आदिवासियों से ठगी करने वाला, आदिवासियों का सहयोग क्यों करते हो कहकर रवि टाक ने किया धमकाने का प्रयास
माही की गूंज, झाबुआ।
जनहितैषी व निष्पक्ष पत्रकारिता काटो का ताज है यह हम भलीभांति जानते हैं। तथा माही की गूंज की निष्पक्ष कलम के साथ हम सहजता से इस काटो के ताज को पहन कर हमारी पत्रकारिता की कर्तव्य निष्ठा को पूर्ण कर रहे हैं।
वैसे तो माही की गूंज एक साप्ताहिक अखबार है इसलिए जनहितेषी मुद्दे को हम सप्ताह में एक बार गुरुवार को प्रकाशित करते हैं। वह भी किसी दैनिक अखबार की तुलना में कमतर नहीं है। तथ्यात्मक प्रकाशित समाचारों की चर्चाएं कम नहीं होती है और देखते ही देखते सप्ताह गुजर कर पुनः गुरुवार आ जाता है। और पुराने समाचारों के साथ नए समाचारों की चर्चा आम जनता में विश्वास का प्रतीक बनी रहती है। यही हमारे पिछले सात सालों की माही की गूंज की पूरी टीम की सफलता है और हम पाठकों के विश्वास पर खरे उतरते हैं उसकी हमें खुशी भी है। सम्बधिन्तो के प्रति प्रकाशित समाचारों के बाद कई ऐसे वाक्ये आते हैं जिसमें प्रशासन भी अपनी बौखलाहट का परिचय देती हैं।
तो कही समाचार प्रकाशन के बाद माफिया व भ्रष्टाचारी सार्वजनिक चर्चाओं में अपनी र्गोवक्ति यही करते हैं कि, समाचार प्रकाशन से क्या हो जाता है। लेकिन तंत्र से तालमेल के साथ मामले को निपटाए जाते हैं जो बातें किसी से छिपी नहीं है। क्योंकि माही की गूंज में समाचार छपा है तो उसका कहीं न कहीं असर जरूर होता है। एक कर्मनिष्ठ, निष्पक्ष पत्रकार की कलम की सफलता तब सामने आती है जब सामने वाले की बौखलाहट उसके आतंक के रूप में सार्वजनिक होती है। जिससे सार्वजनिक रूप से यह प्रतीत होता है कि, अखबार में छपा समाचार पूर्णतः तथ्यात्मक तो है ही पर उस समाचार का असर अनैतिक या गलत कार्य करने वालों पर उसका इतना असर हुआ है कि वह सिर्फ अपनी झूठी शान व नाक बचाने का प्रयास करते हुए अपने आतंक का परिचय देते है। और कई बार पत्रकारों पर जानलेवा हमले तक कर देते हैं और कई ऐसे देश में मामले भी हुए हैं जिसमें पत्रकारों पर जानलेवा हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिए।
लेकिन जब-जब भी पत्रकारों पर ऐसे हमले होते हैं पत्रकारों की कलम की धार और अधिक तीव्र हो जाती है। क्योंकि कलम की धार तलवार से भी अधिक शक्तिशाली होती है। मुंशी प्रेमचंद का एक वाक्य कलम का सिपाही कहा गया है क्योंकि उन्होंने अपनी कलम को सामाजिक न्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष के लिए एक हथियार के रूप में कलम का इस्तेमाल किया था। हमारी कलम भी मुंशी प्रेमचंद के आदर्श पर चलते हुए यशवंत घोड़ावत की कलम की तर्ज पर सामाजिक न्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष के रूप में कलम के सिपाही होकर अपना निर्वाह कर रहे हैं।
ऐसे में चाहे कोई भी माफिया, लोगों से ठगी करने वाले व्यापारी या असामाजिक तत्व हम पर हमले करके हमारी कलम को रोकने का प्रयास करते हैं लेकिन वह प्रयास असफल ही रहेंगे क्योंकि यह कलम न कभी रुकी है और न कभी रुकेगी।
दो राज्य व तीन जिलो में मनमानी करता व्यापारी समाचार से ऐसा बौखलाया की मानो उसके पैरो तले जमीन निकल गई
जो व्यक्ति यह कहते हैं कि, समाचार का असर नहीं होता है लेकिन तथ्यात्मक लिखे समाचारों का कितना बड़ा असर होता है यह एक उदाहरण के रूप में एक बार और सामने आया है।
