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भटकता विद्यार्थी जीवनः स्कूलों में काउंसलिंग की आवश्यकता
22, Dec 2022 3 years ago

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क्या जन्म देने वाले माता-पिता का अपने बच्चों पर अधिकार नहीं...?

माही की गूंज, खवासा।

        माही की गूंज ने एक चिंतन के साथ ‘‘मोबाइल से भटकता विद्यार्थी जीवन’’ शीर्षक के साथ 17 नवंबर के अंक में समाचार प्रकाशित किया था।

         आज के समय में यह मोबाइल जितना सुविधाजनक है उतना ही दुष्परिणाम ही ला रहा है। वही विद्यार्थी कम उम्र में ही भटक रहे हैं और अपने परिवार की प्रतिष्ठा के साथ स्वयं का भविष्य भी दलदल में ले जा रहे हैं। जन्म देने वाले माता-पिता की कही बातों को भी कम उम्र में यह बच्चे नकारने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। यहां यह सवाल उठता है क्या जन्म देने वाले माता-पिता का अधिकार अपने बच्चों पर नहीं है...?

         इन्हीं सवालों के साथ कम उम्र में ही विद्यार्थियों के भटकते जीवन को लेकर बड़ी चिंता व चिंतन का विषय बन गया है। जिसके लिए माता-पिता के साथ स्कूली संस्था व इस दिशा में कार्य करने वाले सामाजिक संस्थानों को भी गंभीरता के साथ इस मसले पर एक चिंतन के साथ कार्य करने की आवश्यकता है।

बहला-फुसलाकर ले गया था बंगाली, पर नहीं हुई कोई ज्यादती

         हमारे विधिक व्यवस्था अनुसार घटना व घटना के आरोपों व बाद में बयानों के आधार पर अपराध दर्ज एवं धाराए बढ़ती है। आज हम खवासा क्षेत्र के दो मामले के साथ अपनी बात लिख रहे हैं। जिसमें घटना व दर्ज हुए अपराध पर केंद्रित नहीं होकर इस तरह की हो रही घटना पर सामाजिक चिंतन करने की आवश्यकता जरूरी है।

       पहला मामला जो कि, वर्तमान में सुर्खियों में है। जिसमें एक जैन समाज की लड़की को बांग्लादेशी गौतम राय का लड़का सुमन ले गया था और मामला यह कि, विवाहित सुमन ने अपनी विवाहिता पत्नी को छोड़ एक नाबालिक लड़की से प्रेम किया और लड़की को ऐसा जाल में फंसाया की जो लड़का कहे वही वह नाबालिक लड़की करने को तैयार हो गई और भरे बाजार में माता-पिता का विरोध कर लड़की उक्त बांग्लादेशी गौतम राय के लड़के विवाहित सुमन के साथ चली गई थी।

        चूँकि उक्त मामला जैन समाज की लड़की होने व जिले में पुलिस कप्तान भी जैन ही होने के चलते सुर्खियों में रहा था। तो वहीं पुलिस अधिकारी भी अपने पुलिस कप्तान अगम जैन के सामने जब तक लड़की को लेकर न आ जाए तब तक निगाहें मिलाने में भी संकोच कर रहे थे। वही उक्त मामले को प्रमुखता के साथ माही की गूंज में उजागर होने व एसपी के समक्ष अपनी कार्यक्षमता का परिचय देने के साथ खवासा-थांदला पुलिस ने इनके एक-एक रिश्तेदारों को कब्जे में लिया। जिसमे धार, उज्जैन आदि जिलों से भी 8-10 लोगों को पकड़कर लाए और पूछताछ की। पुलिसया दबाव के साथ ही षड्यंत्रकारी तथा बांग्लादेशी गौतम राय को अपने पुत्र के साथ लड़की को आना ही पड़ा।

        15 दिसंबर को विवाहित सुमन व लड़की पेटलावद होते हुए खवासा आ रहे थे, जिसकी सूचना लड़की ने ही उसके पिता परिवार को फोन पर दी। बामनिया में लड़की परिवार के हत्थे धोखेबाज सुमन जिसने पहले ही एक लड़की की जिंदगी शादी करने के साथ छोड़कर खत्म करने का कार्य किया। जिसको लड़की के पिता परिवार ने बामनीया में पकड़ा और सुमन द्वारा मुहजोरी करने पर पंचायती भी भरे बाजार में कर दी। तथा अपनी लड़की को अपने कब्जे में ले लिया और सुमन को पुलिस के हवाले कर दिया। लड़की के दिए अपने बयान में बताया, सुमन ने उसके साथ किसी प्रकार की ज्यादती नहीं की थी, नाबालिक होने के साथ उसे बहला-फुसलाकर सुमन ले गया था और दिन में धार्मिक स्थलों के दर्शन करते और रात में किसी रेलवे स्टेशन पर जा कर रुक जाते थे, कहा।

        जिसपर सुमन के विरुद्ध अपराध क्रमांक 775/2022 धारा 363 व 366 में गिरफ्तारी लेकर न्यायालय में सुमन को पेश कर जेल भेजा गया। यहां अगर लड़की के साथ किसी प्रकार की ज्यादती किए जाने संबंधी बयान होते तो  लड़के के विरुद्ध धारा 376 भी पंजीबद्ध होता।

