आज प्रदेश के साथ झाबुआ जिले की बची 26 शराब दुकानो का एकल प्रणाली के तहत होगा टेंडर
माही की गूंज, संजय भटेवरा।
झाबुआ। झाबुआ जिला सर्वाधिक अवैध शराब बिक्री एवं शराब माफिया के आतंक से भी पहचाने जाने लगा है। 26 मार्च माही की गूंज के अंक में ‘‘सातवें राउंड के बाद ठेकों की 15 प्रतिशत राशि हुई कम, आठवां राउंड 27 मार्च को“ शीर्षक के साथ प्रकाशित किया था। और मुख्य रूप से उल्लेख किया था कि, जब जिले में 9 करोड़ के करीब राशि से अविभाजित झाबुआ जिले की शराब दुकानों का ठेका हुआ था और दूसरे वर्ष जब यह राशि बढ़कर 10 करोड़ से अधिक हो गई थी तब भी शराब ठेकेदार अपनी नुकसानी बताकर राशि कम करवाने का प्रयास किया गया था। तब से लेकर अब तक आलीराजपुर जिला अलग होने के बाद अब भी ठेकेदार जिले का साढ़े 3 सौ करोड़ के करिब की निर्धारित ठेके की राशि तय होने के बाद तक भी पिछले वर्ष में शराब ठेकों में बड़ी नुकसानी होने का माहौल बनाकर आबकारी विभाग के साथ ही अन्य बाहरी ठेकेदारों को भी गुमराह करने की बात का उल्लेख हमने किया है।
2003 में बनी उमा भारतीय सरकार ने आबकारी नीति में संशोधन कर माफियाओ का आतंक खत्म करने व स्थानीय व्यापारियों को शराब का व्यवसाय करने मिले व काम्पीटिशन भी बड़े, जिससे राजस्व भी बड़े की नीति के साथ एकल प्रणाली व्यवस्था लागू कर शराब दुकानो की नीलामी लॉटरी द्वारा की गई थी। तथा उक्त दुकानों को 3 वर्ष तक जो ठेकेदार रीनिवल करवाना चाहता है तो सरकार द्वारा बढ़ाई गई राशि के साथ ठेकेदार रीनिवल बिना किसी टेंडर या नीलामी से की गई थी।
झाबुआ जिले की बात करें तो हमने 26 मार्च के अंक में भी उल्लेख किया कि, उक्त एकल प्रणाली व्यवस्था खत्म कर शराब दुकानों के समूह बनाए जाने पर यह शराब के ठेके छोटे ठेकेदार की पहुंच से बाहर हो गए हैं। और जैसे ही आबकारी विभाग ने 25 मार्च देर शाम को एक आदेश जारी किया कि, बची हुई शराब दुकान एकल प्रणाली से शराब ठेकों को ई-टेंडर के माध्यम से दी जाएगी। और यह बात झाबुआ जिले के कुछ छोटे शराब व्यवसाय से जुड़े लोगों को पता चली की एकल प्रणाली (एक-एक दुकान) के साथ निर्धारित राशि से 15 प्रतिशत कम के साथ ठेकों की नीलामी ई-टेंडर से होगी व यह दुकाने अगले 3 वर्ष तक रिनीवल भी होगी। कम समय मिलने के बावजूद कुछ स्थानीय लोगों ने सरकार की इस नीति के तहत बची हुई शराब दुकानों में एक-एक दुकान का टेंडर डालने का मन बनाया। और कुछ लोगों ने इसकी तैयारी भी महज एक दिन में की व बैंक बंद होने के चलते देर रात्रि तक कैश एटीएम मशीन के माध्यम से राशि भी जमा की। आज 27 मार्च को सुबह 8ः00 बजे बाद ऑनलाइन ई-टेंडर डालने की पूरी कार्यवाही कर ली गई। जैसे ही यह बात कुछ वर्षों से झाबुआ जिले में अपने ग्रुप के माध्यम