माही की गूंज, झाबुआ डेस्क।
संजय भटेवरा
किसी का समापन ही नए का आरंभ होता है यानि अंत ही आरंभ होता है, पतझड़ ही बसंत का आगमन होता है। 2025 का समापन ही 2026 की नई किरणों के स्वागत का मार्ग प्रशस्त करेगा। 2025 कुछ सुखद यादें दे गया तो कुछ दर्द भी दे गया। ऑपरेशन सिंदूर में सेना के पराक्रम से देश का हर नागरिक गर्व से अभीभूत था। वही अचानक हुए सीज फायर ने देश के नागरिकों को हतप्रभ कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई बार इस सीज फायर की क्रेडिट लेने की कोशिश की लेकिन भारत की प्रतिक्रिया संतुलित ही नजर आई। ड्रम्प टैरिफ की धमकी ने विश्व में सुर्खियॉ बटोरी। खेलों में भारतीयों का दबदबा कायम रहा। वहीं देश में भ्रष्टाचार के नित नए मामले सामने आते रहे।
मध्यप्रदेश के संदर्भ में देखे तो यहां की दो प्रमुख घटनाएं पूरे देश में चर्चित रही। पहली हाईवे पर हनीमून और दूसरी हनीमून पर हत्याकांड। मंदसौर जिले के एक भाजपा नेता का सड़क पर आपत्तिजनक वीडियो खूब वायरल हुआ। वही इंदौर के कारोबारी की शादी के बाद मेघालय में हनीमून के दौरान पत्नी द्वारा दर्दनाक हत्या किया जाना, पति-पत्नी के पवित्र रिश्तो को तार-तार करने वाली घटना में शामिल रहा। राजनीतिक रूप से मुख्यमंत्री द्वारा प्रत्येक सभा में आम जनता से जोरदार अभिनन्दन कराना और गुड़ की खेती संबंधी बयान चर्चित रहे। यही नहीं एक बीघा में 50 किं्वटल गेहूं उत्पादन और 30 किं्वटल सोयाबीन उत्पाद कराने संबंधी बयानो ने सुर्खिया बटोरी। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में जहरीले कफ सिरप से 25 से अधिक बच्चों की जान जाना। इंदौर के प्रतिष्ठित अस्पताल में चुहो द्वारा नवजात शिशुओं को कुतरे जाना और वर्ष के अंत में दूषित पानी पीने से आठ लोगों की मौत हो जाना सिस्टम की लापरवाही वर्ष की दुखद यादें बनकर रह गई। राजनीतिक रूप से मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने दो वर्ष का कार्यकाल पूर्ण किया और इन्वेस्टर्स मीट के माध्यम से लाखों करोड़ रुपए के निर्देश का दावा किया जा रहा है। आने वाले वर्ष में यह जमीन पर कितना उतर पाता है यह देखना दिलचस्प होगा। वही इस वर्ष पुलिस प्रशासन अपनी कार्यशैली के लिए चर्चित रहा। शराब ठेकेदार द्वारा आत्महत्या किया जाना और देश के उत्कृष्ट थाने का पुरस्कार प्राप्त करने वाले थाने में एक निर्दोष व्यक्ति को तस्करी मामले में उलझाने की घटना के बाद पुलिस चैकी और थानों की जमीनी हकीकत के बारे में आम चर्चा का विषय रहा।
वहीं अगर झाबुआ जिले के संदर्भ में बात करें तो यह वर्ष झाबुआ जिले के लिए प्रशासन की अराजकता व हठधर्मिता के कारण चर्चित रहा। यहां के प्रशासन के लिए मीठा-मीठा गट-गट व कड़वा थु-थु वाली स्थिति रही। लोकतंत्र के सजक प्रहरी मीडिया पर प्रशासन की दृष्टि टेडी ही रही। यहां प्रशासन ने मीडिया कर्मियों पर झुठे प्रकरण दर्ज कराने व असल आरोपियो को सरंक्षण देने में भी संकोच नहीं किया। जबकि मीडिया अपने कर्तव्य का पालन कर रहा था, यहां जीवित महिला को मृत बताने से भी पुलिस प्रशासन ने संकोच नहीं किया और जब महिला स्वयं सामने आई तो जॉच के नाम पर मामले को ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया। जिले में शराब माफिया की भी चांदी रही चाहे उनके विरूध कितना भी विरोध हुआ। पुलिस द्वारा सलमान लाला का फर्जी निवासी सर्च रिर्पोट पर पासर्पोट का मुदा भी सुर्खियो में रहा।
