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माफियाओं से निपटना बड़ी चुनौती होगी नई सरकार के लिए...
30, Nov 2023 2 years ago

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माही की गूंज, संजय भटेवरा।

    झाबुआ। मध्य प्रदेश शांति का टापू है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां माफियाओं की संख्या में अप्रत्याशित इजाफा हुआ है चाहे वह रेत माफिया हो, शराब माफिया हो, भू माफिया हो, खनन माफिया हो या फिर खनिज माफिया। यह भी तय है कि, इन माफियाओं का इजाफा इनके होसले बुलन्द प्रशासनिक नुमानिन्दो व राजनितिक नेताओं तथा जनप्रतिनिधिओं के सरंक्षण के साथ ही हुए है और अब इनके हौसले इतने बुलंद है कि, वे प्रशासन के खिलाफ भी मोर्चा खोल  देते हैं। यही नहीं इन बैलगाम माफियाओं के होसले इतने बुलन्द हो गये है कि मौका आने पर वे बेरहमी  से पेश आकर किसी की जान तक ले लेते हंै।

    हाल ही में शहडोल जिले के ब्यौहरी में रेत माफियाओं द्वारा पटवारी प्रसन्न सिंह की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी। जिसके बाद फिर प्रदेश में कानून व्यवस्था के नाम पर माफिया राज होने की बात सामने आई है।

    जब मामला हत्या जैसे जघन्य अपराध से जुड़ा हो वो भी सरकारी कर्मचारी का ता,े सरकार पर उंगली उठना स्वाभाविक ही है। पटवारी प्रसन्न सिंह बघेल आर्मी में साढ़े 16 वर्ष  नौकरी करने के बाद रिटायर्ड हुए तथा पिछले कुछ दिनों से लगातार राजस्व टीम के साथ वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में रेत माफियाओ के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे। ऐसे में रेत माफियाओं ने बड़ी बेरहमी से उनका सर ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी। मध्य प्रदेश में इस तरह हत्या का यह पहला मामला नहीं है इसके पूर्व भी 2015 में मुरैना के कांस्टेबल धर्मेंद्र चैहान, 2016 में ग्वालियर के बानमोर में फॉरेस्ट गार्ड नरेंद्र शर्मा हत्या तथा 2018 में छतरपुर के बिजावर में अभिषेक तोमर को अवैध खनन के खिलाफ कार्यवाही में ,ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास किया जा चुका है आदि ऐसे कई मामले मध्य प्रदेश में हो चुके है।

    यह कहानी है रेत माफियाओं की जिन्होंने ईमानदारी से कार्य करते हुए सरकारी कर्मचारियों को मौत के घाट उतार दिया। इसके अलावा भी प्रदेश में कई तरह के माफिया सक्रिय है जिससे आम जनता खासी परेशान है लेकिन इन माफियाओं की दादागिरी के चलते अपनी पर बीत रही हकीकत को बयां नहीं कर सकते। प्रदेश की भांति ही आदिवासी बाहुल्य इस जिले में अवैध शराब माफियाओं, भू-माफियाओं और खनन माफियाओ का आतंक है जिससे सभी परेशान तो है लेकिन सख्त कार्यवाही करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं।  प्रदेश को माफिया मुक्त हेतु  नई सरकार को इन माफियाओं से निपटना एक बड़ी चुनौती साबित होगा।



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