
एसडीएम ने कहा किसी के साथ अन्याय नही होने देंगे तो ग्राम पंचायते मनमानी में लगी
रुनजी, सारंगी सहित 60 पंचायतो में लगी हुई है आपत्ति, नही हो रहे निराकरण
माही की गूंज, पेटलावद
मोबिलाइजर भर्ती को लेकर जनपत पंचायत और अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय पेटलावद में इन दिनों भारी भीड़ जमा हो रही है। आलम ये है कि, इन कार्यालयों में आने वाला हर दूसरा आवेदन मोबिलाइजर भर्ती को लेकर दिया जा रहा है। बात करे पेटलावद विकास खण्ड की तो यहां की 77 पंचायतो में से लगभग 60 पंचायतो में ग्राम पंचायत द्वारा जारी सूची पर आपत्ति लगी हुई है, जिसके निपटारे के लिए दो से तीन बार अधिकारी बैठक कर चुके है लेकिन कोई निराकरण होता नही दिख रहा है।
पेटलावद राजस्व अनुविभागीय अधिकारी शिशिर गेमामत का कहना है कि, किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय नही होने देंगे। लेकिन उसके उलट अब तक किसी पंचायत का निराकरण नही हो सका है, आपत्तिकर्ताओ की आपत्तियों को जांचकर ग्राम पंचायत सचिवों को आवश्यक निर्देश जारी भी किए जा रहे है लेकिन ग्राम पंचायत अपने हिसाब से मोबिलाइजर भर्ती का काम निपटाने में लगी हुई है।
बहारी राज्यो की अंकसूची सहित फर्जी अंकसूची और फर्जी अनुभव के हो रहे बड़े खुलासे
मोबिलाइजर पद के लिए आवेदन क्या शुरू हुए लोगो द्वारा नोकरी पाने के लिए कागजो में की गई हेरा-फेरी के बड़े मामले सामने आए है। खासकर देखने को मिला है कि, हाई सेकेंड्री स्कूल की अंकसूची जो कि एमपी बोर्ड के न होकर अन्य राज्यो बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, ऊर्दू बोर्ड की लगाई जा रही है। जिन बच्चों को एमपी बोर्ड में पासिंग नम्बर ही आए थे उन्होंने श्रेणी सुधार के नाम पर अन्य राज्यो से ओपन पढ़ाई की और उनके 80 प्रतिशत से लेकर 95 ओर 98 प्रतिशत अंक की अंकसूची आवेदन के साथ लगी हुई है। जिन्हें ग्राम पंचायत सचिव और जिम्मेदार अधिकारियों ने बिना जांच पड़ताल के ही मान्य कर लिया, जबकि इनमें से कई अंकसूचियां फर्जी हो सकती है।
कुछ इसी प्रकार अनुभव प्रमाण-पत्र भी तीन से पांच हजार रूपए देकर बनावा लिए गए, क्योकि आपत्ति के बाद कई अभ्यर्थी पे-स्लिप (वेतन पर्ची) या बैंक का रिकॉड पेश नही कर पाए तो कई लोगो के अनुभव प्रमाण-पत्र देखकर वैसे ही साफ होता है कि, जिन वर्षो में वो नियमित पढ़ाई कर रहे थे, उन वर्षो का ही संस्थाओं में नियमित कार्य करने का अनुभव प्रमाण-पत्र लगा रहे थे। कई पंचायतो में अलग-अलग अनुभव लगाने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्र मान्य व अमान्य किए गए, मतलब जो अनुभव प्रमाण-पत्र एक पंचायत ने मान्य किया तो दूसरी पंचायत ने उसी तरह का अनुभव प्रमाण-पत्र अमान्य कर दिया।
यही हाल कम्प्यूटर डिग्री का भी है जिनको पंचायतो ने अपनी सुविधा के मान से मान्य ओर अमान्य कर दिए। समग्र आईडी से लेकर मतदाता सूची में हेरा-फेरी के बड़े मामले सामने आए है, कई लोगो के नाम दो पंचायतो में दर्ज है और उनके नाम से अलग-अलग आईडी तक जनरेट की गई है। जो कि विचारणीय होकर कार्रवाई योग्य भी है लेकिन बड़े मामले सामने आने के बाद भी इन विषयों को अधिकारी देखकर भी अनदेखा कर रहे है।
नए नियम से फिर अपडेट होगी सूची, अधिकारी कर रहे गुमराह
