चार सौ बीसी का यह खेल ठेकेदार को पहुंचा रहा करोडो़ का लाभ
माही की गूंज, झाबुआ।
भाजपा सरकार में तात्कालिक मुख्यमंत्री उमाभारती ने 2003 में मुख्यमंत्री बनने के साथ आबकारी नीति में संशोधन कर एकल प्रणाली व्यवस्था लागू की गई थी। जिसका मुख्य उद्देश्य कहीं न कहीं यही था कि, प्रदेश के किसी भी क्षेत्र या जिले में बड़े शराब माफियाओं का आतंक खत्म हो जाएगा। साथ ही स्थानीय व क्षेत्रीय शराब से जुड़े व्यवसाय वाले व्यक्तियों को ठेका लेकर व्यवसाय करने का मौका मिलेगा। इसके साथ ही अवैध शराब बिक्री पर रोक होकर शासन का भी लाभ होगा। जिसके बाद शिवराज सरकार ने इस एकल प्रणाली में थोड़ा संशोधन करते हुए दो से चार दुकान तक के छोटे समूह एकल प्रणाली के तहत बनाकर शराब ठेके को रिनिवल, लाटरी व टेंडर के माध्यम से दुकान आवंटित होती रही।
भाजपा की मोहन सरकार ने 2025-26 आबकारी नीति के तहत संशोधन कर प्रदेश के करीब पांच जिले में एकल प्रणाली खत्म कर जिलेवार टेंडर के माध्यम से ठेके आवंटित किये गए। उन पांच जिलों में मुख्य रूप से गुजरात से सट्टे झाबुआ व आलीराजपुर जिले को दुकाने रिनीवल नहीं होने पर जिला स्तर पर ठेका दिया गया। जिसके तहत यहां एकल प्रणाली व्यवस्था खत्म कर दी गई यानीकी अब एक ही ठेकेदार यानी आतंक का पर्याय बने बने हुए है। साथ ही शासन को भी करोड़ों का चूना लगाने से बाज नहीं आकर अपना मोटा लाभ कमाने के बाद भी यह ठेकेदार आबकारी विभाग व सरकार को अपना नुकसान होने का रोना ही रोते नजर आते हैं।
आबकारी विभाग भी इन बड़े ठेकेदारों को वैध की आड़ में पूरी तरह से अवैध व्यापार करने का अनधिकृत रूप से छूट दे दी जाती है। वहीं छोटा ठेकेदार आबकारी विभाग को मासिक बंदी नहीं दे पाए तो ऐसे ठेकेदार आत्महत्या तक करने को मजबूर हो जाते हैं। जिसका एक उदाहरण हाल ही में देवास जिले में एक स्थानीय शराब व्यवसाय से जुड़े व्यक्ति दिनेश मकवाना ने चापडा, करनावद, डबलचैकी आदि स्थान की पांच शराब दुकाने करीब 14 करोड़ में वर्ष 2025-26 के लिये ली थी। कहते हैं कि, मरने वाला व्यक्ति अंतिम समय पर झूठ नहीं बोलता है। इसी कड़ी में छोटा शराब ठेकेदार दिनेश मकवाना ने आत्महत्या करने के पूर्व एक वीडियो बनाया, जिसमें वह शराब ठेकेदार व आबकारी विभाग की वास्तविकता को दर्शाया। और कहा की, प्रतिमाह, प्रति शराब दुकान डेढ़ लाख के हिसाब से देवास की जिला आबकारी सहायक आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित लेती थी। तथा प्रतिमाह पांच दुकानों के साढे 7 लाख रुपये के हिसाब से करीब 22 लाख रुपए वे दे चुका था। शराब दुकान पर सेल नहीं होने से नुकसानी के चलते जिला आबकारी अधिकारी को मासिक बन्दी नहीं देने व दिसंबर के बाद शराब दुकान पर ग्राहकी चलने के बाद बंदी देने की बात कहने के बाद भी मंदाकिनी नहीं मानी। और छोटे शराब ठेकेदार दिनेश मकवाना को परेशान करते हुए शराब दुकान हेतु इस्सु नहीं देने आदि परेशान करने की बात दिनेश मकवाना ने कहीं। और मंदाकिनी मैडम से परेशान होकर दिनेश मकवाना ने आत्महत्या कर ली।