यही नहीं जब मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में भी पत्रकारों को नहीं जाने दिया गया तब पत्रकारों ने धरना दिया तो पुलिस ने सार्वजनिक रूप से पत्रकारों के इश्यु सामने लाने की बात कही। वहीं आधार कार्ड सेंटर की अनियमितता को उजागर करने पर फर्जी तरीके से पत्रकार के खिलाफ ही मामला दर्ज कर लिया गया। जबकि एसडीएम की जांच में यह तथ्य साबित हो चुका था कि, आधार कार्ड संचालक शासन द्वारा तय की गई राशि से अधिक राशि आम जनता से वसूल कर रहा था। लेकिन यहां पर जनता की जेब पर डाका डालने वाले आधार कार्ड संचालक के साथ मिलकर प्रशासन ने पत्रकार को ही आरोप बना दिया। यहां प्रशासन को जी हजूरी वाले पत्रकार चाहिए, जबकि जमीनी हकीकत सामने लाने वाले पत्रकारों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर प्रशासन तानाशाही करना चाहता है। इसी प्रकार पूरे वर्ष प्रशासन ने अपना रुतबा बनाए रखने के लिए पत्रकारों को डराने का असफल प्रयास किया। जिला कलेक्टर को देश में रामा जनपद से सम्मान दिलाने वाली योजनाओं में ही जब भ्रष्टाचार सामने लाया गया तो प्रशासन तिलमिला उठा। वही कलेक्ट्रोरेट में 2 अधिकारी को रिश्वत लेते लोकायुक्त टिम ने भी पकड़ा। जिले की प्रत्येक चैकी और थाने पर जनसेवा और देशभक्ति का स्लोगन लिखा हुए हैं। लेकिन पुलिस की कार्यप्रणाली न तो जन सेवा वाली है और न ही देशभक्ति वाली। बड़ी-बड़ी लुट की वारदातों को छोटी-मोटी चोरी दर्शाकर मामले को रफा-दफा करने का कार्य किया जाता है। यहां दिन-दहाड़े चोरी की घटनाएं हो रही है और पुलिस का काम आम जनता कर रही है और चोर को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर रही है। पूरे प्रदेश में खाद की किल्लत रही जिसके चलते किसानों ने चक्का जाम तक किया।
लेकिन प्रशासन का प्रयास यह रहा कि, खाद किल्लत के समाचार न छपने पाए ताकि प्रदेश में सरकार की किरकिरी न हो। इसके लिए पत्रकारों पर मुकदमे दर्ज कर लिए गए ताकि पत्रकार दहशत में रहे। जिले के एक प्रमुख कस्बे में खाद के लिए लाइन में लगी एक महिला चक्कर खाकर गिर गई। जिसका वीडियो पत्रकार ने नहीं, लाईन में लगे किसी व्यक्ति ने बना लिया। जिसके बाद जिले के पत्रकार ने वह खबर मोबाइल पर डाल दी जिसके चलते प्रशासन को अपनी किर-किरी होते दिखाई दी और तत्काल प्रशासन हरकत में आया और न केवल पत्रकार पर प्रकरण दर्ज कर लिया, बल्कि उस महिला व परिवार को भी इतना डरा दिया कि, वह कुछ बोलने की स्थिति में ही नहीं है। क्या यह भाजपा का सुशासन है...? जबकि भाजपा प्रतिवर्ष अटलजी की जयंती सुशासन के दिवस के रूप में मनाती है। पूरे वर्ष प्रशासन ने हर वह खबर दबाने का प्रयास किया जो उनके लिए नकारात्मक थी यानी मीठा-मीठा गट-गट और कड़वा थू-थू।
2026 की उम्मीदें... बितने वाला हर वर्ष कुछ सबक देकर जाता है लेकिन आने वाला हर वर्ष कुछ नई उम्मीदो के साथ ही आता है। माही की गूंज परिवार की ओर से नूतन वर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाओ के साथ पाठकों को यह विश्वास दिलाते हैं कि, अन्याय, अत्याचार व शोषण के खिलाफ हमारी कलम इसी प्रकार चलती रहेगी। क्योंकि यह कलम टूट सकती है लेकिन झूक नहीं सकती और न ही रुक सकती है।
2026 वर्ष सभी के लिए मंगल रहे ऐसी हमारी कामना है। साथ ही प्रशासन से भी यह अपेक्षा है कि, वे कलम को अपना दुश्मन न माने कलम निंदक हो सकती है, दुश्मन नहीं। कबीर दास जी ने भी दोहा लिखा है, निंदक नियारे राखिए... आंगन कुटी छवाय बिन पानी साबुन बिना निर्मल करें सुभाय।
प्रशासन अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाए और जनता के हितों को प्राथमिकता दें। सरकार की कार्यप्रणाली में जनहित प्रमुखता बनाएं और राजनेता अनावश्यक बयानबाजी के अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करें। प्रदेश में इन्वेस्टर्स मीट में जितने भी निवेश के प्रस्ताव मिले हैं। व तेजी से जमीन पर उतरे ताकी मध्य प्रदेश का सर्वांगिण विकास हो इन्हीं उम्मीदो के साथ 2026 की हार्दिकशुभकामनाएं.....