24 जुलाई के अंक में माही की गूंज में ‘‘एमपी में खाद नहीं मिल रहा लेकिन समीपस्थ बड़ी सरवा (राज.) से व्यापारी धड़ल्ले से 430 में खाद की बोरी एमपी के किसानों को दे रहे हैं‘‘ के शीर्षक के साथ समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें उल्लेख था कि, झाबुआ जिले में जहां किसानों को पर्याप्त यूरिया खाद दिए जाने के दावे किए जाते हैं। लेकिन असल में यहां खाद नहीं मिलने के चलते खवासा क्षेत्र के किसान समीपस्थ राजस्थान से 266 रुपए में शासन की ओर से दिया जाने वाला खाद 430 रुपए में मजबूरी में ला रहे हैं।
वहीं बड़ी सरवा के एक व्यापारी रवि टाक ने हमारे स्थानीय प्रतिनिधि सुनील सोलंकी से हुई चर्चा में बताया था कि, वह रतलाम (मध्य प्रदेश) जिले से खाद 350 रुपए में लाता है और यहां 430 रुपए में वो खाद किसानों को बेचता है। तथा व्यापारी स्वयं ने खाद बेचने का लाइसेंस उसके पास नहीं है स्वीकार किया था। व्यापारी की कही बात के साथ प्रकाशित समाचार के बाद रवि टाक ऐसा बौखलाया कि, उस समय की टेलिफोनिंग चर्चा में धमकी देने का प्रयास किया। और अन्य व्यक्तियों के सहारे हमारे स्थानीय प्रतिनिधि को फोन करवाकर गाली-गलौज कर धमकाने का प्रयास किया। लेकिन हमारी कलम इन फिजूल धमकियों से नहीं डरी और आदिवासी किसानों के साथ ठगी करने वाला व मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से ही बिना बिल का यूरिया खाद लाकर सीमावर्ती बड़ी सरवा (राज.) स्थित अपनी दुकान पर खाद लाकर झाबुआ जिले के किसानों को शासन के अधिकृत भाव से अधिक रुपया लेकर ठगी करने वाले व्यापारी रवि टाक की बौखलाहट और बढ़ती गई।
वहीं दुसरा समाचार सूत्रों के माध्यम से मिली जानकारी एवं लाइव लोकेशन के साथ मिले फोटो जिसमें बड़ी सरवा (राज.) से व्यापारी ने अपनी दुकान से सोयाबीन लोड किया और यहां चार सौ बिसी करते हुए व्यापारी ने अपने पैतृक निवास स्थान विनायक ट्रेडर्स अमरपुरा (बाजना) म.प्र. से सोयाबीन भरा बताकर सैलाना मंडी की अनुज्ञा कटवाकर बामनिया अशोक अग्रवाल की कॉटन इंडस्ट्रीज में सोयाबीन पहुंचा के उल्लेख के साथ समाचार प्रकाशित किया था।
स्थानीय प्रतिनिधि के नाम के साथ उक्त प्रकाशित समाचार 30 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित किया गया था। लेकिन उक्त समाचार में कहीं से कहीं तक किसी व्यापारी का नाम उल्लेख नहीं था। उसके बावजूद भी स्वयं रवि टाक ने अन्य लोगों के माध्यम से फोन लगवाकर इस बात की पुष्टि की कि, यह सोयाबीन भी रवि टाक का ही था और अपनी बौखलाहट कई लोगों के सामने दर्शाता था। मध्य प्रदेश व राजस्थान दो राज्य व इन दो राज्य के बांसवाड़ा, रतलाम व झाबुआ जिले में अपनी चार सौ बिसी रूपी करतूत बताने वाले व्यापारी की वास्तविक करतूत माही की गूंज में प्रकाशित होने पर ऐसा बौखलाया कि, एक सामाजिक आयोजन में विघ्न डाल जान से मारने तक की धमकी व प्रयास अपने असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर किया गया।
बता दे कि, बड़ी सरवा (राज.) निवासी के लड़के की शादी समारोह 24 व 25 नवंबर को था। वहीं उक्त बौखलाया व्यापारी भी उक्त शादी में आमंत्रित था। 