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दिव्य संकल्प सामूहिक विवाह सम्मेलन हेतु प्रेस वार्ता का हुआ आयोजन
Report By: ऋषभ गुप्ता 02, Jan 2026 3 days ago

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माही की गूंज, बनी। 

          पेटलावद जनपद के ग्राम बनी स्थित श्री हरिहर आश्रम – श्री कृष्ण कामधेनु गौशाला में आश्रम के पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. देवेन्द्र शास्त्री मंदसौर के मार्गदर्शन में निर्धन एवं ग़रीब कन्याओं के निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन की तैयारियों को लेकर एक गरिमामय प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आचार्य श्री ने समाज के समक्ष एक व्यापक, संवेदनशील और दूरदर्शी सामाजिक संकल्प को स्पष्ट शब्दों में प्रस्तुत किया, जिसका मूल उद्देश्य मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करना है।

सामाजिक समरसता : एक समभावी समाज की आधारशिला

          प्रेस वार्ता का प्रमुख विषय सामाजिक समरसता रहा। आचार्य डॉ. देवेन्द्र शास्त्री ने कहा कि समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता और समभाव में निहित है। जब तक समाज में भेदभाव, ऊँच-नीच और असमानता बनी रहती है, तब तक समग्र विकास संभव नहीं। सामूहिक विवाह सम्मेलन के माध्यम से आश्रम का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाकर यह संदेश देना है कि सभी मानव समान हैं और विवाह जैसे पवित्र संस्कार में किसी भी प्रकार का भेद स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

निर्धन, शोषित एवं वंचित कन्याओं का स्वावलंबन में वृद्धि और स्वाभिमान की रक्षा

          आचार्य श्री ने विशेष रूप से निर्धन, शोषित और वंचित कन्याओं के स्वावलंबन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कन्यादान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि माता-पिता और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। आर्थिक अभाव के कारण किसी कन्या का विवाह रुकना या अपमानजनक परिस्थितियों में होना, समाज के लिए कलंक है।

          यह सामूहिक विवाह सम्मेलन कन्याओं को स्वाभिमानपूर्वक विवाह का अवसर प्रदान करता है, जहाँ किसी पर आर्थिक बोझ नहीं डाला जाता और सभी व्यवस्थाएँ आश्रम व समाज के सहयोग से की जाती हैं। इससे कन्याओं में आत्मविश्वास का संचार होता है और वे नए जीवन की शुरुआत सम्मान के साथ कर पाती हैं।

ऊँच-नीच और आर्थिक असमानता के भेद को समाप्त करने का प्रयास

           प्रेस वार्ता में यह भी रेखांकित किया गया कि समाज में व्याप्त आर्थिक असमानता और जातिगत भेदभाव विवाह जैसे संस्कारों में अधिक स्पष्ट दिखाई देते हैं। दहेज, दिखावा और सामाजिक प्रतिष्ठा की होड़ ने विवाह को बोझिल बना दिया है।

           सामूहिक विवाह सम्मेलन इन कुरीतियों पर प्रहार करता है। यहाँ सभी जोड़े समान व्यवस्थाओं में विवाह बंधन में बंधते हैं, जिससे यह संदेश जाता है कि संस्कार की पवित्रता धन या दिखावे से नहीं, बल्कि संस्कारों और मूल्यों से होती है।

सर्व हिंदू समाज को एकता के सूत्र में पिरोने का सदसंकल्प

          आचार्य डॉ. देवेन्द्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि इस आयोजन का व्यापक उद्देश्य सर्व हिंदू समाज को एकता के सूत्र में पिरोना है। जाति, वर्ग, क्षेत्र और आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर जब समाज एक साथ किसी पुण्य कार्य में सहभागी बनता है, तब वास्तविक एकता का निर्माण होता है।

          यह सम्मेलन केवल विवाह का आयोजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है, जो आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाता है कि परंपराएँ तभी जीवित रहती हैं, जब वे मानवता और समानता के मूल्यों से जुड़ी हों।

          श्री हरिहर आश्रम – श्री कृष्ण कामधेनु गौशाला, ग्राम बनी में आयोजित यह प्रेस वार्ता न केवल एक कार्यक्रम की सूचना थी, बल्कि समाज को दिशा देने वाला एक दिव्य संकल्प भी था। निर्धन कन्याओं के निःशुल्क सामूहिक विवाह के माध्यम से सामाजिक समरसता, स्वावलंबन, स्वाभिमान और एकता का जो संदेश दिया गया, वह आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

          आचार्य डॉ. देवेन्द्र शास्त्री के नेतृत्व में यह पहल निश्चित ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा बनेगी और मानवता, करुणा व समानता के मूल्यों को सुदृढ़ करेगी। इस अवसर पर मध्यप्रदेश शासन में कैबिनेट मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने गौशाला परिसर में नवनिर्मित शेड का लोकार्पण करके गौमाता का पूजन अर्चन किया। सुश्री भूरिया ने कहा कि पूज्य आचार्य श्री निःस्वार्थ भाव से जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र में अंत्योदय की पवित्र भावना से कार्य कर रहे हैं। निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन की परम्परा ,समाज में बढ़ रही फिजुलखर्ची पर अंकुश लगाने में मील का पत्थर साबित होगी। कार्यक्रम के विश्राम पर आभार आश्रम के प्रबंधक हरिओम पाटीदार, विक्रम आयशर ने माना। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार, हरिशंकर पंवार, मनोज जानी, उमेश चौहान, राकेश गहलोत, संजय लोढ़ा, जितेश विश्वकर्मा, राजेश राठौड़, जगदीश प्रजापत आदि पत्रकार उपस्थित रहे। गौशाला परिवार के  बग़दीराम पाटीदार अध्यक्ष, हरिओम पाटीदार आदि वरिष्ठजन उपस्थित थे एवं वधू-पक्ष भी उपस्थित थे।


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