प्रधानमंत्री आवास योजना के नए हितग्राहियों के लिए जांच के नाम जनपद पंचायत में खेला जा रहा है खेल
माही की गूंज, पेटलावद।
विकास खंड की जनपद पंचायत पेटलावद एक बार फिर सुर्खियों में है। यहां प्रधानमंत्री आवास योजना के नए हितग्राहियों के लिए जांच के नाम पर बड़ा खेल खेला जा रहा है। भोपाल से जमीन स्तर पर काम करने के लिए आदेश जारी होते है पर वो आदेश जमीन पर आते-आते बदल कर स्थानीय अधिकारियों की मनमानी की भेट चढ़ चढ़ रहे है। प्रधानमंत्री आवास को लेकर जारी आदेशों का बड़ा खुलासा इस खबर से कर रहे है, जिससे पता लगेगा कि, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर परिवार को पक्के मकान के सपने को जमीनी अधिकारी कैसे पलीता लगा रहे है। जिसके चलते फर्जी ओर ऐसे लोगों को योजना का लाभ मिल रहा है जो योजना के लिए पात्र नहीं है और पात्र हितग्राही कार्यालयों के चक्कर लगाने पर मजबूर है। विगत दिनों पेटलावद विकास खंड की ग्राम पंचायत तारखेड़ी से प्रधामनंत्री आवास योजना के लाभ दिलाने के नाम पर वसूली और अपात्र लोगो को लाभ देने का मामला भी सामने आया था।
प्रधानमंत्री आवास के नवीन हितग्राहियों की जांच कर पोर्टल पर करना था अपलोड
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत, आवास पल्स की सूची में स्थाई प्रतिक्षा सूची में पात्र हितग्राहियों के नाम जोड़ने हेतु सर्वे प्रारंभ करने के संबध में आदेश जारी हुआ। जिसमें विकास आयुक्त कार्यालय भोपाल से 11 जनवरी 2025 को आदेश पूरे मध्यप्रदेश के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को आदेश जारी हुए। एक आदेश पुनः इसी कार्यालय से 24 फरवरी 2025 को जारी किया गया जिसमे आवास योजना में चेकर (विशेष जांच टीम) बनाने के निर्देश जारी किए गए। जिसमें प्रति 5 से 12 पंचायतों की जांच इस टीम को करना था। टीम में अतिरिक्त विकास विस्तार अधिकारी (ADEO), पंचायत समन्वयक अधिकारी (PCO), उपयंत्री और आंगनवाड़ी सुपर वाइजर को लेना था, जो शासन के दिए आवास हितग्राहियों के लिए जारी दस बिंदुओ के दिशा निर्देशों के पालन अनुसार जांच कर रिपोर्ट देना थी।
आदेशों की उड़ी धज्जियां, समय पर नहीं हुआ काम
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले में आवास बीसी अंकित पांचाल और पेटलावद जनपद में पदस्थ आवास ऑपरेटर नानूराम जामले द्वारा भोपाल से जारी आदेशों को दबा कर रखा गया। जिसके कारण आवास योजना के नए हितग्राहियों की जांच समय पर नहीं हो पाई। इस संदर्भ में विकास आयुक्त कार्यालय भोपाल से 28 अक्टूबर 2025 को प्रदेश भर के बकाया प्रकरणों की पुष्टि के लिए एक पत्र जारी किया गया। जिसके बाद जनपद पंचायत पेटलावद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की ओर 29 अक्टूबर 2025 को आदेश जारी कर जनपद स्तर पर अलग-अलग पंचायतों के लिए जांच अधिकारी को तैयार कर सूची जारी कर दी गई ओर उक्त सूची के माध्यम से बताने का प्रयास किया कि जांच कार्य जारी था। लेकिन जनपद स्तर पर इसमें भी खेल हो गया ओर जांच के नाम पर लीपापोती शुरू हो गई।
रोजगार सहायको को नियम विरुद्ध दी जांच की जिम्मेदारी
मुख्य कार्यपालन अधिकारी पेटलावद के आदेश के बाद देर से ही सही पर जमीन स्तर पर काम शुरू हुआ लेकिन भोपाल स्तर से जारी आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए जनपद सीईओ ने नया आदेश जारी कर दिया जो भोपाल से जारी आदेश के नियमो के विरुद्ध है। जनपद सीईओ द्वारा 10 दिसम्बर 2025 को भोपाल के आदेश का हवाला देते हुए नया आदेश जारी करते हुए आवास पल्स पोर्टल से जोड़े गए नवीन परिवारों का सत्यापन हेतु सभी 77 पंचायतों में उसी पंचायत के रोजगार सहायको को जांच की जिम्मेदारी दे दी गई। जो कि नए आवास के लिए जियो टैग का कार्य ग्राम पंचायत सचिव ओर रोजगार सहायको द्वारा ही किया गया है। जिसमें बड़े स्तर पर मनमानी कर अपात्रों को भी सूची में शामिल कर जियो टैग किया गया था और उसी की जांच शासन के दस बिंदुओं के दिशा निर्देशों के आधार पर जांच करनी थी लेकिन पूरे मामले में स्थानीय जवाबदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है और इसमें निर्धारित लेन-देन की बाते भी सामने आ रही है...! यहां तक बताया जा रहा है कि पेटलावद विकास खंड अब अब फिर इस योजना में अपनी मनमानी के रूप में बड़ी सुर्खिया बटोरेगा...!
काम जल्दी पूरा करने के लिए यह किया
झाबुआ में पदस्थ प्रधानमंत्री आवास के बीसी अंकित पांचाल से इस संबध में चर्चा की तो उन्होंने बताया कि, भोपाल के जारी आदेश में जिन लोगो से जांच करवानी थी तथा उसके साथ आदि भी भी लिखा हुआ है यानी किसी अन्य से भी जांच करवाई जा सकती है जिसके तहत उपलब्ध व्यक्ति अनुसार रोजगार सहायकों को जांच हेतु लिया गया। समय पर कार्य नहीं होने के चलते जांच के लिए रोजगार सहायकों को आदेशित किया गया है।
जब उनसे जनवरी माह में जारी आदेश के अनुसार कार्य नहीं होने की जानकारी ली गई। तो उन्होंने कहा कि जिस एप में जानकारी अपलोड करना थी वो काम नहीं कर रहा था जिसके कारण देरी हुई।
वही दूसरी ओर सूत्रों के अनुसार भोपाल से जारी आदेश के बाद चेकर टीम बना कर उनके आईडी बना कर पासवर्ड जारी करने थे जो कि नहीं किया गया। अन्य विकास खंडों पर पांचाल साहब इसी प्रकार से कार्य होने की जानकारी दे रहे है। पूरे मामले में ये साफ है कि, केंद्र सरकार की महत्वकांशी योजना के लिए प्रदेश स्तर पर हुई अच्छी पहल कही न कही लापरवाही की भेट चढ़ती हुई दिखाई दे रही है।
जनपद स्तर पर आदेश जारी करने वाले सीईओ गौरव जैन से चर्चा करने का प्रयास किया तो उन्होंने वीसी में व्यस्त होने का हवाला देकर कोई चर्चा नहीं की।




