माही की गूंज, झाबुआ डेस्क।
संजय भटेवरा
लगभग दो माह पूर्व छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से लगभग 25 मासूमो की मौत से पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया था। जांच में कई अनियमितताएं सामने आई थी जिसके बाद मध्यप्रदेश के लोगों को लगा था कि, अब ये जानलेवा धंधा बंद हो जाएगा। लेकिन बावजूद इसके मध्यप्रदेश में अमानक दवाओ को बनाने का सिलसिला बदस्तुर जारी है। और जाहिर है कि, ये दवाई बन रही है तो बिक भी रही होगी और बिक रही है तो लोग इसका सेवन भी कर रहे होंगे। यानी एक और बड़ी दुर्घटना को न्योता दिया जा रहा है। कंपनियां अपने मुनाफे और डॉक्टर अपने कमीशन के लिए मरीजों की जान तक से खिलवाड़ करने से नहीं चूक रहे हैं। सिर्फ नवंबर में ही मध्यप्रदेश में बनी दवाओ के 19 सैंपल अमानक साबित हुए हैं।
अमानक पाए जाने वाले में कफ सिरप, गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन में काम आने वाले इंजेक्शन, डिप्रेशन, माइग्रेन और हाइपरटेंशन की गोलियां पेट की बीमारियों से जुड़े ओरल सस्पेंशन, गर्भस्थ शिशुओं के लिए उपयोगी टैबलेट से लेकर प्लाज्मा बढ़ाने वाले आई प्लूड भी शामिल है।
छिंदवाड़ा कांड के बाद केंद्र और राज्यों की टीम लगातार निरीक्षण कर रही है और लापरवाही बरतने वाली कंपनियों पर कार्रवाई कर रही है। उसके बावजूद इन अमानक दवाओ को बनाने का सिलसिला जारी है। सरकार का दावा है कि, अब ये अमानक दवाई बाजारों में नहीं आएगी। वहीं देश भर में हर माह अमानक दवाओ के कई सेंपल मिल रहे हैं। जनवरी से अगस्त आठ माह में मध्य प्रदेश में 76 दवाई अमानक पाई गई। वहीं नवंबर में देशभर में 205 सैंपल अमानक पाए गए जिसमें 19 मध्यप्रदेश के शामिल है। इतनी बड़ी संख्या में अमानक पाए जाने वाले सैंपल से आम जनता का अब दवाओ पर से भी भरोसा उठ रहा है। आम लोगों का कहना है, बाजारों में मिलने वाली छोटी से छोटी व बड़ी से बड़ी हर प्रकार की दवाईयों की उचित जांच के पश्चात ही बाजार में बिक्री के लिए अनुमति मिलना चाहिए। क्योंकि ये मरीज की जान का सवाल है इस पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