पुराने आदेश के तहत मोबिलाइजर भर्ती में विकलांग प्रमाण-पत्र होने की दशा में प्रमाण-पत्र लगाने के निर्देश थे लेकिन उसके अलग से अंक देने का कोई प्रावधान नही था। लेकिन कुछ दिन पूर्व भोपाल से नए आदेश जारी किए गए, उसमे 10 अंक विकलांग को अलग से देना निर्धारित किया गया है। मामला सामने आने के बाद कई विकलांग अभ्यर्थियों ने आवेदन लगाकर विकलांग के अंक जोड़ने का निवेदन कर वरियता सूची फिर से जारी करने की मांग की गई, लेकिन स्थानीय स्तर पर विकलांग अभ्यर्थियों को अंक जोड़ने से मनाकर दिया गया। जबकि जिला सीईओ जैन ने इस बारे में बताया कि, नए निर्देशो के आधार पर विकलांग कोटे के अंक जोड़े जाएगे। पूरे मामले में ग्राम पंचायत और विकास खण्ड स्तर के अधिकारियों और जिला अधिकारीयो में तालमेल की कमी दिख रही है जिसके कारण हर पंचायत के कई आवेदक परेशान हो रहे है।
60 पंचायतो में लगी हुई आपत्ति
एक आंकड़ा देखा जाए तो विकासखंड की 77 में से 60 पंचायतो में आपत्ति लगी हुई है जो निराकरण का इंतजार कर रहे है। मठमठ, करवड़, रुनजी, बाचीखेड़ा, बेकलदा, बरवेट, मोहवडिपाड़ा, मोहकमपुरा, सारंगी, केशरपुरा, मातापाङा, जामली, हमीरगढ़, तारखेड़ी, बेड़दा, माण्डन सहित कई पंचायतो में आपत्ति लगी हुई है। अनुविभागीय अधिकारी के नेतृत्व में लगभग तीन बार आपत्तियों पर चर्चा हो चुकी है लेकिन कोई निराकरण नही होता दिख रहा है। अब कई मामले जिला कलेक्टर और जिला सीईओ तक पहुंच चुके है तो कई मामलों में न्यायलय तक जाने की तैयारी हो चुकी है।
पंचायते कर रही मनमानी
सैकड़ो शिकायते दर्ज होने के बाद भी ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव द्वारा मनमानी की जा रही है, जिन्होंने पहले से मोबिलाइजर किसको बनाना है तय कर लिया है, आपत्तियो का निराकरण नही होने के बाद भी सचिव मनमानी कर दूसरी सूची जारी कर रहे है। कई पंचायतो में आपत्ति का निराकरण होने के बाद अधिकारीयो के निर्देश के बाद भी सूची नही लगाई जा रही है जिससे कि, आपत्तिकर्ता को निराकरण होने की जानकारी नही मिल रही है।
सरपंच पुत्र को मोबिलाइजर बनाने के प्रयास, विकलांग महिला के अंक नही जोडे, विधवा महिला ने लगाया पक्षपात का आरोप
गूंज की मोबोलाइजर भर्ती की पहल रंग ला रही है, भर्ती में हो रहे घोटाले को लेकर कई आवेदक अपनी आपत्ति और प्रमाणित दस्तावेजो के साथ गूंज के पास पहुंच रहे है। ग्राम पंचायत रुनजी में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहा सरपंच के पुत्र को मोबिलाइजर पद पर नियुक्ति देने के लिए दस्तावेजो में हुई हेरा-फेरी को नही देखा गया, सबसे बड़ी बात यह कि महिला आवेदक की शिकायत के बाद भी कोई निराकरण नही हुआ है। यहां रमेश निनामा द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजो में हाई सेकेंडरी में अधिक अंक दिखने के लिए झारखंड बोर्ड की अंकसूची लगाई गई, साथ ही एक ही वर्ष में दो जगह से नियमित पढ़ाई की अंकसूची लगाई जो कि, नियमो अनुसार मान्य नही है, फिर भी दोनों अंक सूची मान्य कर अंक दिए गए है। मामला अनुविभागीय अधिकारी के संज्ञान में भी लाया गया है लेकिन कोई निराकरण नही होने के कारण आपत्तिकर्ता महिला ने जिला कलेक्टर को जनसुनवाई में गुहार लगाई है।
सारंगी पंचायत में विकलांग कोटे के अंक मिलने के आदेश आने के बाद अंक जोड़ने का आवेदन लेकर पहुंची विकलांग महिला को अंक जोड़ने का मना कह दिया गया, जबकि सारंगी की एक विधवा महिला ने ग्राम पंचायत पर फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र के अंक देने का आरोप लगाया है। जबकि शिकायत के बाद वरीयता सूची में पहले स्थान पर रहे अजय कटारा वेतन पर्ची नही दिखा पाए। ये मामले हर पंचायत में सामने आ रहे है देखना है कि, अंतिम निर्णय के बाद प्रशासन पंचायत स्तर पर होने वाली इस नियुक्ति में कितनी पारदर्शिता ला पाता है।
