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विधानसभा सभा चुनाव पास में आते बढ़ रहा चुनावी पारा, पार्टी में एक-दूसरे को कमजोर करने के लिए अपनाए जा रहे नए-नए हथकंडे
Report By: राकेश गेहलोत 12, Aug 2023 2 years ago

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अजजा मोर्चा के जिलाध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर किया विधानसभा से दावेदारी का दावा, अफवाहों को दिया विराम

माही की गूंज, पेटलावद। 

         विधानसभा चुनाव भले ही विपक्षी के विरुद्ध लड़ा जाता है, लेकिन वर्तमान में टिकिट की दावेदारी के लिये राजनीतिक दलों में मारामारी चल रही है। नए संगठन हो या राष्ट्रीय पार्टियां हर तरफ एक जुट होकर चुनाव लड़ने के दावे है लेकिन धरातल पर टिकिट की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा साफ देखी जा रही है। टिकिट के दावेदार किसी न किसी तरह से अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को कमजोर करने के लिए उनके विरुद्ध दुष्प्रचार और कमजोर बताने की कोशिश कर अपना दावा पुख्ता करने की कोशिश कर रहे है। त्र

अजजा मोर्चा के जिलाध्यक्ष अजमेर भूरिया के विरुद्ध माहौल बिगाड़ने का प्रयास

          पेटलावद विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 195 से इस बार मजबूत दावेदारो में एक अजजा मोर्चा के जिलाध्यक्ष अजमेर सिंह भूरिया के विरुद्ध योजनाबद्ध तरीके से उन्हें टिकिट की दौड़ से बहार बताने और मुख्य दावेदारों से सुलह समझौते का दुष्प्रचार कर पार्टी में दावेवरी कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। लगातार विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय अजमेर भूरिया को इसकी जानकारी उनके सर्मथकों द्वारा दी गई कि, आपका इस नेता से समझौता हो गया है। ऐसा बोल रहे है, लगातार अलग-अलग क्षेत्रो से आ रही ऐसी जानकारी के बाद अजमेर भूरिया के कान खड़े कर दिए कि, उनके विरुद्ध पार्टी में षड्यंत्र कर उनको कमजोर किया जा रहा है और अब तक मौन प्रचार में लगे अजमेर ने सोशल मीडिया पर खुलकर पोस्ट कर क्षेत्र में उनको लेकर चल रही अफवाहों पर विराम लगा दिया।

फेसबुक पोस्ट कर विधानसभा में उतरने का किया दावा

         क्षेत्र में चल रही अफवाहों से परेशान अजजा मोर्चे के जिलाध्यक्ष का सब्र आखिर टुटा ओर उन्होंने सोशल साइड फेशबुक का सहारा लेते हुए एक पोस्ट के माध्यम से विधानसभा में उतरने को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से इशारा दे दिया। पोस्ट में अजमेर भूरिया ने लिखा कि, मेरे बारे में झूठी अपवाह फैलाई जा रही है कि, मेरा किसी से समझौता हो गया है यह सरासर झूठ है और इस अफवाह में कोई कर्तकर्ता ना आये और मुझे पार्टी पर पूरा भरोसा है। पेटलावद विधानसभा के सभी मित्रो को जय श्री राम इस पोस्ट के बाद भाजपा के स्थानीय संगठन में चर्चा का दौर शुरू हो गया और टिकिट के लिए अजमेर की और से आशस्वत कई दावेदारों को झटका लगा, जिनकी रणनीति और चालाकी धरी रह गई। इस संबंध में अजमेर भूरिया से जब चर्चा की तो उन्होंने साफ कहा कि, इस बारे में जनता ओर कार्यकर्ता का मत युवा और नए उम्मीदवार की और से जिससे बौखला कर कुछ राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी ओर उनके चालाक समर्थन मेरे विरूद्ध दुष्प्रचार का सहारा लेकर मुझे कमजोर करने का असफल प्रयास कर रहे है। भाजपा किसको टिकिट देती है उससे मुझे मतलब नही, लेकिन टिकट मांगने का अधिकार सब को है ।

कावड़ यात्रा के जरिये शक्ति प्रदर्शन की तैयारी

         विगत दिनों पेटलावद के जनपद अध्यक्ष रमेश सोलंकी के नेतृत्व में निकली कावड़ यात्रा के बाद अब अजमेर भूरिया मित्र मंडल के नेतृत्व में वर्षो से निकाली जा रही रायपुरिया से तारखेड़ी की कावड़ यात्रा की चर्चा शुरू हो गई है। चर्चा है कि, चुनाव को देखते हुए इस बार कावड़ यात्रा को बड़ा रूप दिया जा सकता है। कई नेता इस कावड़ यात्रा से दूरी बनाते है लेकिन इस बार अपनी उपस्थिति के लिए पहले से पहुचकर श्रेय लेने का प्रयास करेंगे।

दूसरे दलों में भी यही हाल

          टिकिट की मारामारी को लेकर दूसरे दलों में भी यही हालत है। टिकिट के मुख्य दावेदारों द्वारा अन्य दावेदारों पर समझौता होने और अंतिम समय फार्म खींचने की चर्चा की जा रही है। सबसे अधिक माहौल जयस संगठन को लेकर बना हुआ है एक अनार सो बीमार वाली स्थिति है और अलग-अलग संगठन से अलग-अलग दावे किए जा रहे है। कई जयस कार्यकर्ता कांग्रेस से उतरने के दावों के साथ कांग्रेस के मुख्य नेताओं की टिकिट कटने की बात कर रहे है, तो दूसरी ओर कांग्रेस के नेता जयस के समर्थन के साथ मैदान में उतरने के दावे कर जयस के दावेदारों को कमजोर करने का प्रयास कर रहे है।

पहली बार त्रिकोणी मुकाबले की स्थिति बनी

        पेटलावद विधानसभा की राजनीति परिस्थितियों के अनुसार दोनों मुख्य दल भाजपा और कांग्रेस रहे है और विगत 6 चुनाव मतलब 25 से 30 वर्षो से दोनों दल एक-दो चेहरों के इर्द गिर्द ही रह।े टिकिट लगभग तय माने जाते रहे है लेकिन 2023 के अंत मे होने वाले चुनाव में न केवल राष्ट्रीय दलों के दावेदारों को टिकिट के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। वही कई दावेदारों की तैयारियों ने इस बार चुनाव को त्रिकोणी मुकाबले की स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। चुनाव मैदान में अंतिम समय मे खड़े रहने वाले प्रत्याशियों के नाम मुकाबले की स्थिति साफ करेगे। ये तय है इस बार का चुनाव भाजपा और कांग्रेस के लिए न आसान है न ही सीधा मुकाबला की स्थिति रहेगी।



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