एनएचपीएस स्कूल के गेट तक आई छात्रा बिना परीक्षा दिए हुई लापता

         वहीं दूसरे मामले में खवासा एनएचपीएस स्कूल की 9वीं की छात्रा उम्र 14 से 15 वर्ष कोटड़ा निवासी डामोर परिवार की लड़की 10 दिसंबर से लापता है। मामला लड़की के पिता राकेश द्वारा थांदला थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई कि, अर्द्धवार्षिक परीक्षा का पेपर देने हेतु स्वयं अपनी लड़की को स्कूल के बाहर छोड़कर आया। लेकिन लड़की घर पर नहीं आई। पुलिस ने अपनी तत्परता दिखाते हुए जांच में जुट गई और सामने आया कि, यह स्कूली कक्षा 9वी की नाबालिग छात्रा धनपुरा निवासी किसी तानसिंह भाबोर से मोबाइल पर बात करते हुए 10 दिसंबर के पूर्व माता-पिता ने पकड़ा था। माता-पिता ने अपने अधिकार का उपयोग करते हुए बेटी को एक-दो फटकार भी लगाई और लड़के के द्वारा दिया गया मोबाइल भी लड़की के माता-पिता ने अपने कब्जे में लेकर समझाइश दी कि, बेटी समय आने पर तेरी अच्छी जगह शादी भी करेंगे। परंतु अभी तुझे तेरा भविष्य सुधारना है और तेरा ध्यान अभी सिर्फ पढ़ाई पर केंद्रित करना चाहिए के साथ बेटी को समझाया और बेटी ने भी माता-पिता की बात समझ गई ऐसा विश्वास दिलाया। वहीं 10 दिसंबर को पिता स्वयं अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए अपनी बेटी को समझाइश देते हुए अर्द्धवार्षिक परीक्षा का पेपर देने हेतु खवासा की एनएचपीएस स्कूल ले गए और स्कूल के बाहर छोड़ पिता घर चला गया। लेकिन बेटी को माता-पिता की दी गई समझाईश काम नहीं आई और न ही उनकी डांट-फटकार।

         स्कूल की अन्य छात्रा, गेटमैन व प्राचार्य से पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि, उक्त छात्रा 10 दिसंबर को स्कूल के अंदर ही नहीं आई। गेट मैंन ने गेट के बाहर उसे देखा और साढे 10 बजे की जैन बस में बैठ थांदला की ओर चली गई। वही आठवीं की छात्रा ने भी बयान दिया कि, बदला हुआ नाम सुनीता गेट के बाहर मिली, पेपर देने हेतु स्कूल के अंदर जाने हेतु कहा तो सुनीता ने पेपर देने से इनकार करने के साथ माता-पिता ने तानसिंह के साथ मोबाइल पर बात करते हुए पकड़ लिया और उसे फटकार लगाने की बात कही। जिस पर आठवीं छात्रा ने सुनीता को समझाया कि, माता-पिता है जो डांट भी सकते हैं व मार भी सकते हैं उन पर गुस्सा करना सही नहीं है। पर सुनीता को यह बात भी समझ नहीं आई और खवासा की ओर से आई जैन बस में बैठकर चली गई लेकिन वह घर नहीं पहुंची।

          पुलिस की जांच में प्रथम दृष्टया यह भी सामने आया कि, छात्रा ने किसी अन्य का मोबाइल लेकर बस में तानसिंह को मोबाइल लगाया। पुलिस,  तानसिंह को पूछताछ के लिए लाई और सामने आया कि, तानसिंह झाबुआ कॉलेज में बीए सेकंड ईयर कर रहा है और उस लड़की के साथ शादी करूंगा की बात दोहरा रहा है। लेकिन लड़की कहां है यह मुझे नहीं मालूम कह रहा है। पुलिस ने धारा 363 में नामजद अपराध पंजीबद्ध कर मामले की जांच कर रही है।

        पूरा मामला लड़की के सामने आने के बाद ही सामने आएगा। लेकिन उक्त मामले के साथ यह आत्मचिंतन की जरूर आवश्यकता है कि, विद्यार्थी 10- 12 वर्ष की उम्र से ही शारीरिक बदलाव के चलते भटक रहा और कम उम्र में ही अपने भविष्य को खराब कर गलत संगति में जा रहे है। इसलिए माता-पिता के साथ स्कूलों में भी कक्षा 6 से 12वीं तक में बच्चों की बदलती मनोव्रती को सही दिशा दिखाने के लिए काउंसलिंग की आवश्यकता है, जिसके लिए स्कूली संस्था, संस्था स्तर पर एक पखवाडे में एक बार बच्चों की काउंसलिंग की जाए। साथ ही 2 से 3 माह में ऐसे काउंसलर भी बुलाये जाए, जो संस्था में आकर भटकते विद्यार्थी जीवन को सही दिशा दिखा सके। वही बाल विकास विभाग को भी इस और ध्यान देने की आवश्यकता है। तय है ऐसा करने पर ऐसे मामलों में कमी जरूर आएगी।

बांग्लादेशी गौतम राय का शराबी पुत्र सुमन की लड़की के परिजनो के हत्थे चढने के बाद हुई पंचायती।


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