खैर, उक्त मामले में मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेकर जिला आबकारी अधिकारी मंदाकिनी दीक्षित को बर्खास्त कर दिया। लेकिन बात यहां यह कि, क्या मोहन यादव द्वारा की गई उक्त बर्खास्तगी के बाद प्रदेश में जिला आबकारी के अधिकारियों ने रिश्वत लेना बंद कर दी होगी...? जवाब, बिल्कुल भी नहीं।
बात यह कि, अगर देवास जिले में जिला आबकारी अधिकारी प्रति दुकान डेढ़ लाख रुपए रिश्वत लेते थे। ऐसे में गुजरात सीमा से सट्टे झाबुआ जिला जो की आदिवासी बाहुल्य होकर यहां कई गुना शराब इस जिले में अधिक मात्रा में अवैध रूप से बिकती है। ऐसे में देवास की तुलना में झाबुआ जिले का आबकारी अधिकारी प्रति दुकान डेढ़ लाख से अधिक की बंदी लेता होगा इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। देखा जा सकता है कि, आलीराजपुर जिले में पदस्थ रहे आबकारी अधिकारी धर्मेंद्रसिंह भदोरिया के रिटायरमेंट होने के बाद जब इंदौर में उनके प्रतिष्ठानों पर लोकायुक्त ने दंबिश दी तो आय तो अधिक करोड़ों रुपए की संपत्ति सामने आई।
झाबुआ जिले की बात करें तो यहा 33 शराब दुकाने हैं और ज्यादा नही तो 2 लाख रुपए प्रति दुकान भी माने तो करीब 66 लाख रुपए सिर्फ जिला आबकारी अधिकारी को ही शराब ठेकेदार रिश्वत के रूप में देता होगा...? कि, गौरवक्ति की जाने लगी है। जिसके चलते जिले की शराब दुकानों पर अवैध व चार सौ बीसी वाली शराब भी लाई जा रही है। वहीं इन्हीं दुकानों से जिले के साथ गुजरात में भी इन दुकानों से शराब भरकर ढोई जा रही है। शराब ठेकेदार द्वारा किस तरह से झाबुआ जिले की कंपोजिट शराब दुकानों पर अवैध शराब संग्रहित कर रहा है और यह शराब आबकारी अधिकारी की निगरानी में होने के बाद भी यह शराब, दुकानों से अवैध बेची जा रही है। जिसका एक खुलासा आज हम इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के रूप में ठेकेदार की चार सौ बीसी व आबकारी विभाग की मिली भगत का खुलासा कर रहे हैं।
होलोग्राम व कार्टून देशी शराब कंपनी का लेकिन उसमें शराब दूसरी कंपनी की वह भी विदेशी शराब
शराब की बाटल के ढक्कन पर एक होलोग्राम लगा होता है। जिसका बहुत महत्व होता है लेकिन आम स्थिति में इस होलोग्राम के मायने कोई नहीं जानता है। होलोग्राम पर एक सीएल लिखा होता है सीएल (कंट्री लिकर) यानीकी भारत में बनी शराब या सस्ती सादी शराब होता है। उक्त सीएल लिखा होलोग्राम देशी मदिरा शराब की बोटलों पर अंकित रहता है। वही एक एफएल (फोरेन लिकर) लिखा होलोग्राम होता है यानी भारत से बाहर या मेड इन इंडिया विदेशी शराब की बाटल पर यह होलोग्राम रहता है।
माही की गूंज के सामने शराब ठेकेदार की चार सौ बीसी ऐसी सामने आई कि, रायल सिलेक्ट नाम की डीलक्स व्हिस्की विदेशी शराब है। जो की जेके लिकर्स प्रा.लि. पीथमपुर धार कंपनी की है। लेकिन उक्त विदेशी शराब की बोटलों पर सीएल लिखा हुआ होलोग्राम सादे ढक्कन पर चिपकाया हुआ है। वहीं उक्त विदेशी शराब की बाटल जेके लिकर्स प्रा. लि. कंपनी पीथमपुर की है। लेकिन उक्त विदेशी शराब ग्रेट गैलियन वैचर्स प्रा.लि. कंपनी सेजवाया घाटा बिल्लोद कम्पन्नी के कार्टून में भरी हुई है।
