माही की गूंज, झाबुआ डेस्क।
संजय भटेवरा
हर बात के लिए आम जनता से जोरदार अभिनंदन कराने वाले मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव अपने मंत्रिमंडल के मंत्रियों पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं। जिससे मंत्रियों के विवादित बयान लगातार सामने आते रहे हैं। हाल ही में प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों में से एक कु. विजय शाह ने अपने बयान से एक बार फिर अपनी ही सरकार को बैकफुट पर ला खड़ा किया है। तथा आम जनता को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि, सरकारी योजनाएं आम जनता के लिए शासन का कर्तव्य है या राजनीतिक सौदेबाजी का माध्यम...?
क्या है पूरा मामला
मध्य प्रदेश सरकार के जनजातीय कल्याण मंत्री जो की रतलाम व झाबुआ जिले के प्रभारी मंत्री भी है ने डॉक्टर मोहन यादव सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में सरकारी योजनाओं की समीक्षा के लिए आयोजित जिला विकास सलाहकार बोर्ड की बैठक रतलाम में ली। जहा मंत्री शाह ने कहा कि, अगर सरकार, लाडली बहनों को करोड़ों रुपए दे रही है तो उन्हें मुख्यमंत्री का सम्मान करने आना चाहिए, जो सम्मान करने नहीं आएगी उनकी जांच करा देंगे। उक्त बयान के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई और मामले की गंभीरता को समझते हुए प्रभारी मंत्री ने तत्काल स्पष्टीकरण जारी करके कहा कि, उनके बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया है। अपात्र बहनों की जांच कराने की बात मैने अनोपचारिक बैठक में कही थी। मुझे जानकारी मिली थी कि, यहां अपात्र बहनों को लाडली बहना योजना का लाभ मिल रहा है।
अगर मंत्री जी यह कहना चाहते हैं कि, अपात्र बहनों को योजना का लाभ मिल रहा है तो यह गलती किसकी है...? लाडली बहना योजना, भाजपा शासन में ही शुरू की गई थी और योजना का रजिस्ट्रेशन भी भाजपा सरकार में ही किया गया था। चुनाव के ठीक पहले शुरू की गई इस योजना को गेम चेंजर योजना बनाया गया था और परिणाम भी ठीक वैसे ही आए और भाजपा को बंपर जीत मिली। तब जांच की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि वोट चाहिए थे लेकिन अब जांच की आवश्यकता क्यों...?
पहले भी कई बार अपने बयानों से अपनी ही पार्टी को असहज महसूस करा चुके विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर में सेना के पराक्रम की ब्रीफिगं करने वाली सैन्य अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करके विवाद में आए थे और इस टिप्पणी पर पूरे देश में काफी विरोध हुआ था। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर के निर्देश दिए थे और एफआईआर दर्ज होने के बाद उसके विरोध में शाह सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार, एसआईटी से मामले की जांच कर रही थी जो कि, अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। इससे पूर्व में भी तात्कालिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान को लेकर भी उन्होंने अशोभनीय टिप्पणी की थी जिसके बाद एक बार उनसे इस्तीफा भी लिया गया था। वही कर्नल सोफिया पर टिप्पणी के बाद शीर्ष नेतृत्व ने अनावश्यक बयानबाजी न करने तथा विवादों से दूर रहने की सलाह भी दी थी लेकिन इसके बावजूद मंत्रियों की बयान बाजी जारी है। यही से शाह को सार्वजनिक रूप से खेद जताने के निर्देश दिए गए थे लेकिन उन्होंने खेद भी हंसते हुए जताया था।
क्या सरकारी योजनाएं राजनीतिक सौदेबाजी के लिए है...?
लोकतंत्र में सरकारी योजनाओं का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम तबके तक सरकार की योजनाओ का लाभ पहुंचाना है और शासन अगर यह करती है तो यह उसका कर्तव्य है। जनता द्वारा उन्हें चुना भी इसीलिए जाता है कि, वे आम जनता की सेवा करें लेकिन अगर जनता की सेवा के बदले सम्मान की आशा रखने की भावना को सेवा नहीं कहा जा सकता है। वह सेवा नहीं सौदेबाजी कहलाती है और राजनीतिक दलों में आपस में सौदेबाजी हो सकती है लेकिन सरकार व आम जनता के बीच सौदे बाज़ी संभव नहीं है।
प्रदेश के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव अपनी सभाओ में हर बात के लिए आम जनता से दोनों हाथ उठाकर जोरदार अभिनंदन... कराने का आह्वान करते हैं लेकिन उनके ही मंत्री उनका सम्मान करने के लिए सौदेबाजी पर उतर आएंगे... ऐसा उन्होंने नहीं सोचा होगा।
कांग्रेस सहित पूरे विपक्षी दलों ने मंत्री शाह के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की है। वही आम लाडली बहनों ने मंत्री के इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि, सम्मान मांगने वाली चीज नहीं है और अगर कोई अच्छा कार्य कर रहा है तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए। सम्मान स्वतः मिलने वाला होता है यह मांगने पर नहीं मिलता है।