24 नवंबर को उक्त व्यापारी शादी समारोह उदय मैरिज गार्डन पेटलावद परिसर के अंदर ही समारोह के दौरान माही की गूंज संपादक से संपर्क कर अपना नाम रवि टाक बताया। और कहने लगा कि, हम भी कलाल है और जहां जिस व्यक्ति के पीछे कलाल लग जाता है उसके समाचार आपको प्रकाशित नहीं करना चाहिए। आपने खाद का समाचार व बड़ी सरवा (राज.) में मेरी दुकान से सोयाबीन भरकर बामनिया गया उसका समाचार भी आपने छाप कर अच्छा नहीं किया और धमकाने लगा। साथ ही बौखलाया रवि टाक प्रत्यक्ष अन्य व्यक्तियों के समक्ष संपादक को कहने लगा कि, तुम आदिवासियों का सहयोग क्यों करते हो! तुम्हें कलालो का सहयोग करना चाहिए! जब संपादक ने बौखलाए व्यापारी को समझाते हुए कहा कि, हम लोग किसी सामाजिक आयोजन में आए हैं यहां हम किसी प्रकार का विघ्न खड़ा नहीं करें। समाचार को लेकर कोई समस्या या नाराजगी है तो हम अपने घर पर भी बैठकर बात कर सकते हैं।
रही बात आदिवासी समाज को सहयोग करने की तो हमारी कलम हर पीड़ित के पक्ष में चलती है, किसी जातिवाद के आधार पर नहीं चलती। अगर कहीं कोई गलत है चाहे वह सगा भाई भी हो तो हमारी निष्पक्ष कलम का हम निर्वहन करते हैं। रही बात झाबुआ, बांसवाड़ा जिला या सैलाना तहसील यह आदिवासी बाहुल क्षेत्र ही है और यहां हर व्यापारी चाहे आप हो या हम इन आदिवासी समाज के भाइयों से ही मिली कमाई के साथ हमारे परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं कहा।
उक्त संपादक की बात बोखलाए व्यापारी को और हजम नहीं हुई और आदिवासी समाज के संबंध में अनर्गल बात कर टाक कलाल को सहयोग करने की बात पर जोर देते हुए धमकाने लगा। लेकिन वहां उपस्थित कुछ लोगों ने बोखलाए रवि टाक को अलग ले गए और मामला शांत किया।
समाचार से बौखलाया रवि टाक यही शांत नहीं हुआ दूसरे दिन 25 नवंबर को माही की गूंज का स्थानीय प्रतिनिधि सुनील सोलंकी भी उक्त शादी समारोह में आमंत्रित होकर परिवार के साथ शादी समारोह में आया था। रवि टाक हमारे प्रतिनिधि को शादी समारोह में देखते ही समाजजनों के बीच अपनी बौखलाहट सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करते हुए धमकाने लगा। और कहने लगा कि, तुमने राजस्थान का समाचार लिखा है हम तुझे और तेरे संपादक को नहीं छोड़ेंगे। लोगों ने वहां पर भी समझाइस दी और मामला खत्म किया।
संपादक व प्रतिनिधि किसी भी स्थिति में उक्त शादी समारोह में विघ्न न हो की मनसा रखे हुए थे। तो वही बौखलाया टाक बंधु की मनसा विपरीत होकर शादी समारोह में विघ्न डालने की ही रही। और जैसे ही शादी समारोह अटेंड कर संपादक एवं प्रतिनिधि एवं अन्य समाज के एक दो लोग परिवार सहित मैरिज गार्डन से बाहर निकलकर वाहन पार्किंग में जा रहे थे कि, बौखलाया रवि टाक अपने कुछ असामाजिक तत्वों के साथ आया और हमारे प्रतिनिधि को टारगेट में लेने का प्रयास कर हमला करने का प्रयास किया। बीच बचाव में संपादक एवं अन्य लोग बचाव पक्ष में आए लेकिन रवि टाक व साथ में आए बिना आमंत्रित शादी समारोह में असामाजिक तत्वों ने जमकर हमला कर दिया। जिसमें संपादक को चोट लगी व जान से मारने की धमकी देकर अन्य लोगों को आते देख अपने असामाजिक तत्वों के साथ रवि टाक फरार हो गया।
उक्त घटना के बाद शादी समारोह में यही चर्चा चलने लगी कि, बौखलाया रवि टाक ने चवन्नी छाप हरकत कर शादी समारोह में विघ्न डालने का प्रयास किया। अगर समाचार को लेकर कोई दिक्कत थी तो सीधे पत्रकार के घर बात करने जाना था न कि इस तरह की घटिया हरकत करना थी। और यह भी लोगों द्वारा कहा गया कि, ऐसी घटिया हरकत कोई चवन्नी छाप या घटिया व्यक्ति ही कर सकता है!
24 जुलाई 2025 के अंक में प्रकाशित समाचार।
30 अक्टुम्बर 2025 के अंक में प्रकाशित समाचार जिसमे बोखलाए व्यापारी का नाम नही पर रवि टाक कहता है मैरे थे सोयाबिन जिसे बडी सरवा (राज.) से किये थे लोड।
