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चुनाव का तीसरा चरणः प्रत्याशी जनता के चरणों में...
Report By: संजय भटेवरा 02, Nov 2023 2 years ago

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माही की गूंज, झाबुआ।

        आगामी विधानसभा चुनाव के दो चरण पूरे हो चुके हैं। पहले चरण में चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीद्वार पार्टी हाईकमान के चरणों में थे और अपने लिए टिकट की जुगाड़ कर रहे थे। दूसरे चरण में पार्टी हाईकमान और असंतुष्ट को समझाने में जुटा था। हालांकि यह चरण आज 2 नवम्बर को दोपहर नाम वापसी तक जारी रहेगा। उसके बाद होगा तीसरे चरण का प्रारंभ जहां चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी आम जनता के चरणों में नतमस्तक होते नजर आएंगे। 2 नवंबर को दोपहर पश्चात से चुनाव प्रचार समाप्ति तक चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थी अपने आप को सच्चा जन सेवक साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। यहां तक की विरोधियों पर कीचड़ उछालने से भी नहीं कतरायेगे। जबकी हमारी संस्कृति में विरोधियों का भी सम्मान करने की परंपरा रही है।

तीनों सीटों पर कांटे की टक्कर

        नामांकन की समय सीमा खत्म होने तथा नामांकन की जांच होने के पश्चात झाबुआ विधानसभा से 1. बालू निनामा बसपा, 2. भानु भूरिया भाजपा, 3. विक्रांत भूरिया कांग्रेस, 4. गब्बर सिंह वास्केल बीएपी, 5. अमरा भाभोर, 6. अमरु मोहनिया, 7. कलमसिंह भाभोर, 8. जेवियर मेडा, 9. धनसिंह बारिया निर्दलीय रूप से चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। अगर नाम आपसी के समय पर कोई भी उम्मीद्वार अपना नाम वापस नहीं लेता है तो इन्हीं के बीच मुकाबला होना तय है। वही काग्रेस, बागी जेवियर मैंड़ा को अपने पक्ष में समझाने में सफल हो गई है। यहां मुख्य मुकाबला कांग्रेस के विक्रांत भूरिया व भाजपा के भानु भूरिया के बीच होना तय है। यहां कांग्रेस को जेवियर मेडा नुकसान पहुचा सकते थे लेकिन वह खतरा अब काग्रेस के लिये खत्म हो चुका है। भाजपा को धनसिंह बारिया नुकसान पहुंचा सकते हैं, भाजपा अपने बागी को मनाने में सफल होगी या नही यह आज पता चलेगा। वही अन्य उम्मीद्वार कोई करिश्मा दिखा पाएंगे इसकी संभावना कम हैं। पिछले चुनावो का प्रदर्शन देखें तो यहां से भाजपा की और से पवेसिंह पारगी, शांतिलाल बिलवाल, गुमानसिंह डामोर व कांग्रेस की ओर से जेवियर मैडा और कांतिलाल भूरिया यहां से विधायक चुने जा चुके। बावजूद अशिक्षा, बेरोजगारी, और ग्रामीण अंचलों में मूलभूत सुविधाऔं की कमी बरकरार है। नामांकन रैली में दोनों ही दलों के प्रत्याशी एक-दूसरे पर व्यक्तिगत आरोप तक ही सीमित रहे हैं। विक्रांत भूरिया जहां भाजपा प्रत्याशी को गुंडा कहते नजर आए। वही भानु भुरिया असली आदिवासी बनाम नकली आदिवासी का मुद्दा उठाकर खुद को असली आदिवासी और विक्रांत भूरिया को नकली आदिवासी बनाते नजर आए। जहां तक आम जनता का सवाल है वो विकास चाहती है तथा झाबुआ जिले में उद्योग धंधे सहित रोजगार मुलक योजनाएं चाहते हैं दोनों ही दलों के दावों का विश्लेषण कर जनता अपना मत देगी।

