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धूमधाम से मना आदिवासी दिवस, रिकॉर्ड तोड़ भीड़ ने उड़ाए राजनीतिक दलों के होश
10, Aug 2023 2 years ago

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कांग्रेस नेताओं ने आयोजन में की शिरकत, भाजपा ने बनाई दूरी

माही की गूंज, पेटलावद।

          स्थानीय शासकीय महाविद्यालय पेटलावद में संयुक्त राष्ट्र संघ यूएनओ द्वारा घोषित 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर जयस संगठन द्वारा विघम आयोजन किया गया। आयोजन में उपस्थित जनसैलाब ने राजनीतिक दलों के होश उड़ा दिए। इस आयोजन में लगभग 15 से 20 हजार लोगों के शामिल हुए। आलम ये था कि, कानवन रोड स्थिति महाविद्यालय से लेकर नगर के गांधी चौक लगभग डेढ़ किलोमीटर तक भीड़ बनी रही। हजारो की भीड़ के बीच कार्यक्रम का शुभारभ आदिवासी जननायकों टंट्या भील, बिरसा मुंडा, भीमराम अम्बेटकर, वीरांगना दुर्गावती, पैसा कानून के जनक स्व. दिलिप सिंह भूरिया की प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर किया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण अजाक्स के प्रीतम मुनिया ने दिया। जयस की नारी शक्ति कार्यवाहक अध्यक्ष नितिका पचाया द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयस के पूर्व अध्यक्ष पूर्व सरपंच कांतिलाल भाबर ने आदिवासी दिवस क्यो मनाया जाता है और आदिवासीयो के संवैधानिक अधिकार क्या है इसकी जानकारी दी। 

          आयोजन के कार्यवाहक अध्यक्ष ईश्वर गरवाल ने बताया कि, इस समय सबसे बड़ी समस्या आदिवासीयो की भूमि अधिग्रहण की है और जमीन हमारी माँ है इसे किसी कीमत पर नही छोड़ेंगे। युवा जयस कार्यकर्ता धर्मेंद डामोर ने मणिपुर की घटना पर आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि हमारी माता बहने सुरक्षित नही है। हमे इस प्रकार की घटना को अंजाम देने वालो को फाँसी की सजा दिलवानी है ओर इसे सरकार की नाकामी बताया। हाल ही में 13 वर्ष की शासकीय सेवा इंजीनियर से समाज सेवा की भावना लेकर त्यागपत्र देकर सुर्खियों में आए बाबूलाल गामड़ ने वर्तमान में शासकीय कार्यों में  लालफीताशाही और जनप्रतिनिधियों द्वारा शासकीय कर्मचारियों को और अकारण मानसिक रूप से प्रताड़ित करने पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया ओर कहा कि चाहे अधिकारी हो या चाहे जनप्रतिनिधि हो छोटे कर्मचारियों को प्रताड़ित नहीं करना चाहिए इससे उनका मनोबल टूटा है मैं स्वयं इसका उदाहरण हूं। 

          वही कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयस जिला प्रभारी प्रकाश डामोर ने मौजूदा विधायकों और सांसदों के द्वारा आदिवासी पर हो रहे अत्याचार पर आवाज नहीं उठाने नहीं उठाने को लेकर सवाल किए और अपने भाषण में जिले में मेडिकल कॉलेज और कृषि कॉलेज खोलने सहित कई बड़ी मांगे आदिवासी क्षेत्र के लिए की। उक्त गरिमामय समारोह में विधायक वालसिंह मैड़ा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष मालू अकमाल डामोर, युवा कार्यकर्ता सुनील बाबू, नारायण सिंह सोलंकी, दशरथ बारिया, विजय राज वसुनिया, अमर सिंह देवड़ा, अजित सिंह, अमर सिंह वसुनिया ने अपने अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम को सफल बनाने में इनका रहा योगदान 

          आयोजन समिति के अध्यक्ष अमर सिंह देवड़ा, प्रवीण डामर, पवन खराड़ी , विजय गामड़, जिला जयस संयोजक प्रेम सिंह भूरिया, भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा के दशरथ बारिया का सराहनीय योगदान रहा। सभा में उपस्थित जन सैलाब एक महारैली के रूप में श्रद्धांजलि चौक से मुख्य मार्ग से होते हुए उत्कृष्ट मैदान पेटलावद पहुंची रैली में आदिवासी युवा-युवतियो ने परंपरागत वेशभूषा के में चलते हुए नारों के साथ चलते रहे ।जयस ने नारी शक्ति ने मणिपुर की घटना के विरोध में नारे लगाए एवं आक्रोश व्यक्त किया। कार्यक्रम में जय आदिवासी छात्र संगठन, भील प्रदेश युवा मोर्चा, आदिवासी परिवार, आदिवासी एकता परिषद, नारी शक्ति  एवं संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता ने समाज की एकता का परिचय दिया कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम का संचालन  जयस जिला प्रभारी कांतिलाल गरवाल ,सामाजिक कार्यकर्ता सचिन गामड़ और दशरथ बारिया ने किया आभार आयोजन समिति के अध्यक्ष मनोज गामड़ ने माना।

जगह-जगह हुआ स्वागत, भाजपा ने बनाई दूरी 

          रैली के नगर भृमण के दौरान जगह-जगह पर राजनीति दलों और संगठनों ने स्वागत कर फूलों की वर्षा की। जिला पंचायत उपाध्यक्ष मालू डामोर, विधायक वालसिंग मेड़ा ने अलग-अलग मंचो से स्वागत किया। वही दूसरे संगठन में स्वागत करते नजर आए। लेकिन इस पूरे आयोजन के दौरान भाजपा के शीर्ष नेता और आदिवासी नेता गायब रहे। आयोजन स्थल पर भी कई भाजपाई दूर से वीडियो बनाते देखे गए लेकिन कोई बड़ा पदाधिकारी मंच तक नही पहुँचा। इस आयोजन में उमड़ी भीड़ में वर्ष 2018 में हुवे आयोजन का रिकॉड तोड़ दिया। इसके बाद जयस सहित समस्त आदिवासी संगठनों ने सेक्टर अनुसार आयोजन करना शुरू कर दिए थे। इस वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए विकास खण्ड स्तर पर आयोजन कर संगठन की उपस्थिति दर्ज करवाने का प्रयास किया गया। जिंसमे जयस को पूरी पूरी सफलता मिलती दिखी ओर भाजपा और कांग्रेस को अपनी चुनावी रणनीति पर सोचने और मजबूर कर दिया।



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