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दरगाह के प्रति आस्था ऐसी की हजारो लोग पहुंचते ही मन्नत लेकर
05, Jul 2024 2 years ago

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गांव में नही है एक भी मुस्लिम घर, ग्रामीण मिलकर करते है रखरखाव

माही की गूंज, उज्जैन।

           शहर से 25 किमी दूर चंद्रावतीगंज के पास एक गांव है मुंडला सुलेमान। यहां एक दरगाह है, किसी को पता नहीं कि यह दरगाह किसकी है, लेकिन गांव के लोगों की इसके प्रति अगाध आस्था है। लोगों का मानना है कि यहां फरियाद करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है।

आषाढ़ की अमास्या पर लगता है मेला

             आषाढ़ की अमावस्या पर यहां हजारों लोग पहुंचते हैं। साल में एक बार आषाढ़ की अमावस्या पर यहां हजारों लोग पहुंचते हैं और घर के बाहर बनाया हुआ चूरमा दरगाह पर चढ़ाते हैं। शुक्रवार को यहां मेला लगा और गांव की आबादी से कई गुना ज्यादा लोग यहां मनोकामना लेकर पहुंचे। लोग इसे पीरबाबा की दरगाह कहते हैं। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि वे बचपन से इसे देखते आ रहे हैं। दरगाह पर चूरमा चढ़ाने की परंपरा वर्षों से है। माना जाता है कि मनोकामना पूर्ण होती है।

एक भी घर मुस्लिम का नहीं

           खास बात है कि गांव में एक भी मुस्लिम का घर नहीं है। दरगाह का रखरखाव और पूजन आदि गांव ग्रामवासी ही मिलकर करते हैं। वर्ष में एक बार यह अनूठा आयोजन वर्षों से होता आ रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को ग्राम स्थित श्रीराम मंदिर और हनुमान मंदिर से गाजे-बाजे के साथ चल समारोह निकला। समापन पीरबाबा की दरगाह पर हुआ और चादर चढ़ाने के बाद चूरमे का भोग लगाया।

हर घर में मेहमान

          अन्य जिलों के लोगों की भी आस्था है। हजारों लोग इस आयोजन में सम्मिलित होते हैं। गांव में करीब 125 घर और आबादी 500 से 700 है। शुक्रवार को हर घर में मेहमान थे। इनके भोजन की व्यवस्था भी संबंधितों-रिश्तेदारों और मित्रों के वहां थी। अनूठे आयोजन में 10 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। दिनभर मेले सा आलम था और दरगाह पर पूजन के साथ मन्नत का दौर चलता रहा।



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