन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभक्ति का भी सशक्त मंच सिद्ध हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत लक्ष्मीनारायण मंदिर प्रांगण से कलश यात्रा के साथ हुई। कलश यात्रा ग्राम के प्रमुख मार्गों से होकर निकली, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं एवं युवा शामिल हुए। ग्राम भ्रमण के दौरान वातावरण हर-हर महादेव, भारत माता की जय और जय श्री राम के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। इस अवसर पर बेंड बाजे व डोल-मान्दल की ताल पर प्रस्तुत की गई पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। कलश यात्रा के समापन उपरांत स्कूल ग्राउंड पर हिन्दू सम्मेलन के आयोजन मे नन्ही बालिकाओं द्वारा नृत्य के पश्चात भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलन कर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत की गई।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि झाबुआ जिला कार्यवाह कैलाश मालीवाड, ने अपने उद्बोधन में कहा कि, हिंदू धर्म कोई संकीर्ण पूजा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र कला है। उन्होंने कहा कि विश्व शांति और मानव कल्याण के लिए भारत में हिंदू समाज का एकजुट रहना आज नितांत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भारत एक शरीर है तो हिंदू उसकी आत्मा हैं और यह संबंध सनातन काल से चला आ रहा है।
झाबुआ विभाग छात्रा प्रमुख (स्वयं सेविका) भूमिका पँवार ने अपने उद्बोधन में कहा कि, भारत माता को परम वेभव शाली बनाने के लिए कुछ परिवर्तन की आवश्यकता है। जिन में समाज का प्रमुख इकाई कुटुम्ब है समाज है नागरिक कर्तव्य है राष्ट्रहित है हमें इस मार्ग पर आगे बढ़ेंगे।
खुमान मैड़ा महाराज खेड़ा ने अपने उद्बोधन मे कहा, हमारी सनातन संस्कृति और धर्म के अमूल्य प्रतीक हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आदिवासी समाज मूलतः हिन्दू है और अपनी संस्कृति, परंपरा व पहचान के साथ कभी समझौता नहीं करेगा। हम बिकने वाले नहीं हैं जैसे दृढ़ वाक्यों के साथ उन्होंने समाज को जागरूक और संगठित रहने का आह्वान किया। कुंदनपुर क्षेत्र के आस पास के पुजारा एवं भगत समाज ओर गणमान्य नागरिक, मातृशक्ति, बच्चे व युवा व सामाजिक कार्यकर्ता एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिससे सम्मेलन की गरिमा और प्रभाव और अधिक बढ़ गया। कार्यक्रम के समापन के पश्चात भोजन प्रसादी का शुभारंभ किया गया, जिसमें सम्मेलन में उपस्थित श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर प्रसादी ग्रहण की। यह हिन्दू सम्मेलन कुंदनपुर मण्डल के इतिहास में एक प्रेरणादायक एवं स्मरणीय आयोजन के रूप में दर्ज हो गया, जिसने समाज में सांस्कृतिक चेतना, संगठन शक्ति और राष्ट्रप्रेम की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया ।