थांदला विधानसभा सीट

       नाम निर्देशन की समीक्षा के उपरांत यहां 1. कलसिंह भाभर भाजपा, 2. वीरसिंह भूरिया कांग्रेस, 3. तोलसिंह भूरिया जेडीयु, 4. इलियास मचार बसपा, 5. मनीष मुनिया भारतीय ट्राइबल पार्टी, 6. मंजू डामर बीएपी, 7. तानसिंह मईडा, 8. बाबू डामोर, 9. उदयसिंह मचार निर्दलीय रूप से मैदान में है। नाम वापसी की समय सीमा के बाद शेष बचे उम्मीद्वारों के बीच मुकाबला होना है। यहां माजू डामोर बीएपी व तानसिंह मईडा दोनों प्रमुख दलों के उम्मीद्वारों के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं। लेकिन मुख्य मुकाबला कांग्रेस के वीरसिंह भूरिया व भाजपा के कलसिंह भाभर के बीच होना ही तय है। पिछले चुनाव की बात करें तो पिछले 20 वर्षों में 10 वर्ष कलसिंह भाभर यहां से विधायक रहे हैं। वहीं 10 वर्ष वीरसिंह भूरिया भी विधायक रहे हैं। जनता के लिए दोनों ही चेहरे जाने पहचाने हैं एक और वीरसिंह भूरिया की छवि क्षेत्र में सीधे-साधे गांधीवादी नेता के रूप में है। वही कलसिंह भाभर के छवि तेजतर्रार व दबंग नेता की है। वीरसिंह भूरिया व्यक्तिगत छवि व भाजपा विरोधी वोट के सहारे जीत का दावा कर रहे हैं। वही कलसिंह भाभर पिछले 5 वर्षों में विधायक कि, निष्क्रियता व सत्ता पक्ष की योजनाओं के बलबूते अपनी नेया पार लगाने की उम्मीद् लगाए बैठे हैं। नामांकन रैली में कलसिंह भाभर आक्रामक शैली में नजर आए और खुद को जनता का सेवक (दाडकिया या हाली) कहने से भी नहीं कतराए। वहीं वीरसिंह भूरिया ने अपना नामांकन सादगी पूर्वक भरा। जहां तक क्षेत्र के मुख्य मुद्दे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार ही है आजादी के अमृतकाल में पीने के पानी व बड़ी सिंचाई योजनाओं का अभाव है। रोजगार की तलाश में आज भी ग्रामीण सूरत और कोटा पर ही निर्भर है। क्षेत्र में आज भी कहावत प्रचलित है कि,  “बांधों रोटा और चालो कोटा“ क्षेत्र में होली के त्यौहार के बाद काम की तलाश में पलायन शुरू हो जाता है और यह पलायन बारिश के प्रारंभ होने तक जारी रहता है।

पेटलावद विधानसभा

      पेटलावद विधानसभा में नामांकन की जांच के पश्चात 1.निर्मला भूरिया भाजपा, 2.वालसिंह मैडा कांग्रेस, 3.रामेश्वर सिंगाड़ जेडीयू , 4. कोमलसिंह डामोर आप, 5. रामचंद सोलंकी बसपा, 6.बालूसिंह गामड़ बीऐपी, 7. अकमाल मालू डामोर, 8.प्रेमसिंह भूरिया, 9. सतन कटारा निर्दलीय रूप से ताल ठोक रहे है। यहां से सरकारी नौकरी छोड़कर बीएपी से चुनाव लड़ने वाले बालूसिंह गामड़ व निर्दलीय अकमाल मालू डामोर कांग्रेस और भाजपा के समीकरणों को बिगाड़ सकते हैं लेकिन मुख्य मुकाबला तो भाजपा के निर्मला भूरिया व कांग्रेस के वालसिंह मैडा के बीच ही है। जिले का एकमात्र विधानसभा क्षेत्र है जहां से आम आदमी पार्टी की ओर से भी उम्मीद्वार मैदान में है। उनकी उपस्थित कितनी रहती है यह तो मशीन में दर्ज होने वाले वोटो की संख्या से ही पता चल सकेगा। जहां तक पिछले चुनावो की बात करें तो यहां भी थांदला सीट जैसी ही स्थिती है। पिछले 20 वर्षों में यहां से 10 वर्ष कांग्रेस के वालसिंह मैडा तो 10 वर्ष भाजपा से निर्मला भूरिया विधायक रही है। प्रमुख मुद्दे को देखे तो जिले का यह क्षेत्र उन्नत खेती के लिए जाना जाता है। यहां के टमाटर ने देश-विदेश में धूम  मचाई है लेकिन बावजूद इसके इस क्षेत्र में टमाटर के संग्रहण व विपणन सुविधा नहीं है। किसानों को बाजार पर ही निर्भर रहना पड़ता है। सिंचाई के क्षेत्र में यह क्षेत्र जिले में अव्वल है लेकिन बावजूद इसके मूलभूत सुविधाओं की दरकार आज भी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य औद्योगिक क्षेत्र की मां     ग यहां लंबे समय से की जा रही है।


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