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गुजरात मॉडल की घोषणा टाय-टाय फिस्स
Report By: जगदीश प्रजापति 09, May 2024 1 year ago

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अनदेखीः माही नहरों से लीकेज रुक जाए तो बामनिया, खवासा, थांदला ओर मेघनगर तक पहुच सकता है पानी

माही की गूंज, बरवेट।

           माही नदी का पानी क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित हुआ है, लेकिन इसी पानी की कदर अधिकारियों द्वारा नहीं की जा रही है। नतीजा जितना पानी सिचाई के लिए उपयोग होता है उससे दो गुना पानी यूं ही व्यर्थ बह जाता है। इसे रोकने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने माही नहरो को गुजरात मॉडल की तर्ज पर पक्की बनाने के लिए घोषणा की थी लेकिन जिम्मेदारों द्वारा इस ओर ध्यान नही दिया जा रहा और घोषणा महज टाय-टाय फिस्स ही साबित होकर व्यर्थ ही पानी बह रहा है। इस पानी को अगर व्यर्थ बहने से रोक लिया जाए तो सिचाई के लिए कमांड एरिया बढ़ सकता है। वही बामनिया, खवासा, थांदला, मेघनगर क्षेत्र तक पानी पहुच सकता है।

    मामला माही नदी से निकली नहरों का है। दरअसल, माही डेम से निकल रही माही नहर निर्माण के दौरान भारी भ्रष्टाचार हुआ है। नहरो के निर्माण में भारी अनियमितता बरती गई, जिससे सेकड़ो जगह से पानी लीकेज होता है। नहर से लीकेज ओर सीपेज से निकलने वाला पानी छोटे-छोटे नदी, नालों में व्यर्थ बह जाता है। जो अनुपयोगी है। लेकिन इस पानी को रोकने के लिए अभी तक माही परियोजना के अधिकारी, जलसंसाधन विभाग, विधायक, सांसद किसी ने ध्यान नहीं दिया है। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पेटलावद नगरपालिका चुनाव प्रचार के दौरान माही नहरो को गुजरात की नहरो की तर्ज पर पक्की बनाने की घोषणा की थी।

अंतिम छोर तक नही पहुंच रहा माही का पानी

      दरअसल इस लीकेज के कारण माही नहर के अंतिम छोर तक रहने वाले किसानों के खेतो तक पानी, नहर के माध्यम से नहीं पहुंच रहा है। इस कारण किसानों को सिंचाई के लिए परेशान होना पड़ता है। यहां के किसानों का कहना है कि, हर वर्ष बल्क में व्यर्थ बह रहे पानी के कारण हमारे क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पहुंच पाता है। जिसकी वजह से हमें नुकसानी उठानी पड़ती है और जिम्मेदार इस ओर ध्यान नही दें रहे है। अगर घोषणानुसार गुजरात मॉडल में नहरों को बना दिया जाए तो अंतिम छोर तक पानी पहुच सकता है।

पानी की व्यर्थ बर्बादी रोकी जाए तो आधा जिला हराभरा हो सकता है

      बामनिया के भाजपा नेता अजय जैन ने बताया कि, माही नहरों से लीकेज के कारण व्यर्थ बर्बाद हो रहे पानी को रोकने का प्रयास किए जाने चाहिए। अगर व्यर्थ बह रहे पानी को रोक दिया जाए तो नहरों का विस्तारीकरण कर बामनिया, खवासा, थांदला तक माही का पानी पहुच सकता है। जिससे सिचाई के लिए कमांड एरिया बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में किसानों के साथ क्षेत्रवासियों को पानी की समस्या से जूझना नही पड़ेगा। किसानों को अप्रेल, मई माह में भी पानी भी मिल सकता है। जिससे वे गर्मी के मौसम में भी फसलों का उत्पादन कर सकते है। साथ ही अप्रेल ओर मई माह में भीषण गर्मी पड़ने से क्षेत्र के सभी नदी-नाले सूख जाते हैं। इस पानी को बचाकर नदी-नालों में उस समय छोड़कर फिर से रिचार्ज किया जा सकता है। ताकि भीषण गर्मी में पानी की समस्या न हो।

0 से 18 किलोमीटर तक ज्यादा सीपेज होता है पानी

     पेटलावद निवासी वरिष्ठ भाजपा नेता भेरूलाल जाजपर ने बताया कि, माही डेम से निकलने वाली नहरो में सबसे ज्यादा लीकेज जीरो से 18 किलोमीटर तक हो रहा है। क्योंकि वहां पर हार्ड रॉक ओर नहरो की गहराई ज्यादा है। ओर इतने किलोमीटर में ज्यादा खेती भी नही है और सिचाई का रकबा भी कम है। अगर नहरो को गुजरात की तरह पक्की बना दिया जाए तो नहरो का दायरा बामनिया ओर थांदला, मेघनगर तक बढ़ सकता है। इसके लिए विभाग को स्टीमेट बनाकर मध्य प्रदेश सरकार को भेजना चाहिए ओर मध्यप्रदेश सरकार को केंद्र सरकार से अलग से फंड की डिमांड करनी चाहिए, अब इस क्षेत्र के विधायक, केबिनेट मंत्री भी है तो स्वर्गीय दिलीपसिंह भूरिया के हरित झाबुआ के सपने को साकार करने के लिए प्रयास करना चाहिए।


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