चांदी की चम्मच से चाट इतनी चट रही कि जेई साहब प्रमोशन के बाद भी यही टिके हुए...!
माही की गूंज, खवासा।
चाहे किसी प्रकार का व्यवसाय हो या फिर विभागीय कोई कार्य हो हर किसी का अपना-अपना कार्य करने का वर्ष में एक बार तो अधिक भार रहता है। यानी कि किसी व्यवसाय के लिए अपने व्यापार संबंधित अलग-अलग विशेष सीजन होती है। जैसे ठंड में होटल वालों के लिए जलेबी, राखी- दिवाली पर मिठाई की विशेष बिक्री। इसी तरह बीज की सीजन बारिश के पूर्व। स्कूल खुलने पर स्टेशनरी, शादी-ब्याह व त्योहार पर कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक व बर्तन, फसल उत्पादन के बाद पल्ली का व्यवसाय आदि इस तरह से प्रत्येक अपने-अपने व्यापार में व्यवसाय की एक सीजन होती है। जिसमें व्यापारी आम दिनों की अपेक्षा इस तरह की सीजन में अपना अधिक व्यापार कर अपनी अधिक आमदनी प्राप्त करता है।
इसी तरह शासकीय अलग-अलग विभागों में भी वर्ष में एक बार तो कार्य का अधिक भार सीजन अनुसार रहता है। लेकिन उक्त कार्य का भार विभाग के अधिकारी सिर्फ तनख्वाह पर ही कार्य करते हैं ऐसा नहीं है उन अधिकारियों की भी चांदी रहती है और विशेष रूप से इस तरह की सीजन में अपने विभागीय कार्य के अधिभार के साथ चांदी की चम्मच से चटनी (रिश्वत) की चाट आम दिनों के बदले अधिक चटकाई जाती है।
इसी तरह विद्युत विभाग की भी अपनी एक सीजन होती है और वह सीजन रबी फसल के दौरान होती है और इस सीजन में विद्युत विभाग का अधिकारी से लेकर चपरासी तक जमकर चांदी की चमक से चटनी की चटाई करते हैं।
विद्युत विभाग के खवासा ग्रिड की बात करें तो यहां पर जमकर चांदी की चम्मच में चटनी की चटाई हो रही है। खवासा ग्रिड पर जेई के रूप में मुकेश परमार पदस्थ है, इनका खवासा ग्रिड से ही प्रमोशन होकर एई बन गए हैं। परंतु प्रमोशन के बाद भी साहब का खवासा ग्रिड पर जेई के रूप में ही कार्यरत रहना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
विद्युत विभाग की जानकारी रखने वाले बताते हैं कि, यह साहब को यहां पर जमकर चांदी की चम्मच से चटनी की चटाई की चाट दातों पर ऐसी लग चुकी है कि, यहां से साहब जाने का नाम नहीं लेते हैं। और ऊपरी साठ-गांठ के साथ यही टिके हुए हैं। साहब की वर्तमान में रबी की सीजन होने से जमकर सीजन की चटनी चांदी की चम्मच से चाटी जा रही है। यहां तक साहब पर आरोप लगाया जा रहा है कि, साहब अपनी कारस्तानी में बहुत माहिर है जैसे कि, अस्थाई कनेक्शन धारी जिसमें ऐसे भी उपभोक्ता है जो जानते हैं कि, वे वैध अस्थाई कनेक्शनधारी है, लेकिन साहब की कास्तानी ऐसी कि, साहब वैध कनेक्शन के नाम पर उपभोक्ता से पैसा तो शासन की निर्धारित राशि अनुसार ही किसानों से ले रहे हैं लेकिन कुछ किसानों के विद्युत अस्थाई कनेक्शन की रसीद पैसे लेने के बाद भी नहीं काटी जाती है। नतीजन ऐसे किसान जो अपने आपको पैसा देकर वैध कनेक्शनधारी समझ रहे हैं, वे साहब द्वारा रसीद नहीं काटे जाने पर स्वत अवैध कनेक्शनधारी बन चुके हैं।
