दो माह पहले पास्को सहित गंभीर धाराओं में दो आरोपी भुगत रहे जेल की सजा
माही की गूंज , झाबुआ।
नाबालिक बेटियों के विवाह नहीं करने की सरकारी मुहिम कहीं न कहीं कमजोर होती दिख रही है, जहा इस प्रकार के गंभीर मामलों में पुलिस सुनवाई नहीं कर रही है। ताजा मामला रायपुरिया क्षेत्र की ग्राम पंचायत बावड़ी का है जहां एक परिवार द्वारा नाबालिक लड़की के विवाह करने की शिकायत पुलिस को की गई लेकिन पुलिस ने शिकायत लेने से भी इंकार कर दिया। शिकायतकर्ता ने सीएम हेल्पलाइन पर भी इसकी शिकायत की कोशिश की जहां से पुलिस को आवेदन देने की बात कहते हुए शिकायत दर्ज नहीं की गई।
शिकायतकर्ता नरसिंह पिता लुना मेड़ा ने बताया कि, उसके द्वारा उसके चौकी क्षेत्र सारंगी में आवेदन देकर नाबालिक लड़की के विवाह को रोकने की लिखित रिपोर्ट दी गई लेकिन मामला रायपुरिया थाना क्षेत्र का बताकर शिकायत दर्ज नहीं की और जब रायपुरिया थाना क्षेत्र में गुहार लगाई तो शिकायत एसडीएम को करने का कहकर रवाना कर दिया गया। मंगलवार को शिकायतकर्ता ने एसडीओपी पुलिस पेटलावद कार्यालय पर पहुंच कर शिकायत दर्ज करवाई है जहां से कार्यवाही का आश्वासन मिला है।
शिकायतकर्ता के पुत्र और भाई काट रहे है जेल
मामला कुछ यूं है कि, दो माह पूर्व शिकायतकर्ता के पुत्र पर बावड़ी पंचायत क्षेत्र की एक नाबालिक लड़की को भगाने का मामला रायपुरिया थाने में दर्ज हुआ था। पुलिस ने लड़की बरामद कर उसके बयान के आधार पर नरसिंह मेड़ा के लड़के ओर उसके भाई को सहयोगी मानते हुए पास्को एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया था और विगत दो माह से दोनों आरोपी जेल में बंद है।
अब नरसिंह मेड़ा का आरोप है कि, जो लड़की नाबालिक थी और पुलिस ने उसके लड़के ओर भाई पर मामला दर्ज किया था लड़की का परिवार उसी नाबालिक लड़की का विवाह कर रहा जो कानूनन रूप से अपराध है।
डाक द्वारा अधिकारियों को भी भेजी शिकायत
शिकायतकर्ता नरसिंह मेड़ा ने बताया कि, मामले की शिकायत कलेक्टर झाबुआ, महिला बाल विकास विभाग झाबुआ और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पेटलावद को डाक द्वारा दिनांक 26.12.2025 आवेदन भेज कर की थी और प्रमाण के रूप विवाह की पत्रिका भी भेजी थी, लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही की जानकारी नहीं मिली। पूरा मामला आपसी विवाद से जुड़ा है जिसके चलते मामला प्रशासन तक पहुंचा है। इस प्रकार के मामलो में सरकार ओर प्रशासन दोनों ही सख्त है लेकिन आपसी विवाद से जुड़े मामले के चलते सारंगी और रायपुरिया पुलिस से शायद ज्यादा रुचि नहीं दिखाई।
