माही की गूंज, झाबुआ डेस्क।
रतलाम। जब जीवन में सब कुछ सही चल रहा हो और कोई अपना जीवन का अंत कर ले तो हर किसी के मन में यही सवाल उठता है कि, आखिर उसने अपने जीवन का अंत क्यों कर लिया...?
ऐसा ही एक सवाल करीब 20 वर्षीय ऋषभ भटेवरा ने अपने जीवन का अंत करने के बाद उठना लाजमी ही है और माता-पिता व परिवार के प्रति हर किसी की उदार भाव के साथ सदभावनाएं है।
मंगलवार देर शाम के बाद पहले मोबाइल से वार्तालाप व बाद रात्रि में सोशल मीडिया पर दुखद सूचना मिलती है कि, बड़ी सरवा (राज.) निवासी शंकरलाल जी भटेवरा के पोत्र एवं शेखर भटेवरा हाल मुकाम मनीष नगर कस्तूरबा गली न. 9 के पुत्र ऋषभ ने अपनी जीवन लीला समाप्त (आत्महत्या) कर ली। उक्त दुखद सूचना मिलते ही पूरे कलाल समाज, चित-परिचित समाजजनों एवं मित्रों को यह सूचना मिली वैसे ही हर घर में गम का माहौल छा गया। और सवाल यही रहा कि, आखिर ऋषभ ने अपने जीवन का अंत क्यों कर दिया...? क्योंकि ऋषभ करीब 20 वर्ष का होकर किशोरावस्था में था और शिक्षारत होकर अभी न तो किसी सामाजिक जवाबदेही न ही व्यवसायिक जवाब देही थी। वहीं ऋषभ का व्यवहार ऐसा कि, जब भी किसी परिचित से भी मुलाकात करता तो पूरी तरह से हसमुख मिजाज और संस्कार ऐसे कि, किसी अपनों से बड़े से नया परिचय हो तो एक बच्चे के रूप में ही सरल स्वभाव के साथ उनका चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करना अपने व्यवहार में था।
वही माता-पिता ने बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए परिश्रम कर रतलाम में कस्तूरबा नगर मेन रोड पर तीन मंजिला शोरूम होकर उसका सम्मानजनक किराया आता है। वहीं उक्त शोरूम में पिता शेखर का फर्नीचर हार्डवेयर का बिजनेस भी है। ऐसे में पुत्र द्वारा उसकी गलती से अगर कोई अर्थ नुकसान होने पर पिता शेखर भटेवरा इतना सक्षम था कि, वह उसकी भरपाई कर के भी अपने पुत्र को सही मार्ग प्रशस्त करता। लेकिन बताते हैं ऋषभ की कोई ऐसी गलत लाइन भी नहीं थी कि, माता-पिता उसकी किसी भी प्रकार की गलती पर वह अपने पुत्र को मार्ग प्रशस्त कर सके। पर यह भी सही है कि, मोबाइल का दौर व उम्र की कमी से बच्चों को गलत दिशा मिल रही है। कहीं न कहीं मोबाइल स्कैम ही है जिसके चलते ऋषभ ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
बताया जा रहा है कि, ऋषभ के माता-पिता मंगलवार को किसी शादी समारोह में राजस्थान गए हुए थे। वहीं ऋषभ हार्डवेयर की दुकान पर बैठा था और मोबाइल का पूरा डाटा डिलीट किया और कोई कीटनाशक पाउडर को पानी या कोल्डड्रिंक में मिलाकर पी गया। उक्त घटना अनुमान अनुसार 3 बजे की आकी जा रही है। जब पिता शेखर ने किसी काम के चलते ऋषभ को फोन लगाया तो कई बार फोन करने पर मोबाइल अटेंड नहीं करने पर शेखर ने अन्य व्यक्ति को उसके प्रतिष्ठान पर भेजा। तो प्रतिष्ठा के केबिन में मूर्छित अवस्था में ऋषभ मिला और करीब साढे 4 से 5 बजे हॉस्पिटल ले गए। कुछ सांसे चल रही थी उल्टी भी हुई लेकिन उपचार के थोड़ी देर बाद ही अपनी अंतिम सांस ऋषभ ने ली।
उक्त घटना के बाद हर कोई दुखी है वही ऋषभ के इस कदम पर किसी की भी सहानुभूति नहीं दिख रही है, परंतु परिवार के प्रति हर किसी की संवेदनाए है। बताते हैं, शेखर की एक पुत्री व एक ही पुत्र था।
पुलिस मोबाइल डाटा डिलीट क्यों किया जिसकी जांच कर रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि, मोबाइल पर किसी प्रकार का कोई स्कैम हुआ और ऋषभ उसके चंगुल में अनजाने में फस गया और किसी ब्लैकमेलिंग के चलते ही ऋषभ ने इस घटना को अंजाम दिया होगा। लेकिन ऋषभ या किसी के भी द्वारा इस तरह का कदम उठाने पर उसे सही नहीं कहा जा सकता है। अगर कितनी भी बड़ी परेशानी थी तो ऋषभ अपने पिता या परिवार को बोलता तो यह तय है थोड़ी फटकार जरूर मिलती पर पिता व परिवार उसका समाधान जरूर कर लेते।
माही की गूंज युवाओं को यही संदेश देना चाहता है कि, किसी भी मोबाइल स्केम से बच्चे और किसी प्रकार की कोई भी बात हो तो वह अपने पिता व परिवार को अवश्य बताएं। ताकि उसका समाधान हो सके। न कि इस तरह के गलत कदम उठाकर अपने आप को कलंकित कर माता-पिता व परिवार को जीवन भर का दुख दे।
माता-पिता के साथ खड़ा ऋषभ का अंत दुखदाई व चिंतनिय