झाबुआ एवं इंदौर टीम कभी-कभार जांच पर आ जाती है तो टारगेट पूर्ति कर अपनी इतिश्री कर लेती है। बताया जा रहा है कि, पिछले दिनों प्याज गोदाम, मोटरसाइकिल शोरूम, आरओ फिल्टर प्लांट पर अवैध विद्युत कनेक्शन व अधिभार मिलने पर जुर्माना दिया गया था। वही एक टीम ने चार से पांच किसानों पर अस्थाई कनेक्शन की रसीद नहीं होने पर उन्हें अवैध कनेक्शन धारी दर्शाया गया है। जबकि इनमें से कुछ ने साहब को रसीद हेतु पैसे दे चुके थे।
वहीं विद्युत विभाग की जानकारी रखने वाले बताते हैं कि, विद्युत पोल से निर्धारित दूरी में ही कनेक्शन दिए जा सकते है लेकिन निर्धारित दूरी से अधिक दूरी पर कई विद्युत कनेक्शन साहब दे चुके हैं। वहीं शासन की योजनानुसार जहाँ भी विद्युत कनेक्शन के चलते अधिभार हो गया हो वहां ट्रांसफार्मर अधिभार वाले बदलने का प्रावधान है वह भी निशुल्क, लेकिन साहब अधिभार वाले तथा निःशुल्क ट्रांसफॉर्म लगाने पर वहां के कनेक्शन धारी किसानों से एक लाख व उससे अधिक तक की राशि अवैध रूप से वसूली जाती है। वहीं कई जगह क्षेत्र में विद्युत पोल शिफ्टिंग करने के बदले बिना रसीद के ही 13 से 15 हजार रुपए तक प्रति पोल लेकर अपना काम कर लेते हैं और विद्युत कंपनी को हजार से लाखों रुपए का चूना लगा चुके हैं।
वर्तमान में पिछले डेढ़ माह से रबी की सीजन में किसानों द्वारा खेतो में पियत की जा रही है इस दौरान साहब एवं उनकी टीम चप्पे-चप्पे जाकर वैध कनेक्शनधारियो के भी मोटरे तोक कर ला रहे हैं और वसूली कर रहे हैं। वहीं ऐसे कनेक्शनधारी जो साहब को पैसे देते हैं पर रसीद नही देते हैं उन पर साहब की बड़ी मेहरबानी बनी रहती है।
परमार साहब पिछले आठ वर्षो से अपने प्रमोशन के बाद भी यहां टिके हुए हैं विभाग की जानकारी रखने वाले बताते हैं कि, तलावली, सेमलिया (थांदला), कोटनाई आदि जगह के खवासा ग्रिड पर आउटसोर्स कर्मचारी पदस्थ है। साहब ने उक्त अपने मापदंड के अनुसार पदस्थ कर 15-15 हजार रुपए तक की वसूली की है। जानकारी रखने वाले यह भी बताते हैं कि, साहब ने चार पहिया वाहन जो ग्रिड से फिल्ड में कार्य करने हेतु लगा रखा है वह भी किसी परिवार के नाम से ही है। जानकारी रखने वाले यहां तक बताते हैं कि, जो गाड़ी किराए पर रखी गई है उसको आउटसोर्स कर्मचारी ही चलाता है जबकि गाड़ी का चालक गाड़ी मालिक की तरफ से ही होता है और भाड़े में चालक के भी पैसे विद्युत कंपनी द्वारा दिए जाते हैं। साहब, कंपनी की गाड़ी का दुरुपयोग कर प्रतिदिन अपनी निजी आवाजाही हेतु प्रतिदिन थांदला अपने निवास पर जाते हैं और सुबह उसी गाड़ी से आते हैं।
जानकारी देने वाले सूत्र ने बताया कि, आगे और ऐसी जानकारी देंगे जिसमें साहब की ओर भी कारस्तानी सामने आएगी।
