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सरस्वती नन्दन स्वामी गुरुदेव के प्रागम्य महोत्सव पर अखण्ड नाम संकीर्तन सप्ताह में झूम उठे श्रद्धालु
02, Jan 2026 9 months ago

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3 जनवरी को अरुणोदय वेला में पादुका पूजन के साथ होगी महा आरती

माही की गूंज, थांदला। 

          शंवत महासरी 1346 में संस्कृत में गुरु चरित्र की रचना करके जन-जन को गुरु की महिमा बताकर उनके पद चिन्हों पर चलकर भक्त और भगवान एक हो जाते है। ऐसी महिमा बताने वालें भारत के विरले संत श्री नरसिंह सरस्वती कारंजा महाराज के कृपापात्र शिष्य श्री सरस्वती नन्दन स्वामीजी महाराज जिन्होंनें तत्कालीन राजकीय शासन में थांदला नगर की तपोभूमि पर करीब 350 वर्ष से अधिक अखण्ड साधना करते हुए शंवत 1924 में 21 दिन समाधि लेकर भगवान विट्ठलस्वामी के अवतार में प्रगट हुए थे, तब से उनके अनुयायी जो गुजरात, राजस्थान महाराष्ट्र आदि अन्य प्रांत में फैलें हुए है। थांदला नगर में उनके तप समाधि स्थल बैकुंठ धाम (गुरुद्वारा) में आकर अखण्ड नाम कीर्तन करते हुए झूम उठते है। गुरुभक्ति का ऐसा दृश्य शायद ही कही ओर देखने सुनने में नही आया होगा जो थांदला नगर को छोटी काशी बना देता है। यहाँ तत्कालीन समय से अखण्ड नाम कीर्तन सप्ताह चल रहा है। इस वर्ष 27 दिसम्बर से शुरू हुए अखण्ड कीर्तन में अनेक स्थानों के श्रद्धालुओं ने आकर क्रमशः टोली बनाकर सरस्वती नन्दन स्वामी गुरुदेव के भजनामृत से नगर के कण-कण को पावन कर दिया है। आयोजन में प्रतिदिन प्रातः 9:30 पर व रात्रि 8:30 पर गुरुद्वारा में विराजित विट्ठलस्वामीजी, रुक्मणी देवी व रुप्पणी जी तथा सरस्वती माता सहित गुरुदेव सरस्वती नन्दन स्वामीजी की आरती होती है वही आस्था में डुबकी लगाने वालें प्रत्येक भक्तजन उनके चरणामृत व प्रसाद का रसपान करते है। आयोजन में आश्रम प्रभारी पंडित भूदेव आचार्य, न्यास मण्डल के अध्यक्ष प. राजेन्द्र सोनी, सचिव डॉ. जया पाठक, उपाध्यक्ष द्वय प. श्रीरंग आचार्य व रमेन्द्र सोनी, कोषाध्यक्ष प. भागवत प्रसाद शुक्ल, आयोजन संयोजक तुषार भट्ट, दीपक आचार्य व वीरेंद्र आचार्य, विभिन्न समिति सञ्चालक किशोर आचार्य, ज्ञानदेव आचार्य, ओमप्रकाश बैरागी, तरुण भट्ट, ईश्वरदास वाणी, चेतन आचार्य, नामदेव आचार्य, मनीष बैरागी, मयंक आचार्य, विट्ठल बैरागी, गणपतिदास बैरागी, निरंजन पाठक, अरविंद चौहान आदि अनके गुरुभक्त व मातृशक्ति के सामुहिक सेवा संकल्पों से नगर जनों व दूर प्रान्तों से आने वालें गुरु भाई-बहिनों को आध्यात्मिक माहौल मिलता है व उनकी निःस्वार्थ सेवा के दर्शन होते है।


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