से शराब ठेकों में अपना एकाधिकार जमाकर आतंक फैलाने वाले बाकलिया ग्रुप एवं उनके गुर्गाें ने अपनी मनसा जारी की। तथा स्थानीय उन व्यक्तियों को अन्य व्यक्तियों के माध्यम से धमकाने का प्रयास किया जा रहा है कि किसी भी स्थिति में अन्य स्थानीय व्यक्ति ई-टेंडर नहीं डाले। अगर टेंडर डालते है तो उसे बाकलिया ग्रुप से बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा और महाकाल ग्रुप के सहयोग व सरंक्षण से बाकलिया ग्रुप ठेके ले रहा है की बाते कर धमकाया जा रहा है। वही प्रशासनिक सहयोग के साथ भी दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
बावजूद कुछ व्यक्ति बाकलिया ग्रुप व गुर्गों के द्वारा भेजी गई धमकियों को सिरे से टाल दिया और आज ई-टेंडर में कुछ स्थानीय व्यक्ति अपना टेंडर डालेंगे तो कुछ व्यक्ति डर के पीछे हट गए हैं।
तय हे कि, एकल प्रणाली का यह संशोधन 25 मार्च देर शाम की बजाय और 4-5 दिन पूर्व होता तो स्थानीय कई शराब ठेकेदार आज इ-टेंडर डालकर जिले की बची हुई सभी शराब दुकानों पर अपना भाग्य अजमाते।
जानकारीनुसार बात माने तो , बाकलिया ग्रुप व गुर्गे पूरे बौखलाए हुए दिख रहे हैं और अपने शराब माफियाओं के सहसाथियों को दबी जुबान में कह रहे हैं कि, आबकारी विभाग ने 4 प्रतिशत राशि कम कर दी थी उस समय भी पूरे जिले की दुकानों पर अपना टेंडर डाल जिले की सभी शराब दुकाने ले लेनी थी। अब बाकलिया ग्रुप तय है एकल प्रणाली के तहत जिले की सभी दुकानों पर नुकसानी बताने वाला 15 प्रतिशत राशि जो कम हुई थी, उसके बराबर या उसके ऊपर का भी शराब दुकानों में आज अपना टेंडर डाल शराब दुकानों को लेने का प्रयास कर स्थानीय लोगों को बाहर करने का प्रयास जरूर करेगा यह तय है।
अब देखना है आज जिले की बची हुई कितनी दुकाने ई-टेंडर में और कितने मूल्य में जाती है और कितनी दुकानों पर टेंडर नहीं डलता है। वहीं स्थानीय एवं छोटे व्यापारियों को शराब ठेके में दुकान मिलती है या नहीं यह देखना भी बड़ा दिलचस्प रहेगा।
लेकिन पूरे वाकिये से यह स्पष्ट हो गया है कि, शराब ठेकेदार बाकलिया ग्रुप कुछ वर्षों से अपना एकाधिकार बनाकर ऐसा बैठा है कि, कोई और शराब ठेका नहीं ले । और नुकसानी बता-बताकर आबकारी विभाग व सरकार को गुमराह करता रहा है। जबकि झाबुआ जिले में शराब की इतनी बिक्री होती है की 500 करोड़ में भी यह ठेका ले-ले तो शायद नुकसान नहीं है। बौखलाया बाकलिया ग्रुप का एकाधिकार बनाए रखेगा या स्थानीय व्यक्ति या बाहरी व्यक्ति शराब ठेके लेकर अपना पैर जमाएंगे यह तो शाम को ही ओपन ऑनलाइन बिडिंग के बाद ई-टेंडर खुलेंगे उसके बाद ही पता चलेगा।
झाबुआ जिले की इन 26 दुकानो की आज हो रही निलामी की मुल्य वाईस सुची।
माही की गूंज में 26 मार्च को प्रकाशित समाचार।
