Sunday, 01 ,November 2026
RNI No. MPHIN/2018/76422
: mahikigunj@gmail.com
Contact Info

HeadLines

क्रेन की टक्कर से दो बैंक मैनेजरों की मौत | वायरल फीवर का प्रकोप, हाथ-पैर व जोड़ों के दर्द से परेशान ग्रामीण | सड़क हादसे के बाद व्यवस्था पर उठे सवाल, डेढ़ घंटे तक नहीं पहुंची 108 एंबुलेंस और पुलिस बल | भैस को लेकर पानी पिलाने गया पुत्र का दूसरे दिन तालाब के किनारे मिला शव | निर्मला भूरिया की मौजूदगी में खेड़ा-गलती बैराज की शुरुआत, सवाल भूमिपूजन के बाद निर्माण की रफ्तार क्या होगी? | बड़े धूमधाम से मनाई जा रही है नवरात्रि | होनहार छात्र की मौत से गांव में शोक की लहर | असुविधाओं और वसूली के लिए बदनाम हो चुका हॉस्पिटल, निजी हॉस्पिटलो की पो बारह | जिले में गौ-हत्या का कारण क्षेत्रवासियों का खुला और मौन समर्थन या स्वीकृति तो नहीं...? | चार साल पहले उप स्वास्थ्य केंद्र का मरम्मत कार्य अपनी बदहाली के आसु बहा रहा भवन | 12 लाख से अधिक की लागत से बना शासकीय उचित मूल्य दुकान का गोदाम अब भी अधूरा | क्या झाबुआ जिले की जनता तीसरे विकल्प की तलाश में है...? | 482 छात्राओं की नेत्र जांच, 16 बेटियों की शिक्षा का जिम्मा | मेंटेनेंस के नाम पर लंबी बिजली कटौती से ग्रामीण परेशान | सेवा सकल्प अभियान के तहत आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम सम्पन्न | जर्जर भवन में संचालित हो रही ग्राम पंचायत | गांधी जयंती पर विशेष ग्राम सभा सम्पन्न | गांधी जयंती पर चला वृहद स्वच्छता अभियान | विधायक, ग्रामीणों के साथ कलेक्टर से मिलीं | खुला पड़ा गड्ढा दुर्घटना को दे रहा आमंत्रण |

भीलराजा राणा पूंजा भील की जयंती मनाई गई
05, Oct 2023 3 years ago

image

माही की गूंज, बामनिया।

          जय आदिवासी युवाशक्ति संगठन के कार्यकर्ताओं ने 5 अक्टूबर भीलराजा राणा पूँजाभील कि जयंती पर नगर के रतलाम रोड़ स्थित सर्कल पर स्थापित राजा पूँजा भील की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर जयंती मनाई गई। भील सरदार राणा पूँजा भील मेवाड़ राज्य के भौमट क्षैत्र के पानरवा ठिकाने के शासक थे। उन्होंने वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप को जीवन पर्यंत अपना अविस्मरणीय सहयोग दिया। मुगल शासक अकबर के सेनापति आमेर के राजा मानसिंह कछवाहा को हल्दी घाटी के युद्ध में विजयी होने के उपरांत, देबारी के जंगल में राणा पूँजा भील की सैना का सामना करना पड़ा था। जिसमें मुगल सेनापति मानसिंह की विजयी सैना को हथियार ओर रसद सहित भील योद्धाओं ने लुट लिया था, अर्थात हरा दिया था। इसके पिछे भीलराजा राणा पूंजा भील के अदम्य साहस ओर उनके भील सैनिकों कि छापामार-गुरिल्ला युद्धनीति कारण रही थी। हल्दीघाटी युद्ध के उपरांत महाराणा प्रताप कि माताश्री राजमाता जयवंताबाई ने राजा पूँजा भील को अपना दुसरा बेटा कहा था ओर मेवाड़ के राजचिह्न पर भील सरदार राजा पूँजाभील को वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप के साथ संयुक्त स्थान दिया था। जो कि आज भी मेवाड़ के राजचिह्न में मौजूद है। हल्दी घाटी युद्ध के उपरांत मेवाड़ की नवीन राजधानी गिर्वा के पहाड़ों में चावंड के रूप में बनाई गई। इसी नवीन राजधानी से भील सरदार पूँजाभील के सैनिक सहयोग से मेवाड़ राज्य का शासन महाराणा प्रताप ने संचालित किया ओर हल्दीघाटी युद्ध में मेवाड़ के हारे हुऐ अधिकांश भू-भाग को पुनः अपने अधिकार में ले लिया। भीलराजा पूंजा भील ने, महाराणा प्रताप को चौबीस वर्षों तक सतत् अपना सैनिक सहयोग दिया। इस प्रकार भीलराजा पूँजा भील का अविस्मरणीय गौरवशाली व्यक्तित्व जनमानस के लिए प्रैरणापुँज है। जिसमें उपस्थित जयस जिला प्रभारी कांतिलाल गरवाल, जयस उपाध्यक्ष कपिल डामोर, बीएपी प्रभारी धनराज भाभर, शैतान वसुनिया, संतोष निनामा गुमान ताड़ मांगीलाल मैड़ा आदि कार्यकर्त्ता उपस्थित थे।



माही की गूंज समाचार पत्र एवं न्यूज़ पोर्टल की एजेंसी, समाचार व विज्ञापन के लिए संपर्क करे... मो. 9589882798 |