बता दे कि, ग्रेट गैलियम वैचर्स प्रा.लि. कम्पन्नी सेजवाया का टेंडर जिले में देशी शराब झाबुआ वेयरहाउस डिपो से सप्लाई करने का ठेका है। ऐसे में ग्रेट गैलियन वैचर्स प्रा.लि. कंपनी के कार्टून में भरी विदेशी रॉयल सिलेक्ट डीलक्स व्हिस्की बाटल पर सीएल यानीकी देशी शराब पर लगने वाला होलोग्राम चिपकी शराब की पेटीया शराब ठेकेदार, झाबुआ जिले की प्रत्येक 33 शराब दुकानों पर यह शराब लाकर खुल्लेआम शराब बेच रहा है। यहा तक कि, यह चार सौ बीसी वाली शराब गुजरात सीमा से लगी शराब दुकानों पर प्रतिदिन ट्रकों से खाली हो रही है और बिक रही है। लेकिन रिश्वत लेकर अवैध शराब बिकवाने वाला आबकारी विभाग पूरी तरह से अंधा बन गया है। और सरकार को करोड़ों का चूना लगाकर शराब ठेकेदार को बड़े रूप से लाभ पहुंचाया जा रहा है।
शराब की जानकारी रखने वाले हमारे सूत्र बताते हैं कि, विदेशी शराब राॅयल सिलेक्ट किसी और कंपनी की है। ऐसे में ग्रेट गैलियन वैचर्स प्रा.लि. कंपनी अपना देशी होलोग्राम लगाकर ठेकेदार को शराब अपने कंपनी के कार्टुन में पेकिंग कर नहीं दे सकता हैं। अगर ग्रेड गैलियन वैचर्स कंपनी द्वारा यह सप्लाई की जा रही है तो आबकारी विभाग आज दिनांक को ही शराब दुकानों पर जाकर इन शराब की पेटियो को जप्त कर कार्रवाई करे तो ग्रेट गैलियन का लाइसेंस व टेंडर निरस्त होकर बड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। वहीं ठेकेदार पर भी चार सौ बीसी का प्रकरण होकर लाइसेंस निरस्ती व बड़ी कार्रवाई हो सकती है। वहीं उक्त चार सौ बीसी से यह स्पष्ट होता है कि, यह शराब आबकारी ड्यूटी भरकर शराब ठेकेदार नहीं ला रहा होगा।
बताया जाता है कि, शराब ठेकेदार उक्त शराब कंपनियों व आबकारी विभाग की मिली भगत के चलते सीधे फैक्ट्री से बिना ड्यूटी की शराब जिस पर विदेशी व देशी दोनों टेग लगी शराब बेची जा रही है। जिसमें शराब किसी और कंपनी की तो होलोग्राम व शराब पेंकिग करने वाली खाली बोक्स (कार्टुन) किसी ओर कंपनी के, जो अवैध कारोबार के साथ सीधे रूप से सरकार को चूना लगाकर चार सौ बीसी का बड़ा कृत्य किया जा रहा है।
मामले में झाबुआ जिला आबकारी सहायक आयुक्त बसंती भूरिया से 7772073952 पर फोन लगाकर एक से अधिक बार जानकारी लेनी चाही लेकिन मैडम ने शायद ट्रू-कॉलर पर माही की गूंज देखकर फोन अटेंड नहीं किया और न ही समाचार लिखे जाने तक कोई रिप्लाई आया।
वही आबकारी इंस्पेक्टर विकास वर्मा से बात की तो कहा, मैं खवासा आपके पास आकर पूरी बात समझता हूं कि आखिर मसला क्या है।
माही की गूंज के उक्त खुलासे के बाद देखना है कि, आबकारी विभाग के अधिकारी उक्त मामले में त्वरित क्या कार्रवाई करती है। या फिर बिना कार्रवाई के साथ यह सिद्ध करती है कि, आबकारी विभाग के अधिकारी प्रतिमाह लाखों की रिश्वत लेकर शराब ठेकेदार को संरक्षण देकर सरकार को चूना लगा रही है...?
वही शराब ठेकेदार अपनी दुकानों में बड़ी मात्रा मे उक्त चार सौ बीसी शराब की हजारो पेटियो को इसी तरह से बेचता है या फिर दुकानो से खाली कर रवाना करता है। या फिर विदेशी शराब के लेबल को हटाकर देशी शराब का लेबल लगाकर उक्त अवैध शराब को वैध बनाने का प्रयास करता है...? यह 2026 में देखना दिलचस्प रहेगा।


रॉयल सिलेक्ट विदेशी शराब जेके लिकर्स कंपनी की बाटल पर सीएल का होलोग्राम व कार्टुन भी देशी शराब ठैकेदार को देशी शराब सप्लाई करने वाली कंपनी ग्रेट गैलियन कंपनी का।
विदेशी शराब पर यह एफएल वाला रहता है होलोग्राम।
